BJP महासंग्राम – ठेंगे पर पार्टी, संगठन में बढ़ी अनुशासनहीनता

गाजियाबाद। मिशन-2022 की तैयारियों में जुटी भाजपा में अनुशासन पर एकाएक सवाल खड़े हो गए हैं। जिला एवं महानगर कार्यालय के बाहर शुक्रवार को महासंग्राम के बाद सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गरम है। अनुशासनहीनता की हदें पार होने से संगठन की कार्यशैली सवालों के दायरे में आ गई है। वरिष्ठ नेता की खुलेआम पिटाई ने पार्टी को शर्मसार कर दिया है। सुरक्षा व्यवस्था पर हमेशा जोर देने वाली पार्टी के कार्यालय के भीतर और बाहर सुरक्षा का क्या आलम है, यह अब किसी से छुपा नहीं है। संगठन की खूब छिछालेदर हो रही है।

नेहरू नगर में भाजपा के जिला एवं महानगर कार्यालय के बाहर शुक्रवार को पूर्व एमएलसी प्रशांत चौधरी और वरिष्ठ नेता पवन गोयल में भिड़ंत हो गई थी। इसके पहले यह दोनों नेता कार्यालय के भीतर बैठक के दरम्यान आमने-सामने आ गए थे। भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की ऑनलाइन बैठक के दौरान पदाधिकारियों को अनुशासन का पाठ भी पढ़ाया जा रहा था, मगर इसका कोई असर देखने को नहीं मिला।

भाजपा कार्यालय के बाहर जिस तरीके से पूर्व एमएलसी प्रशांत चौधरी ने वरिष्ठ नेता पवन गोयल के साथ गाली-गलौच एवं मारपीट की, उससे संगठन की कार्यशैली पर भी सवाल उठना लाजमी बात है। भाजपा को अनुशासित पार्टी माना जाता है। नेताओं और कार्यकर्ताओं से अनुशासन में रहने की अपेक्षा की जाती है। स्थानीय संगठन भी इस बात से पूरी तरह अवगत है। इसके बावजूद शुक्रवार को जो कुछ हुआ, उससे संगठन के लापरवाह रूख की कलई खुल गई। भाजपा के नेहरू नगर कार्यालय पर अक्सर महत्वपूर्ण मीटिंग होती हैं। वहां समय-समय पर जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों का आना-जाना लगा रहता है।

भाजपा कार्यालय की सुरक्षा में लापरवाही भी सामने आई है। वहां सुरक्षा के नाम पर सीसीटीवी कैमरे तो लगाए गए हैं, मगर वह काम नहीं करते। यह सुरक्षा में बड़ी चूक व लापरवाही से कम नहीं है। सीसीटीवी कैमरे कब से और किन कारणों से बंद पड़े हैं, इसका जबाव स्थानीय संगठन के पास नहीं है। पूर्व एमएलसी प्रशांत चौधरी और वरिष्ठ नेता पवन गोयल में मारपीट का मामला अब सियासी गलियारों में चर्चाओं के केंद्र में है। विपक्षी दलों ने भाजपा के अनुशासन के दावे की खिल्ली उड़ानी शुरू कर दी है। मिशन-2022 की तैयारियों के बीच भाजपा में इस प्रकार का घटनाक्रम कतई अच्छे संकेत नहीं कहा जा सकता है।