लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आसन्न विधान सभा चुनाव के चलते दिन-प्रतिदिन सियासत के नए रंग-रूप देखने को मिल रहे हैं। राजनीतिक दलों में सत्ता पाने की होड़ मची है। सत्ता के लिए दिन-रात दौड़-भाग चल रही है। चुनावी मौसम में भीम आर्मी के संस्थापक एवं आजाद समाज पार्टी के मुखिया चंद्रशेखर आजाद रावण भी गाहे-बगाहे सुर्खियां बटारने में कामयाब हो रहे हैं। समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ गठबंधन की संभावनाएं समाप्त होने पर चंद्रशेखर रावण अब छोटे-छोटे दलों को साथ लेकर चुनाव मैदान में दम-खम दिखाने को आतुर हैं।
उन्होंने गोरखपुर सदर सीट से चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। गोरखपुर सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को उतारा है। योगी आदित्यनाथ को चुनाव लड़ाने के लिए मौजूदा विधायक डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल का टिकट काट दिया गया है। सीएम योगी के खिलाफ चंद्रशेखर रावण ने चुनाव मैदान में उतरने की घोषणा कर उस समय की याद ताजा कर दी है जब आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने लोकसभा चुनाव में वाराणसी सीट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ ताल ठोक दी थी।
केजरीवाल को हार का सामना करना पड़ा था। राजनीति के जानकारों का मानना है कि चंद्रशेखर ने सीएम योगी के सामने चुनाव मैदान में उतरने का निर्णय सिर्फ सुर्खियों में बने रहने के लिए लिया है। आजाद समाज पार्टी का गोरखपुर में फिलहाल कोई वजूद नजर नहीं आता है। हालाकि यह भी संभव है कि विपक्षी दल गोरखपुर सीट पर चंद्रशेखर को समर्थन देने की घोषणा कर दें, मगर अभी ऐसा कोई सीन नहीं है। गोरखपुर सीट पर भाजपा को चुनौती देना इतना आसान नहीं है। यह सीट 1989 से भाजपा के पास है। यानी पिछले 33 साल से भाजपा के इस गढ़ को कब्जाने में कोई भी दल कामयाब नहीं हो पाया है। 2002 में डॉ. आरएमडी अग्रवाल ने चुनाव जीता था।
उस समय वह हिंदू महासभा के टिकट पर चुनाव लड़े थे, मगर बाद में उन्होंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। पिछले विधान सभा चुनाव में भाजपा से यह सीट छिनने के लिए सपा व कांग्रेस ने गठबंधन कर अपना प्रत्याशी उतारा था। चर्चा थी कि चुनाव रोचक होगा, मगर नतीजों ने सपा-कांग्रेस को निराशा कर दिया था। भाजपा उम्मीदवार 60 हजार से ज्यादा वोट के अंतर से जीत गए थे। नवगठित आजाद समाज पार्टी अपने दम पर गोरखपुर सीट पर कोई बड़ा उलट-फेर करने की स्थिति में दूर-दूर तक दिखाई नहीं दे रही है।
अलबत्ता माना जा रहा है कि अति आत्मविश्वास से भरे चंद्रशेखर रावण को वहां मुंह की खानी पड़ सकती है। गोरखपुर सीट पर तीन मार्च को मतदान होना है। तब तक वहां सियासी समीकरण किस करवट होंगे, फिलहाल कहना मुश्किल है। यदि चंद्रशेखर रावण इस सीट को फतेह करने में कामयाब हो गए तो वह सियासत में बड़ा चेहरा बनकर उभरेंगे। अभी तो सिर्फ इंतजार किया जा सकता है। गोरखपुर में सीएम योगी आदित्यनाथ का व्यक्तिगत वोट बैंक बेहद मजबूत है।















