गौतमबुद्ध नगर में पत्रकार का चोला ओढ ब्लैकमेल करने वालों की नहीं होगी खैर, शराब विक्रेताओं ने सौंपी सूची

-विक्रेताओं की शिकायतों का आबकारी विभाग ने लिया संज्ञान, खंगाली जा रही आरोपियों की कुंडली

गौतमबुद्ध नगर। कभी पत्रकारिता एक उम्मीद एक आश हुआ करती थी उन मजबूर, बेबस और लाचार लोगों के लिए जिनका कोई सुनने वाला नहीं होता था। आज भी जब कहीं भ्रष्टाचार, रिश्वत की बात सामने आती है तो उससे पीडि़त व्यक्ति सबसे पहले पत्रकार को ही याद करता है। पत्रकारों ने अपनी लेखनी के दम पर कभी गड़े मुर्दे उखाड़े हैं, तो कभी अपनी लेखनी के दम पर मजबूर, बेबस, लाचार और पीडि़तों को न्याय दिलाने में अहम भूमिका निभाई है। लेकिन जैसे-जैसे जमाना डिजिटल की ओर बढ़ने लगा तो वैसे ही समाज में पत्रकार का चोला ओढ़ने वालों की भी तादाद बढ़ गई है। पत्रकार का चोला ओढ़कर अपनी कमाई के लिए अब दुसरे की जेब पर डाका डालने का काम कर रहे है। जिले में इन दिनों ब्लैकमेलिंग का धंधा जोरो पर है। अपने इस धंधे को जमाने के लिए कुछ लोग पत्रकारिता का चोला पहनकर लोगों को डरा-धमकाकर अपनी झूठ की दुकान चला रहे है। गली-गली में फैले इस ब्लैकमेल की दुकानों का फूल बनकर खिलना चाहते है और भीड़ में अपनी अलग पहचान बनाना चाहता है। सबसे बड़ी जरूरत तो इस बात की है कि वास्तविक पत्रकारिता की नदी को स्वच्छ रखने के लिए जबरन पैदा होने वाली जलकुंभी को हटाया जाये।

मगर इनके मकडज़ाल को खत्म करने के लिए प्रशासन को ही कोई ठोस कदम उठाने होंगे। नहीं तो इनके मकडज़ाल को खत्म करना बेहद ही मुश्किल है। हालांकि यह हाल किसी एक जनपद का नहीं, बल्कि हर जगह देखने को मिलता है। इन दिनों गौतमबुद्ध नगर क्षेत्र में भी यही हाल देखने को मिल रहा है। जहां पर दिन हो या फिर रात बस हाथों में आईडी और मोबाइल निकाल कर वीडियो बनाना शुरु कर देते है। अगर कोई विरोध करता भी तो उसकी वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल या फिर ट्विटर हैंडल पर शिकायत कर देते है। सोशल मीडिया को अपना हथियार बनाकर रोज हजारों-लाखों की कमाई कर रहे है। ऐसे कई मामले गौतमबुद्ध नगर क्षेत्र के है, जहां कोई दिन में तो कोई रात में अपना शिकार ढूंढने निकल पड़ते है। गले में आईकार्ड होने के चलते उन्हें भी कहीं न कही इसकी छूट मिल जाती है कि वह भी एक सम्मानित पत्रकार है, भले ही वह पत्रकारिता का क ख ग नहीं जानते हो। इनका शिकार करने का तरीका भी बड़ा ही अनोखा है, जिसका उदाहरण यह है कि आबकारी विभाग के ट्विटर पर इतनी रोज शिकायते आती है, जितनी अन्य किसी भी विभाग के पास नहीं आती होगी। जब शिकायतों की जांच की जाती है तो उसके तथ्य कुछ और होते है। लेकिन ऐसे ब्लैकमेलरों के खिलाफ आबकारी विभाग ने नई मुहिम की शुरुआत कर दी है। शराब विक्रेताओं को बेवजह परेशान करने वालों की अब खैर नहीं है।

ब्लैकमेल करने का तरीका
गौतमबुद्ध नगर आबकारी विभाग के ट्विटर हैंडल पर शिकायतकर्ता हर दिन कोई न कोई शिकायत पोस्ट करते है। जिसमें शराब विक्रेताओं के खिलाफ अधिक शिकायत होती है, जब मामले की जांच की जाती है तो उसमें तथ्य कुछ और सामने आते है। दरअसल ब्लैकमेलर शराब की दुकानों पर पहुंच कर पहले शराब खरीदते है और इस बीच वीडियो बनाते रहते है। भले ही विक्रेता शराब पर अंकित मूल्यों से अधिक की वसूली कर रहा हो, मगर खुद ग्राहकों की भीड़ में खड़े होकर दस रुपये अतिरिक्त मांगने का आरोप लगाते है। वीडियो भी उसी दुकान की बनाई जाती है, जहां भीड़ अधिक होती है। क्योंकि इस दौरान उन्हें यह साबित करने का मौका मिल जाता है कि विक्रेता की आवाज भीड़ में दब गई है। उसके बाद शुरू होता है अवैध वसूली का खेल, पहले विक्रेताओं को डरा-धमकाकर वसूली का प्रयास किया जाता है। जब वहा पर उनकी मांग पूरी नहीं होती है तो उसी वीडियो को एडिट कर उसे डीएम से लेकर एक्साइज के सभी अधिकारियों को ट्वीट कर दिया जाता है।

इस बीच अगर कोई विक्रेता शिकायत वापस लेने के लिए गुहार लगाता है तो फिर उससे महीने का हिसाब-किताब शुरू करने की डील करते है। बिना नाम छपे एक विक्रेता का कहना है कि कुछ दिन पूर्व उसकी दुकान पर एक व्यक्ति बीयर लेने आया और उसने बीयर पर अंकित मूल्यों से 10 रुपये अतिरिक्त ऑनलाइन पेमेंट कर दी, जब उससे पेमेंट के बारे में जानकारी ली तो उसने खुद का पत्रकार बताकर अवैध वसूली का आरोप लगा दिया। जिसकी एवज में वह 10 हजार रुपये की मांग करने लगा। नहीं देने पर जेल भेजने की धमकी देकर वहां से चला गया। अगले दिन ही उसका स्क्रीन शॉट लेकर टिवीट्र पर पोस्ट कर दिया। विक्रेताओं के सबसे बड़ी समस्या ब्लैकमेलरों को लेकर है। पहले आरोप नगद देने पर लगते थे और अब ऑनलाइन पेमेंट पर भी लगने लगे है।

शराब विक्रेताओं ने सौंपी ब्लैकमेलरों की सूची
ब्लैकमेलरों से परेशान शराब विक्रेताओं ने आबकारी विभाग को एक सूची भेजी है। जिसमें कई लोगों के नाम है। यह नाम उन तथाकथित पत्रकारों के है, जो शराब की दुकान पर जाकर वीडियो के नाम पर अवैध वसूली करते है या फिर रात में घूमकर अपने निजी हित के लिए शिकायत करते है। जिला आबकारी अधिकारी सुबोध कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि शराब पर होने वाली ओवर रेटिंग को रोकने के लिए ऑनलाइन पेमेंट को बढ़ावा दिया जा रहा है, मगर शराब पर अंकित मूल्यों से अधिक लेने वाले विक्रेताओं पर कार्रवाई की ही जा रही है। मगर अगर कोई ऑनलाइन पेमेंट का स्क्रीन शॉट भेज कर किसी विक्रेता की शिकायत करता है तो शिकायतकर्ताओं को और भी साक्ष्य देने होंगे, जिससे यह सिद्ध हो सकें कि विक्रेता द्वारा उससे अवैध वसूली की गई है।

पिछले कुछ दिनों से लगातार शराब विक्रेताओं की शिकायत मिल रही थी। जिसकी जांच के लिए खुद की एक टीम तैयार की गई और दुकानों पर खड़ा कर दिया गया है। शराब विक्रेताओं द्वारा भी कुछ लोगों की सूची दी गई है। जिसकी जांच की जा रही है। जांच होने के उपरांत विक्रेता हो या फिर कोई अन्य व्यक्ति संबंधित के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। इस मामले को डीएम के संज्ञान में भी ला दिया गया है। अगर कोई विक्रेता अधिक वसूली करता है तो इसकी शिकायत विभाग से करें, न की उससे पैसे की मांग की जाए। जिले में अवैध रुप से वसूली करने वालों के खिलाफ टीम लगातार दुकानों पर जाकर चेकिंग कर रही है, साथ ही ब्लैकमेलरों की पहचान भी कर रही है। जल्द ही ऐसे ब्लैकमेलरों को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा। जिला आबकारी अधिकारी ने विक्रेताओं को सख्त हिदायत दी है कि नियमानुसार शराब की बिक्री करें, अगर कोई भी बेवजह परेशान करता है तो इसकी शिकायत तत्काल विभाग से करें, जिस पर सख्त कार्रवाई होगी।