पाकिस्तान में ईशनिंदा के नाम पर कानून से खिलवाड़

पाकिस्तान में ईशनिंदा के नाम पर एक बार फिर कट्टरपंथ का घिनौना कारनामा सामने आया है। ईशनिंदा के आरोप में श्रीलंकाई नागरिक की पीट-पीटकर हत्या करने के बाद शव को सड़क पर रखकर जला दिए जाने की घटना ने समूचे पाकिस्तान को शर्मसार कर दिया है। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना की पूरी दुनिया में निंदा हो रही है। कट्टरपंथियों के कारनामे का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। यह वीडियो देखकर हर कोई पाकिस्तान को कोस रहा है। पाकिस्तान में कट्टरपंथियों पर लगाम कसने में इमरान सरकार नाकाम है।

कट्टरपंथियों के दबाव में सरकार हर बार घुकने टेकने को मजबूर हो जाती है। ताजा घटना के बाद प्रधानमंत्री इमरान खान बेशक सफाई दे रहे हैं, मगर लगता नहीं है कि भविष्य में वह कोई बड़ा कदम उठाने की हिम्मत जुटा पाएंगे। पाकिस्तान के कारखाने में अधिकारी प्रियंता कुमारा श्रीलंकाई नागरिक थे। उनका कसूर सिर्फ इतना था कि उन्होंने कट्टरपंथी तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) के पोस्टर को कथित तौर पर फाड़ दिया था। पोस्टर पर कुरान की आयतें लिखी थीं। इस्लामी पार्टी का यह पोस्टर कुमारा के कार्यालय के पास की दीवार पर चस्पा किया गया था। इस घटना की जानकारी मिलने के बाद उग्र भीड़ ने ईशनिंदा का आरोप लगाकर पहले श्रीलंकाई नागरिक को जबरन फैक्ट्री से बाहर खीच लिया। फिर सरेआम पीट-पीटकर हत्या कर दी।

बाद में सड़क पर शव को रखकर जला दिया गया। कट्टरपंथियों के इस कदम से साफ है कि उन्हें पुलिस का कोई खौफ नहीं था। पाकिस्तान में टीएलपी को कट्टरपंथी संगठन माना जाता है। इमरान खान की सरकार ने कुछ दिन पहले टीएलपी के साथ गुप्त समझौता किया था। इसके बाद इस कट्टरपंथी संगठन से प्रतिबंध हटा लिया गया था। समझौते के बाद संगठन के प्रमुख साद रिजवी और डेढ़ हजार से ज्यादा सदस्यों को जेल से रिहा कर दिया गया, जो आतंकवाद के आरोपों में बंद थे। श्रीलंकाई नागरिक की हत्या के बाद प्रधानमंत्री इमरान खान ने ट्वीट कर पंजाब के सियालकोट की घटना पर घड़ियाली आंसू बहाए हैं।

उन्होंने कहा कि घटना में संलिप्त सभी जिम्मेदार नागरिकों को कानून के तहत सख्त सजा दी जाएगी। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने भी ट्वीट कर घटना पर दुख प्रकट किया है। भले ही कोई कुछ कहे, मगर पाकिस्तान में हालात सुधरने वाले नहीं हैं। बांग्लादेश की तर्ज पर पाकिस्तान में कट्टरपंथियों से निपटने के लिए प्रयास देखने को नहीं मिलते हैं। पाकिस्तान में ईशनिंदा के आरोप में किसी की जान लेने अथवा प्रताड़ित करने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इसके पहले भी कई मामले सामने आ चुके हैं। कुछ मामलों ने दुनियाभर में इस्लामाबाद को शर्मसार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।

पाकिस्तान में ईशनिंदा का कानून बेहद सख्त है। यह दुनिया का सबसे सख्त कानून भी माना जाता है। इस कानून में फांसी की सजा तक का प्रावधान है, मगर अक्सर देखा जाता है कि पाकिस्तान में ईशनिंदा का मामला कोर्ट में पहुंचे इससे पहले ही वहां कट्टरपंथियों की भीड़ आरोपी को पीट-पीट कर मौत के घाट उतार देती है। पाकिस्तान की स्थापना के बाद से वहां पर कट्टरपंथियों की मनमानी देखने को मिल रही है। अमेरिकी सरकार के सलाहकार पैनल की रिपोर्ट कहती है कि दुनिया के किसी भी देश की तुलना में पाकिस्तान में सर्वाधिक ईशनिंदा कानून का दुरुपयोग होता है। अंग्रेजों ने 1860 में ईशनिंदा कानून बनाया था। इसका मकसद धार्मिक विवादों को रोकना था।

दूसरे धर्म के धार्मिक स्थल को नुकसान पहुंचाने या मान्यताओं या धार्मिक आयोजनों का अपमान करने पर इस कानून के तहत अर्थदंड या एक से दस साल की सजा होती थी। नेशनल कमीशन फॉर जस्टिस एंड पीस की रिपोर्ट कहती है कि ईशनिंदा के अधिकतर मामले फर्जी होते हैं, जिन्हें कोर्ट खारिज कर देता है, मगर कट्टरपंथी इन्हें कभी माफ नहीं करते। पाकिस्तान में आसिया बीबी का मामला आज भी जब-तब चर्चाओं में आ जाता है। आसिया बीबी पर कुएं से पानी पीकर उसे अपवित्र करने का आरोप लगाया गया था। कोर्ट ने 2010 में उन्हें मौत की सजा सुनाई थी। आसिया ने ईशनिंदा फैसले को चुनौती दी। हाईकोर्ट में अपील की।

लाहौर हाईकोर्ट ने भी अपील खारिज कर दी थी। इसके बाद वह सुप्रीम कोर्ट पहुंची। 3-4 साल पहले पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने आसिया के हक में फैसला सुनाया था। शीर्ष अदालत ने उनकी सजा रद्द कर दी थी। ईशनिंदा के आरोप में जिंदगी के आठ साल जेल में गुजारने के बाद अब आसिया बीबी के लिए जिंदगी गुजारना आसान नहीं था। बाद में वह कनाडा चली गर्इं। पाकिस्तान दुनिया का ऐसा इकलौता राष्ट्र नहीं है, जहां ईशनिंदा को लेकर कानून हैं। शोध संस्थान प्यू रिसर्च द्वारा 2015 में जारी रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के छब्बीस फीसदी देशों में धर्म के अपमान से जुड़े कानून हैं, जिनके तहत सजा का प्रावधान है।

इनमें से सत्तर फीसदी देश मुस्लिम बहुल हैं। इन देशों में ईशनिंदा के आरोप के तहत जुर्माना और कैद की सजा का प्रावधान हैं, मगर सऊदी अरब, ईरान और पाकिस्तान में इस अपराध में मौत तक की सजा का प्रावधान है। पाकिस्तान में ईशनिंदा कानून को खारिज करने की बात कई बार की गई है, मगर हर बार सरकार को धार्मिक रूढ़िवादियों की आलोचना का सामना करना पड़ा है। वर्तमान सरकार इस मुद्दे पर बहस करने से भी इनकार कर रही है। सरकार का कहना है कि इस कानून को खारिज करने से उग्रपंथियों को आतंकवाद फैलाने का एक और बहाना मिल जाएगा। इस्लामी पार्टियों ने भी कानून को बदलने से मना किया है। इन पार्टियों का कहना है कि इससे देश के इस्लामी ढांचे को नुकसान पहुंचेगा।