गाजियाबाद। नगर निगम के मोहननगर क्षेत्र के वार्ड-28 से भाजपा पार्षद सुधीर कुमार को यादव दंपति के साथ मारपीट और खोखा तोड़ने के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने को मामला अब पूरी तरह से तूल पकड़ गया है। पुलिस द्वारा एकतरफा कार्रवाई करने और पार्षद के ऊपर गलत धारा लगाने को लेकर महापौर सुनीता दयाल ने अब पुलिस कमिश्नर और पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया हैं। महापौर सुनीता दयाल ने कहा कि पुलिस कमिश्नर का फोन पर यह कहना कि वह पार्षद गुंडा है और 7 वर्ष से पहले जेल से बाहर नहीं आ सकता है। यह न्यायोचित नहीं हैं। पुलिस कमिश्नर कोई न्यायाधीश नहीं हैं। पुलिस अधिकारी का कार्य सिर्फ विवेचना करना है। विवेचना में पीडि़त के द्वारा उपलब्ध कराए गए साक्ष्य की अनदेखी करना पूर्णत:पक्षपात हैं। उन्होंने कहा कि 1 जून को लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण में मतदान होने का इंतजार है। उसके बाद पुलिस कमिश्नर के खिलाफ ही आंदोलन शुरू किया जाएगा। दरअसल, जनपद में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने के बाद पहले पुलिस कमिश्नर के रूप में अजय कुमार मिश्र तैनात हैं। महापौर का कहना है कि पुलिस कमिश्नर आमजन की बात नहीं सुनते है।
वह आमजन की ही नहीं बल्कि जनप्रतिनिधियों और पत्रकारों तक का सम्मान नहीं करते हैं। फोन तक नहीं उठाते है। ऐसे पुलिस अधिकारी को अब जिले में पद पर नहीं टिकने दिया जाएगा। महापौर ने कहा कि पार्षद को जेल भेजने के मामले में 1 जून तक लोकसभा चुनाव खत्म होने का इंतजार हैं। उनका कहना है कि प्रदेश सरकार के वर्ष-2022 के शासनादेश के तहत नगर निगम सीमा क्षेत्र में ट्रैफिक बाधित करने वाले बस,टैंपू,टैक्सी स्टैंड व अवैध स्टैंड और स्ट्रीट वेंडर को हटाने का दायित्व नगर निगम और पुलिस प्रशासन का है। मगर शहर में कई स्थानों पर स्थानीय पुलिस ही ऐसे अवैध कार्य के प्रति उदासीन रहती है। मोहननगर क्षेत्र के वार्ड-28 के पार्षद सुधीर कुमार इंजीनियर है। वह 45 हजार की जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करते हैं। पार्षद का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। ऐसे में मोहननगर में स्थल पर अवैध रूप से खोखा लगाकर देर रात तक चलाने का अवैध कार्य हो रहा था।
ऐसे में एक चुने हुए प्रतिनिधि का अवैध एवं अनैतिक कार्य को रोकना व मना करना उसका दायित्व ही नहीं बल्कि उसका अधिकार भी है। साहिबाबाद पुलिस द्वारा एकतरफा कार्रवाई करना और पुलिस कमिश्नर का यह कहना कि पार्षद सुधीर गुंडा है,वह 7 वर्ष से पहले जेल से बाहर नहीं आ सकता। यह न्यायोचित नहीं हैं। पुलिस कमिश्नर कोई न्यायाधीश नहीं हैं। आपका कार्य सिर्फ विवेचना करना है और विवेचना में पीडि़त द्वारा उपलब्ध कराए गए साक्ष्य की अनदेखी करना पूर्णत: पक्षपात है। शहर की प्रथम नागरिक महापौर द्वारा विवेचना करने की मांग को अस्वीकार करना और प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री सुनील शर्मा के हस्तक्षेप के बाद भी कोई न्याय पूर्ण कार्रवाई न करना लोकतंत्र का अपमान है। महापौर ने कहा कि 1 जून तक लोकसभा चुनाव है। इसके खत्म होने का इंतजार है। उसके बाद खुद इस मामले को मुख्यमंत्री तक के सामने लेकर जाएंगे।
















