लेखक : तरुण मिश्र
(समाजसेवी एवं राजनीतिक चिंतक हैं। राजनीतिक और सामाजिक विषयों पर लिखते हैं। देश-विदेश में आयोजित होने वाले व्याख्यानों में एक प्रखर वक्ता के रूप में जाने जाते हैं। वर्तमान में अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री हैं। ब्राह्मण कल्याण बोर्ड के गठन एवं ब्राह्मणों के हक के लिए अभियान चला रहे हैं। )
भाजपा के कद्दावर नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को देश की राजनीति में हमेशा याद रखा जाएगा। त्याग और समर्पण की भावना के कारण वह आजीवन लोकप्रिय रहे। सही मायने में राम मंदिर के निर्माण का सबसे ज्यादा श्रेय उन्हीं को दिया जाना चाहिए। उनके मुख्यमंत्री रहते समय अयोध्या में कार सेवकों ने विवादित ढांचे को विध्वंस किया था। यदि वह ऐसा नहीं होने देते तो आज भव्य राम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ नहीं हो पाता। भव्य राम मंदिर के नव-निर्माण में वह सबसे प्रभावी कार सेवक की भूमिका में थे। देश-विदेश में असंख्य राम भक्त हैं।
अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण होने से सभी राम भक्त बेहद खुश हैं। इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का हमेशा-हमेशा के लिए चला जाना इन राम भक्तों को भी अखरा है। भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में कल्याण सिंह शामिल रहे हैं। भाजपा के साथ देश की राजनीति में उकना कद काफी बड़ा था। अयोध्या में विवादित ढांचा के विध्वंस के समय उत्तर प्रदेश की कमान कल्याण के हाथों में थी। राम मंदिर आंदोलन के नायकों में भी उनकी गिनती होती है। 6 जनवरी 1932 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में कल्याण सिंह ने जन्म लिया था। उनके पिता का नाम तेजपाल लोधी और माता का नाम सीता देवी था। वह 2 बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रहे। अतरौली विधान सभा क्षेत्र से विजयी होने के साथ वह बुलंदशहर तथा एटा से सांसद भी रहे। उन्होंने राजस्थान तथा हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल की भूमिका भी निभाई थी। 
राज्यपाल के तौर पर कार्यकाल पूर्ण करने के बाद उन्होंने लखनऊ में आकर पुन: भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी। 1991 और 1997 में वह उप्र के मुख्यमंत्री रहे थे। उनके पहले मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान अयोध्या में विवादित ढांचा ध्वंस की घटना हुई थी। इस घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेने के बाद उन्होंने 6 दिसंबर 1992 को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। कल्याण सिंह के निधन से देश की राजनीति में एक शून्य उत्पन्न हो गया है। जिसे कभी भरा नहीं जा सकता। राजनीति में एंट्री के बाद उन्होंने अपने नाम के अनुरूप काम किया। वह सदा कल्याणकारी कार्यों को आगे बढ़ाने में मशगूल रहे। राम मंदिर निर्माण में उनके सहयोग को कभी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। राम मंदिर के लिए संघर्ष का जिक्र जब भी चलेगा, उसमें कल्याण सिंह के योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।
अपने मुख्यमंत्रित्व काल में भी उन्होंने कई ऐसे कार्य किए थे, जिन्हें भुलना संभव नहीं है। वह हमेशा जमीन से जुड़ी शख्सित रहे। राजनीति में जो मुकाम उन्होंने हासिल किया, वह आसानी से मिलना संभव नहीं है। भाजपा के आम कार्यकर्ता को भी वह स्रेह और आदर देते रहे। भव्य राम मंदिर को धरातल पर देखने की उनकी इच्छा पूरी नहीं हो सकी। राजनीति और राम मंदिर के निर्माण में अपने सहयोग के लिए वह हमेशा यादों में रहेंगे। राजनीतिक जीवन में कल्याण सिंह ने कुछ समय के लिए भाजपा का दामन भले ही छोड़ दिया था, मगर वह ज्यादा समय तक पार्टी से दूर नहीं रह पाए थे।
















