लखनऊ आबकारी अधिकारी राकेश कुमार सिंह को मिली मेरठ मंडल की कमान

• राकेश कुमार सिंह समेत तीन आबकारी अधिकारियों की उप आबकारी आयुक्त के पद पर पदोन्नति  
• जिले में कार्रवाई का शोर मचाने के बाद अब मेरठ मंडल में दिखाई देगा आबकारी अधिकारी का खौफ

उदय भूमि
लखनऊ। आबकारी विभाग की ओर से बुधवार देर शाम तीन आबकारी अधिकारियों को उप आबकारी आयुक्त के पद पर पदोन्नत किया गया। अलग-अलग जारी पदोन्नति आदेश में सभी को उच्च वेतनमान देकर तत्काल प्रभाव से अपनी वर्तमान तैनाती को छोड़कर पदोन्नति वाले स्थान पर कार्यभार करने के निर्देश दिए गए हैं। विशेष सचिव दिव्य प्रकाश गिरी की ओर से पत्र जारी किया गया है। बताया जा रहा है कि जिन आबकारी अधिकारी को उप आबकारी आयुक्त पद पर पदोन्नति दी गई है, लखनऊ जिला आबकारी अधिकारी राकेश कुमार सिंह को उप आबकारी आयुक्त मेरठ मंडल, बरेली जिला आबकारी अधिकारी विजय प्रताप सिंह को उप आबकारी आयुक्त आगरा मंडल और बिजनौर दवारिकेश आसवनी आबकारी अधिकारी देव नारायण दुबे को उप आबकारी आयुक्त (विधि) मुख्यालय की जिम्मेदारी दी गई है।

जिस तरह से लखनऊ जिला आबकारी अधिकारी की कुर्सी खाली होने के बाद वहां का चार्ज लेने के लिए विभागीय अधिकारियों ने भी अपनी सिफारिशे तेज कर दी है। वहीं मेरठ मंडल का चार्ज लेने के लिए पिछले कई माह से लगातार अपने गुणा भाग में जुटे हुए थे। मगर इस रेस में राकेश कुमार सिंह को सफलता मिली। तेजतर्रार अधिकारी राकेश कुमार सिंह का भले ही लखनऊ में सिर्फ 10 माह का कार्यकाल रहा हो, लेकिन इन 10 माह में उन्होंने अपनी कार्रवाई की अमिट छाप छोड़ी है, वह शायद किसी अधिकारी ने छोड़ी होगी। 10 माह के कार्यकाल में उन्होंने कामकाज का ढर्रा सुधारने के साथ शराब माफिया के खिलाफ कार्रवाई के लिए ठोस रणनीति और नियमों के विपरीत कार्य करने वालों पर जिस तरह से उनका हंटर चला है। वह शायद कोई भूलने वाला नही है। लखनऊ में अवैध शराब की बिक्री तो नहीं होती है, मगर लखनऊ के रास्ते से अन्य राज्यों में शराब तस्करी की आशंका ज्यादा रहती है। अपन कार्यकाल में शराब तस्करों के संगठित नेटवर्क को तोडऩे के साथ विभाग से लाइसेंस लेकर बाहरी राज्यों की शराब बेचने जैसे कई मामलों का भंडाफोड़ किया है। जिसमें करोड़ों की शराब के साथ-साथ शराब में प्रयुक्त कैमिकल से भरी गाडिय़ों को जब्त किया है। राकेश कुमार सिंह की लखनऊ में यह कोई पहली कार्रवाई नहीं है।

जिसे जिले की कमान संभाली वहां अपनी छाप जरूर छोड़ी है। पिछले 25 साल के सेवाकाल में वह उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों में अहम जिम्मेदारी निभा चुके हैं। जनपद हमीरपुर, लखीमपुर खीरी, बदायूं और प्रयागराज में वह आबकारी इंस्पेक्टर के पद पर तैनात रहे थे। प्रयागराज, गोरखपुर में उन्होंने सहायक आबकारी आयुक्त की जिम्मेदारी भी संभाली थी। प्रयागराज के बाद वह गौतमबुद्ध नगर और महाराजगंज में तैनात रहे। महाराजगंज से 2021 में तबादला होने के बाद से वह गाजियाबाद में तैनात हैं, उसके बाद फरवरी 2024 में लखनऊ जिला आबकारी अधिकारी का चार्ज संभाला। बतौर जिला आबकारी अधिकारी के तौर पर वह बेहद सफल अधिकारी साबित हुए हैं। सरकार के राजस्व को बढ़ाने के लिए उन्होंने जिस तरह से विभिन्न स्रोतों पर काम किया है, वह शायद ही अन्य अधिकारियों ने अपने कार्यकाल में किया होगा। महाराजा एक्सप्रेस में एफएल-8 लाइसेंस के लिए रेलवे विभाग के लाइसेंस जारी कराया। अनुबंध राशि 15 लाख रुपए है। इंडियन रेलवे की शान कहलाने वाली महाराजा एक्सप्रेस में एफएल-8 लाइसेंस के लिए रेलवे विभाग के लाइसेंस जारी कराने में आबकारी अधिकारी ने अपनी अहम भूमिका निभाई थी। जिसकी अनुबंध राशि 15 लाख रुपए थी। आबकारी अधिकारी की दूरगामी सोच का ही नतीजा था कि जिस जिले में शराब माफिया का राज होता था और राजस्व के मामले में गाजियाबाद, नोएडा जैसे जिले नाकाम साबित होते नजर आते थे। वहीं उन्हीं जिलों में शराब माफिया का सफाया करने के बाद राजस्व के मामले में कई रिकॉर्ड स्थापित करने का महारत हासिल किया है।

गाजियाबाद, नोएडा दिल्ली और हरियाणा की सीमा से सटा हुआ है, जो कि प्रदेश का सबसे संवेदनशील जनपद है। ज्यादातर बाहरी राज्यों की शराब तस्करी में शराब माफिया इन्हीं जिलों का प्रयोग करते नजर आते है। इन सबके अलावा जिस विदेशी शराब को अपने जिले में लाने के लिए आबकारी अधिकारी दौड़ लगा रहे थे, उन जिले में गाजियाबाद में अपने कार्यकाल के दौरान सितंबर 2023 में राकेश कुमार सिंह ने 8 हजार से लेकर 3 लाख 24 तक के 10 नए विदेशी ब्रांड गाजियाबाद में शौकीनों को लाकर दिया। उत्तर प्रदेश के कुछ ही जिलों में इतने महंगे शराब के ब्रांड थे, जिसमें गाजियाबाद का नाम भी शामिल था। जनपद का चार्ज लेने जितना आसान नहीं है, उतना हीं उसे संभाल पाना भी है। आपदा में अवसर ढूंढने की अगर बात की जाए तो यह बात राकेश कुमार सिंह जैसे अधिकारी से बेहतर कोई नहीं समझ सकता है। इसलिए आज उनकी गिनती ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के रूप में अन्य अधिकारियों से बिल्कुल अलग रखती है। नवाबो का शहर कहे जाने वाले लखनऊ जैसे जिले में शराब तस्करों पर अपना खौफ कायम रखना इतना आसान नहीं है।

जिले में शराब तस्करी की एक छोटी से घटना पूरे प्रदेश में सोर मचा देती है, मगर शराब तस्करी के शोर का गला घोंटकर अपनी कार्रवाई को शोर मचाने में आबकारी अधिकारी की रणनीति 10 माह में बेहद सफल रही। महुआ अवैध शराब के नाम से बदनाम लखनऊ आज काफी हद तक मुक्त हो चुका है। महुआ अवैध शराब के निर्माण में शामिल लोगों ने भी आबकारी अधिकारी की कार्रवाई को देखकर अवैध शराब का निर्माण छोड़कर बाहर निकल कर नया रोजगार ढूंढ लिया है। जिले की कमान संभालने के बाद अब राकेश कुमार सिंह के कंधों पर मेरठ मंडल की जिम्मेदारी है। अभी तक सिर्फ वह एक जिले की कमान संभालते नजर आ रहे थे। मगर उनके पास करीब 6 जिलों की जिम्मेदारी है। जिसमें मेरठ, बागपत, बुलंदशहर, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, हापुड़ जैसे जिलों से राजस्व बढ़ोतरी के साथ अवैध शराब के कारोबार पर रोक लगाने के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है।  गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर उनके लिए नया नहीं है। इन्हीं जिलों से उनकी कार्रवाई का सबसे अधिक शोर प्रदेश में गूंजा था। जल्द ही फिर अपनी कार्रवाई का एक बार फिर से शोर मचाने के लिए मेरठ मंडल उप आबकारी आयुक्त की कमान संभालने वाले है।

मेरठ मंडल नवनियुक्त उप आबकारी आयुक्त राकेश कुमार सिंह का कहना है कि जल्द ही मेरठ मंडल का चार्ज संभाला जाएगा। शराब तस्करों पर कार्रवाई करने से ज्यादा जरुरी है, उनके नेटवर्क को ध्वस्त करना। जब तक उनका नेटवर्क ध्वस्त नहीं होगा, तब राजस्व में बढ़ोतरी होना संभव नहीं है। इसलिए जल्द ही सभी जिलों के अधिकारियों के साथ बैठक की जाएगी। बैठक में कार्यवाही करने से लेकर राजस्व में वृद्धि बढ़ाना मुख्य विषय रहेगा। विभाग द्वारा दिए गए लक्ष्यों को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। शराब तस्करों पर कार्रवाई के लिए नए सिरे से रणनीति तैयार होगी और राजस्व वृद्धि के लिए भी अन्य प्रयास किए जाएंगे।