गाजियाबाद। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निजी सचिव रहे सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शक्ति सिन्हा का सोमवार को निधन हो गया। वह 64 वर्ष के थे। लोधी रोड स्थित शवदाह गृह में उनका अंतिम संस्कार किया गया। आइपी एक्सटेंशन के आदिति अपार्टमेंट निवासी शक्ति सिन्हा रविवार रात तक ठीकठाक थे। सोमवार को डाक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। हालांकि, उनकी मृत्यु की वजह का तत्काल पता नहीं चल पाया है। कई नेताओं और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने सिन्हा के आकस्मिक निधन पर शोक व्यक्त किया।
वरिष्ठ समाजसेवी एवं यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल्स कौशांबी गाजियाबाद के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ पीएन अरोड़ा ने शक्ति सिन्हा के निधन को देश के लिए एक अपूरणीय क्षति बताते हुए भारी मन से बताया कि 3 अक्टूबर रविवार की रात्रि उन्होंने श्री सिन्हा के साथ रात्रि भोज किया था और बहुत ही सहजता से उनसे बात हो रही थी। डॉ अरोड़ा ने भाव विह्वल होकर करके जीवन की क्षणभंगुरता को स्मरण करते हुए कहा कि इस नश्वर जीवन के अंत समय का किसी को पता नहीं और श्री सिन्हा का इस तरह अकस्मात हृदय गति रुक जाने से हमें छोड़ कर चले जाना मेरे लिए एक बहुत ही बड़ी निजी हानि है, मैंने अपना एक भाई और मित्र खो दिया है। उन्होंने श्री सिन्हा की दिवंगत आत्मा को प्रभु से अपने चरणों में स्थान देने की प्रार्थना की एवं परिवार को इस हृदय विदारक घड़ी में शक्ति प्रदान करने की भी प्रार्थना की।
स्व: पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी करीबी थे सिन्हा
शक्ति सिन्हा का जन्म 11 मई 1957 को बिहार की राजधानी पटना में हुआ था। वह 1979 बैच के आइएएस अधिकारी थे। स्व पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के वह काफी करीब थे। वर्ष 1998 से 2000 के बीच वह उनके निजी सचिव रहे थे। सिन्हा ने 2013 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का विकल्प चुना, जब वह शीला दीक्षित के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार में वित्त सचिव के रूप में कार्यरत थे। उन्होंने पहले 1996 और 1999 के बीच अटल बिहारी वाजपेयी के निजी सचिव के रूप में कार्य किया और बाद में वाजपेयी के प्रधान मंत्री बनने पर उनके ओएसडी बन गए। उन्होंने हाल ही में पूर्व पीएम वाजपेयी द इयर्स दैट चेंज्ड इंडिया पर एक किताब लिखी है। वडोदरा के एमएस विश्वविद्यालय में अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिसी रिसर्च एंड इंटरनेशनल स्टडीज में मानद निदेशक थे। दिल्ली विश्वविद्यालय में दिल्ली स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी एंड गवर्नेंस की स्थापना में भी शामिल थे। उन्होंने पहले तीन साल तक नेहरू मेमोरियल संग्रहालय और पुस्तकालय के निदेशक के रूप में कार्य किया।
















