रविवार को मेयर के साथ मौजूदा पार्षदों की संख्या रही कम, फोन करने के बावजूद अधिकांश पार्षद नहीं पहुंचे।भाजपा पार्षदों की खेमेबाजी है। गाजियाबाद के भाजपाई सांसद से लेकर मंत्री और विधायक तक मेयर सुनीता दयाल के खिलाफ हैं। सभी जनप्रतिनिधियों का नगर निगम में पार्षदों के माध्यम से दखलंदाजी है। इन जनप्रतिनिधियों के खेमे से जुड़े पार्षद पूर्व में भी मेयर के खिलाफ बगावती रूख अपना चुके हैं। ऐसे में हालिया विवाद कहीं किसी बड़ी राजनैतिक रस्सा-कस्सी की तरफ ना मुड़ जाये।
विजय मिश्रा (उदय भूमि)
गाजियाबाद। क्या मेयर सुनीता दयाल को अपनों से अधिक खतरा है? क्या पार्षद मेयर के खिलाफ बगावत करेंगे? क्या भाजपा के दिग्गज नेता मेयर की घेराबंदी में लग गये हैं? रविवार को मेयर की प्रेस वार्ता के बाद भाजपाइयों के बीच इस तरह की चर्चाओं ने पार्टी की गुटबाजी को एक बार फिर सतह पर ला दिया है। चर्चाएं तो यहां तक होने लगी कि मेयर को घेरने के लिए अपने ही लोग लामबंद हो रहे हैं। यानी मेयर सुनीता दयाल को अभी कई और मोर्चे पर जूझना होगा और अपनों के हमलों का वार झेलना पड़ेगा।
गाजियाबाद। क्या मेयर सुनीता दयाल को अपनों से अधिक खतरा है? क्या पार्षद मेयर के खिलाफ बगावत करेंगे? क्या भाजपा के दिग्गज नेता मेयर की घेराबंदी में लग गये हैं? रविवार को मेयर की प्रेस वार्ता के बाद भाजपाइयों के बीच इस तरह की चर्चाओं ने पार्टी की गुटबाजी को एक बार फिर सतह पर ला दिया है। चर्चाएं तो यहां तक होने लगी कि मेयर को घेरने के लिए अपने ही लोग लामबंद हो रहे हैं। यानी मेयर सुनीता दयाल को अभी कई और मोर्चे पर जूझना होगा और अपनों के हमलों का वार झेलना पड़ेगा।
मेयर सुनीता दयाल और निगम अधिकारियों के बीच जबरदस्त ठनी हुई है। मेयर ने नगर स्वास्थ्य अधिकारी, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी और नगर आयुक्त के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। रविवार को मेयर ने प्रेसवार्ता के लिए पत्रकारों को आमंत्रित किया। पिछले कुछ दिनों से चल रही तनातनी के बीच मेयर ने अधिकारियों पर कई गंभीर आरोप लगाये। प्रेसवार्ता के दौरान मेयर के यहां से पार्षदों को फोन करके बुलाया गया। इसके बावजूद प्रेस वार्ता में मौजूद रहे पार्षदों की संख्या बहुत कम रही।
वरिष्ठ पार्षद राजीव शर्मा, पार्षद नीरज गोयल, पार्षद पूनम सिंह, पार्षद प्रतिभा शर्मा, पार्षद संतोष राणा, पार्षद देवनारायण शर्मा, पार्षद पति मनोज गोयल, पार्षद राजीव भाटी, पार्षद हिमांशु शर्मा, कालीचरण पहलवान, पार्षद कविता, पार्षद प्रमोद राघव, पार्षद राज कुमार सिंह, पार्षद शिवम शर्मा, पार्षद प्रीति जैन, पार्षद रेखा गोस्वामी, रजनी, ओम प्रकाश ओड, नीलम, कन्हैया लाल, उदित मोहन गर्ग, पार्षद अमित त्यागी आदि मौजूद रहे। लेकिन गाजियाबाद नगर निगम में भाजपा पार्षदों की संख्या लगभग 76 हैं। इसमें 68 पार्षद भाजपा के टिकट पर जीते थे जबकि बाद में 8 निर्दलीय पार्षद भाजपा में शामिल हो गये। यानि भाजपा की मौजूदा पार्षदों की संख्या के लिहाज से मेयर के साथ रविवार को खड़े होने वाले पार्षदों की संख्या चिंताजनक है। महत्वपूर्ण बात यह है कि भाजपा पार्षदों को नगर निगम मुख्यालय में आने के लिए मेयर के यहां से कई फोन भी किये गये थे। नाम नहीं छापने की शर्त पर भाजपा के एक पार्षद ने बताया कि उनके पास मेयर के पीए और एक रिश्तेदार का फोन आया था। लेकिन वह नगर निगम नहीं पहुंचे। उन्होंने बताया कि उनकी कई और मित्र पार्षदों से बात हुई वह भी निगम मुख्यालय नहीं जाना चाह रहे थे। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि भाजपा पार्षदों की खेमेबाजी है। गाजियाबाद के भाजपाई सांसद से लेकर मंत्री और विधायक तक मेयर सुनीता दयाल के खिलाफ हैं। सभी जनप्रतिनिधियों का नगर निगम में पार्षदों के माध्यम से दखलंदाजी है। इन जनप्रतिनिधियों के खेमे से जुड़े पार्षद पूर्व में भी मेयर के खिलाफ बगावती रूख अपना चुके हैं। ऐसे में हालिया विवाद कहीं किसी बड़ी राजनैतिक रस्सा-कस्सी की तरफ ना मुड़ जाये।
















