सुंदर भाटी गैंग के नाम पर 10 करोड़ की रंगदारी मांगने वाला गिरोह बेनकाब, महिला समेत तीन गिरफ्तार

-पूर्व निजी सहायिका ने रचा करोड़ों की वसूली का षड्यंत्र, पुलिस की सटीक कार्रवाई से खुली साजिश
-बिल्डर को गैंगस्टर का नाम लेकर दी गई परिवार सहित हत्या की धमकी
-स्वाट टीम और इंदिरापुरम पुलिस की संयुक्त कार्रवाई, तकनीकी जांच से आरोपियों तक पहुंची पुलिस
-नौकरी से निकाले जाने की रंजिश बनी रंगदारी की वजह, बिल्डर की निजी जानकारी का उठाया फायदा

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। कुख्यात अपराधी सुंदर भाटी के नाम का भय दिखाकर नोएडा के बिल्डर से 10 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने वाले गिरोह का गाजियाबाद पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है। क्राइम ब्रांच स्वाट टीम और इंदिरापुरम थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एक महिला समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर पूरे षड्यंत्र का पर्दाफाश कर दिया गया। मामले की जानकारी देते हुए डीसीपी सिटी धवल जायसवाल ने प्रेस वार्ता में बताया कि आरोपियों का सुंदर भाटी गैंग से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने केवल गैंग का नाम लेकर बिल्डर को भयभीत करने और करोड़ों रुपये हड़पने की साजिश रची थी। पुलिस टीम की तत्परता और तकनीकी जांच के आधार पर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। घटना की शुरुआत 11 अप्रैल को हुई, जब सेक्टर-73 नोएडा निवासी अर्पित एसोसिएट कंपनी के मालिक अर्पित गुप्ता को एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को सुंदर भाटी गिरोह का सदस्य बताते हुए 10 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी और रकम न देने पर परिवार सहित हत्या की धमकी दी।

लगातार आ रही धमकी भरी कॉल से घबराकर बिल्डर ने पहले पुलिस आयुक्त से शिकायत की और बाद में इंदिरापुरम थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया। डीसीपी सिटी ने बताया कि मोबाइल नंबर की तकनीकी निगरानी और सर्विलांस के आधार पर पुलिस आरोपी रविंद्र उर्फ रोबिन गुर्जर निवासी वेव सिटी, उसके मौसेरे भाई तुषार गुर्जर और सविता उर्फ सवी चौधरी को गिरफ्तार करने में सफल रही। पूछताछ में सामने आया कि सविता पहले बिल्डर अर्पित गुप्ता के कार्यालय में निजी सहायिका के रूप में कार्यरत थी और कंपनी से जुड़ी महत्वपूर्ण वित्तीय तथा पारिवारिक जानकारी रखती थी। कुछ दिन पूर्व कमीशन विवाद के चलते नौकरी से निकाले जाने के बाद सविता ने बदला लेने की नीयत से अपने परिचित रविंद्र गुर्जर को रंगदारी की योजना में शामिल किया।

आरोपियों ने सोचा कि गैंगस्टर का नाम इस्तेमाल करने से बिल्डर डर जाएगा और रकम आसानी से मिल जाएगी। पहचान छिपाने के लिए तुषार गुर्जर से कॉल कराए गए ताकि आवाज पहचानी न जा सके। जांच में यह भी सामने आया कि रंगदारी मांगने के लिए फर्जी पहचान पर सिम कार्ड और पुराना मोबाइल फोन इस्तेमाल किया गया। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने नोएडा और गाजियाबाद की अलग-अलग लोकेशन से कई बार कॉल कर डर का माहौल बनाने की कोशिश की। इस दौरान बिल्डर की निजी जानकारी का उपयोग कर धमकियों को और गंभीर बनाने का प्रयास किया गया।

डीसीपी सिटी धवल जायसवाल ने कहा कि अपराधियों ने संगठित गैंग का नाम लेकर अपराध को अंजाम देने की कोशिश की, लेकिन पुलिस की सतर्कता से साजिश समय रहते विफल कर दी गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यापारी या नागरिक को ऐसी धमकी मिलने पर तुरंत पुलिस से संपर्क करना चाहिए। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से वारदात में प्रयुक्त रेडमी कंपनी का मोबाइल फोन सहित चार मोबाइल बरामद किए हैं। मामले का सफल खुलासा करने वाली स्वाट टीम और थाना इंदिरापुरम पुलिस की सराहना करते हुए एडिशनल पुलिस कमिश्नर मुख्यालय एवं अपराध केशव कुमार चौधरी ने टीम को 50 हजार रुपये के पुरस्कार देने की घोषणा की है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई न केवल संगठित अपराध के खिलाफ सख्त संदेश है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाले किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस अब मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।