रसोई गैस संकट : महंगाई की आग में झुलसी जनता, सरकार की नई अग्निपरीक्षा

 लेखक, विनोद पाण्डेय (लेखक पत्रकार है। राजनीतिक और सामाजिक विषयों पर लिखते हैं। कई प्रमुख राष्ट्रीय समाचार पत्रों में स्वतंत्र लेखन करते हैं।
देश में गहराए रसोई गैस संकट ने मोदी सरकार की टेंशन बढ़ा रखी है। आमजन की परेशानी को ध्यान में रखकर उच्चस्तर से निरंतर कड़े एवं बड़े फैसले लिए जा रहे हैं। वाकई यह वक्त सरकार के लिए काफी चुनौतीपूर्ण है। कोरोना काल और नोटबंदी के बाद यह तीसरा बड़ा मौका है, जब सरकार को आमजन की उम्मीदों पर खरा उतरना है। इस बीच विपक्ष सहयोगात्मक रवैया अपनाने की बजाए जुबानी हमले करने में मशगूल है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के मध्य छिड़ी जंग का खामियाजा अब भारतीयों को भी भुगतना पड़ रहा है। ऊर्जा आपूर्ति का संकट उभरने पर रसोई गैस की किल्लत ने आमजन की परेशानी बढ़ा दी है। होर्मुज स्ट्रेट में फंसे भारतीय जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए भरसक प्रयास चल रहे हैं। तनाव के बीच कुछ राहत भरी खबरें मिल रही हैं। ये अच्छे संकेत हैं। ईरान की वजह से होर्मुज स्ट्रेट से समुद्री जहाजों का आवागमन प्रभावित हो रहा है। हालांकि भारत की अपील पर ईरान ने सकारात्मक रूख अपनाया है। उधर, देश में रसोई गैस की आपूर्ति सुचारू रखने की खातिर उठाए गए कुछ कदम समय की जरूरत हैं। सरकार ने पीएनजी उपभोक्ताओं को एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करने का जो आदेश दिया है, वह जरूरी था। चूंकि एक उपभोक्ता दो-दो सुविधाएं उठाता रहेगा तो जरूरतमंद के लिए परेशानी बढ़ना तय है। दरअसल पीएनजी उपभोक्ताओं ने भी रिफिल की बुकिंग कराने में दिलचस्पी दिखाई है। यह एक प्रकार से रिफिल की जमाखोरी का मामला बनता है।
जिन्हें जरूरत है, उन्हें एक अदद सिलेंडर नहीं मिल रहा और जिनके घरों में पाइप के जरिए गैस की सुचारू आपूर्ति हो रही है, वह रिफिल को बुक कर घर में स्टॉक करने को प्रयासरत हैं। यह कतई उचित नहीं है। अच्छी बात है कि सरकार ने रसोई गैस की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने को गंभीरता दिखाई है। इसके तहत आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू कर दिया गया, मगर ऐसा लगता नहीं कि इससे जमाखोरों और मुनाफाखोरों के दुस्साहस में कोई कमी आई है। इसका प्रमाण यह है कि छापेमारी के दौरान विभिन्न शहरों में रसोई गैस सिलिंडरों की जमाखोरी और कालाबाजारी के मामले निरंतर सामने आ रहे हैं। उन मुनाफाखोरों की गिनती करना भी मुश्किल है, जो महंगे दामों पर रसोई गैस सिलिंडर बेच रहे हैं। ऐसे तत्वों की सक्रियता का एक कारण संबंधित अधिकारियों और पुलिस की मिलीभगत भी होती है। देश में किसी भी संकट के समय आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी और कालाबाजारी  आम बात है। कोरोना काल के समय जब समूचा देश संकट में घिरा था, तब भी कुछ दवाओं के साथ कई आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी देखने को मिली थी। आपदा को अपना कारोबार बनाने वाले ऐसे नागरिक सभ्य समाज के दुश्मन ही कहे जाएंगे।
चूंकि नैतिकता और सदाचार की कमी के कारण जमाखोरी और कालाबाजारी एक सामाजिक बुराई का रूप ले चुकी है, इसलिए जरूरी सिर्फ यह नहीं कि रसोई गैस सिलिंडरों की जमाखोरी और कालाबाजारी कर रहे नागरिकों के खिलाफ सघन अभियान चलाया जाए, बल्कि यह भी है कि उन्हें कठोर दंड का भागीदार बनाया जाए। आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत जमाखोरी और कालाबाजारी करने पर जुर्माना लगाने के अलावा तीन माह से लेकर सात साल तक की सजा देने का प्रावधान है, मगर आखिर कितने ऐसे मुनाफाखोर हैं, जिन्हें सात साल की सजा मिलती है? अधिकतर तो येन-केन-प्रकारेण बिना किसी दंड के छूट जाते हैं या फिर मामूली जुर्माना देकर बच निकलते हैं। अच्छा यह होगा कि ऐसे नागरिकों को ऐसी कठोर सजा दी जाए, जो नजीर बने। वहीं, वैवाहिक सीजन में गैस की कमी के कारण विवाह समारोह में खानपान व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। गैस सिलिंडर की कीमत दोगुनी हो जाने के कारण कई कैटरिंग कंपनियों ने शुभ अवसरों के लिए ऑर्डर लेना बंद कर दिया है। मार्च-अप्रैल पर्यटन का मौसम होता है, इसलिए गैस की कमी के कारण पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की आवाजाही कम हो गई है।
कोकण के प्रसिद्ध गणपतिपुले मंदिर में भी गैस की कमी का गहरा असर पड़ा है। सिलेंडर न मिलने के कारण गणपतिपुले मंदिर में लड्डू और खिचड़ी का प्रसाद बंद करना पड़ा। हालांकि सरकार का दावा है कि सब ठीक है और गैस की आपूर्ति सुचारु रूप से चल रही है, मगर गैस एजेंसियों के बाहर लगी लंबी कतारें कम नहीं हो सकी हैं। उपभोक्ताओं को घरेलू गैस सिलेंडर भरवाने के लिए गैस एजेंसियों के बाहर कई-कई घंटे तक कतारों में खड़े होना पड़ रहा है। पुणे में इंजीनियरिंग छात्रों के छात्रावासों में भोजन से रोटी और सब्जी पूरी तरह हटा दी गई है। हॉस्टलों में रह रहे छात्रों के मोबाइल फोन पर मैसेज भेजे गए हैं कि गैस की कमी दूर होने तक उन्हें रोटी की जगह दाल-भात खाना पड़ेगा। यह समय निश्चित से संकट का है। ऐसे में संयम एवं धैर्य बनाए रखने की जरूरत है। केंद्र एवं राज्य सरकारों को आपसी मनमुटाव को त्याग कर देशहित में काम करने की जरूरत है। ऐसे हालात में अफवाहें भी फैलने लगती हैं। अफवाहों से माहौल बिगड़ने का खतरा रहता है। अलबत्ता पुलिस-प्रशासन को दिन-रात सतर्क रहना होगा।