Rajya Sabha – बेलगाम विपक्ष का अमर्यादित आचरण

नए कृषि कानून और पेगासस जासूसी प्रकरण पर सियासी घमासान खत्म नहीं हो पाया है। नाराज विपक्ष ने आसमान सिर पर उठा रहा है। वह किसी की सुनने को कतई राजी नहीं है। बार-बार बखेड़ा खड़ा कर वह अनावश्यक दबाव बनाने की रणनीति पर उतारू है। विपक्ष ने संसद में एक बार फिर मर्यादा की लक्ष्मण रेखा को लांघ डाला है। Rajya Sabha में कुछ सदस्यों का अमर्यादित आचरण सामने आया है, जिसकी जमकर भर्त्सना हो रही है। इन सदस्यों ने टेबल पर चढ़कर हंगामा किया। सभापति के आसन की तरफ रूल बुक तक फेंकी गई।

राज्य सभा अध्यक्ष Venkaiah Naidu की अपील के बावजूद यह सदस्य बाज नहीं आए। बाद में मार्शल को बुलवा कर इन सदस्यों को सदन से बाहर भिजवाना पड़ा। लोकतंत्र के पवित्र मंदिर में विपक्ष की यह हरकत बरदाश्त करने लायक नहीं है। सदन की पवित्रता के साथ खिलवाड़ करने का अधिकार किसी को नहीं है। देश में मजबूत विपक्ष का होना अच्छी बात है। इससे सरकार कभी मनमानी नहीं कर सकती है, मगर विपक्ष को अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इससे जनता में गलत संदेश जाता है।

किसी मुद्दे पर यदि आप सहमत नहीं हैं तो इसका मतलब यह नहीं कि हुड़दंग मचाने लगें। सरकार के साथ सौहार्द पूर्ण माहौल में चर्चा की जानी चाहिए। संसद के दोनों सदनों में अक्सर विपक्ष का निंदनीय व्यवहार देखने को मिलता है। इस परिपाटी पर रोक लगाने की जरूरत है। अपनी बात को मनवाने के लिए सदन में अमर्यादित आचरण को कभी सही नहीं ठहराया जा सकता है। कुछ सदस्यों के अमर्यादित व्यवहार से राज्य सभा अध्यक्ष Venkaiah Naidu काफी आहत हैं। Venkaiah Naidu ने विपक्ष के खराब आचरण पर गहरी नाराजगी जाहिर की है। सदन में इस मुद्दे पर अध्यक्ष का भावुक हो जाना यह दर्शाता है कि उन्हें हुड़दंगी सदस्यों की वजह से कितना दुख पहुंचा है।

लोक सभा एवं Rajya Sabha में विपक्ष द्वारा हंगामा करना कोई नई बात नहीं है, मगर विरोध दर्ज कराने का तरीका भी मर्यादित होना चाहिए। सदन में मेज पर चढ़कर बवंडर मचाने और रूल बुक को आसन की ओर फेंकने की वीडियो फुटेज सोशल मीडिया पर खूब देखी जा रही हैं। सदस्यों के इस व्यवहार को देखकर जनता भी यह सोचने को मजबूर है कि आखिर विपक्ष को हो क्या गया है? मोदी सरकार ने देश में कृषकों की आमदनी बढ़ाने और बिचौलियों की दखलंदाजी पर अंकुश लगाने के मकसद से तीन नए कृषि कानूनों को मंजूरी दी थी। सरकार की तरफ से किसान हित में समय-समय पर महत्वपूर्ण फैसले लिए जा रहे हैं।

कृषि कानूनों पर विपक्ष ने हाय-तौव्वा मचा रखी है। इसके अलावा विभिन्न किसान संगठन पिछले करीब 9 माह से आंदोलनरत हैं। दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में किसानों का धरना-प्रदर्शन चल रहा है। विपक्ष और किसान संगठन निरंतर इन कानूनों को वापस लेने की पुरजोर मांग कर रहे हैं। जबकि सरकार ने अपना रूख साफ कर रखा है। सरकार का कहना है कि तीनों कानून कृषकों के हितकारी हैं। इनमें संशोधन संभव है, मगर इन्हें वापस नहीं लिया जाएगा। कृषि कानूनों में किए गए प्राविधानों पर गंभीरता से चर्चा करने को न विपक्ष और ना किसान नेता तैयार हैं। पहले भी जब कभी सरकार ने किसान प्रतिनिधियों को वार्ता के लिए आमंत्रित किया था, तब भी इन प्रतिनिधियों ने अपनी जिद को नहीं छोड़ा था। वह नए कृषि कानूनों को स्वीकार नहीं कर रहे।

इसी प्रकार पेगासस जासूसी प्रकरण में विपक्ष ने बखेड़ा मचा रखा है। संसद में सरकार ने बयान दे दिया है कि इजराइल की जिस कंपनी पर जासूसी करने के आरोप लग रहे हैं, उससे सरकार ने कभी कोई डील नहीं की है। कृषि कानूनों और पेगासस जासूसी मामला देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कुछ माह पहले नए कृषि कानूनों पर रोक लगाने का आदेश दे दिया था, मगर विपक्ष और किसान संगठनों पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। उनका कहना है कि जब तक तीनों कानून वापस नहीं लिए जाते वह आंदोलन करते रहेंगे। विपक्ष को मनमानी करने की छूट नहीं होनी चाहिए। सड़क से संसद तक विपक्ष को सरकार का विरोध करने का अधिकार है। इस अधिकार का दुरूपयोग करना घोर निंदनीय है।

Rajya Sabha में विपक्ष के कृत्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। सदन में बेवजह का तमाशा कर विपक्ष कभी भी जनता की नजरों में हीरो नहीं बन पाएगा। उलटा उसे इसका नुकसान उठाना पड़ेगा। पूर्ण बहुमत की सरकार के फैसले को इस तरह चुनौती देना सही नहीं है। देश में कुछ सांसद ऐसे हैं, जो न तो सरकार और ना सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करते हैं। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भी कुछ सांसदों ने सवाल उठाए थे। जबकि इन सांसदों को ऐसा नहीं करना चाहिए था। संसद में विपक्ष के अनैतिक आचरण से न सिर्फ देश की छवि पर प्रतिकूल असर पड़ता है बल्कि दुनिया-जहान में भी गलत मैसेज जाता है।

भारत आज तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सरकार द्वारा सकारात्मक प्रयास किए जा रहे हैं। दुनियाभर में भारत का रूतबा बढ़ा है। संयुक्त रक्षा सुरक्षा परिषद की कमान इस समय भारत के हाथों में है। कोरोना काल में संकट में घिरी अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए कोशिश तेजी से चल रही हैं। विपक्ष को ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहिए, जिससे विदेशी मुल्कों को भारत पर अंगुली उठाने का मौका मिले। विपक्ष को सरकार के साथ बैठकर सभी मुद्दों पर शांतिप्रिय तरीके से बातचीत करनी चाहिए। सरकार पर दबाव बनाकर फैसलों को बदलवाने की नीति में विपक्ष कभी कामयाब नहीं हो पाएगा।