सिद्धार्थ कौशिक बने मेरठ मंडल के प्रांतीय सह-सचिव

गाजियाबाद। लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष सिद्धार्थ कौशिक को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें मेरठ मंडल खण्ड मंत्री/प्रांतीय सह-सचिव नियुक्त किया गया है। उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के महामंत्री बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने उन्हें यह दायित्व सौंपा है। प्रातीय सह-सचिव पद पर अस्थाई तौर पर उन्हें नियुक्ति दी गई है। कौशिक ने नई जिम्मेदारी का बखूवी निर्वहन करने की बात कही है। सिद्धार्थ कौशिक लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी तीन बार निभा चुके है। इससे पहले वह साल 2016, 2018 और 2020 में इस पद पर जीतकर आए थे। लेखपालों से संबंधित समस्याओं के निदान में निरंतर प्रयासरत रहने के कारण वह काफी लोकप्रिय हैं। इसके चलते लेखपाल संवर्ग में उन्हें सर्वाधित सम्मान और सहयोग मिलता है।

लेखपाल संघ के संवर्ग के हितों के लिए वह हमेशा प्रयासरत दिखाई देते हैं। सिद्धार्थ कौशिक ने अपने पिछले कार्यकाल में सदर तहसील में लेखपाल भवन का निर्माण कराया था। यह उनकी एक बड़ी उपलब्धि रही है। कोरोना वायरस महामारी से बचाव के लिए प्रशासनिक व्यवस्था संग उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ ने जान की परवाह किए बगैर लोगों को संकट से उबारने में जुटी रही थी। क्वारंटाइन सेंटर में रहने वाले लोगों को समय पर भोजन-पानी की व्यवस्था कराने में लेखपाल संघ ने भरसक प्रयास किए थे। कोरोनाकाल के दौरान संघ से जुड़े पदाधिकारियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना जनहित में कार्य किए थे। मजदूरों को भोजन उपलब्ध कराने से लेकर गरीब, बेसहारा और जरूरतमंदों तक राहत सामाग्री भिजवाने में भी अहम भूमिका निभाई थी। कोरोना की दुसरी लहर के दौरान जिला प्रशासन ने ऑक्सीजन मैनेजमेंट के तहत जो काम किया, उसमें भी लेखपाल संघ ने पदाधिकारियों ने पूरे मनोयोग से कार्य किया।

सिद्धार्थ कौशिक ने बताया कि संगठन ने उन पर जो विश्वास प्रकट किया है, उस पर वह खरा उतरने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि लेखपालों की समस्याओं का यथा संभव निराकरण कराने के साथ संगठन को और अधिक मजबूत बनाने का हर संभव प्रयास किया जाएगा। वर्ष 2019 में लेखपाल संघ की संबधित मांगों को लेकर हुए आंदोलन में वह करीब 3 माह नौकरी से बर्खास्त भी रहें थे। मगर उनकी लड़ाई के आगे शासन को भी झुकना पड़ गया था और तीन माह बाद वापस उन्होंने लेखपाल का कार्यभार संभाला। बता दें कि लेखपाल संघ जिलाध्यक्ष पद पर रहते हुए सिद्धार्थ कौशिक ने बेहतर कार्य किया और संगठन को मजबूत बनाने पर हमेशा जोर दिया। शासकीय कार्य के साथ-साथ उन्होंने सामाजिक कार्यो में भी अपना योगदान दिया है। वह चाहें फिर धार्मिक कार्य हो या फिर सामाजिक कार्य। सभी कार्य को पूरी निष्ठा एवं ईमानदारी के साथ निर्वहन करते हुए उन्होंने गाजियाबाद में एक अलग पहचान कायम की है।