-तीन दिवसीय कार्यशाला में बोटॉक्स, डर्मल फिलर्स, लेज़र थैरेपी, गम्मी स्माइल और ईयर लोब सर्जरी जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने दी विस्तृत जानकारी
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। दिल्ली-मेरठ रोड स्थित आईटीएस डेंटल कॉलेज के पेरियोडोन्टोलॉजी विभाग द्वारा 8 से 10 अप्रैल तक तीसरे एडवांस फेशियल एस्थेटिक्स कोर्स के छठे मॉड्यूल का आयोजन भव्य रूप से किया गया। यह कार्यक्रम डेंटोमैक्स इंटरनेशनल एकेडमी और प्रोफी विश्वविद्यालय, उज्बेकिस्तान के सहयोग से और आईटीएस-द एजुकेशन ग्रुप के वाइस चेयरमैन श्री अर्पित चड्ढा के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। इस तीन दिवसीय कार्यशाला में 40 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें निजी प्रैक्टिस कर रहे दंत चिकित्सक, संस्थान के पूर्व छात्र, एमडीएस के विद्यार्थी और आईटीएस डेंटल कॉलेज के अध्यापक शामिल थे। कार्यक्रम का उद्देश्य फेशियल एस्थेटिक्स के क्षेत्र में उभरती तकनीकों और उपचार विधियों के बारे में विस्तृत जानकारी देना तथा रोगियों को समग्र एवं सौंदर्यपूर्ण दंत चिकित्सा समाधान उपलब्ध कराना था।
कार्यक्रम के गेस्ट स्पीकर रहे अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त विशेषज्ञ डॉ. आशीष कुमार सिंह एवं डॉ. गौरव तिवारी, जिन्होंने फेशियल एस्थेटिक्स से जुड़े अनेकों महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला। पहले दिन बोटॉक्स थैरेपी की विस्तृत जानकारी दी गई, जिसमें एटियोलॉजी, निदान, लेज़र थैरेपी, केमिकल पील्स और सर्जिकल अब्रेशन जैसे उपचारों पर चर्चा की गई। इसके अतिरिक्त, चेहरे पर उम्र के प्रभाव को कम करने में प्रयुक्त सामयिक क्रीम, सिलिकॉन जैल आदि की प्रभावशीलता पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। दूसरे दिन गम्मी स्माइल और होंठ सुधार प्रक्रियाओं पर प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें सुंदर मुस्कान के लिए मसूड़ों को कवर करने और होंठों के आकार को संतुलित करने की सर्जरी विधियाँ सिखाई गईं। तीसरे दिन प्रतिभागियों को ईयर लोब रिपेयर सर्जरी के बारे में बताया गया।
इस प्रक्रिया में फटे या फैले हुए कान के लोब को लोकल एनेस्थीसिया के अंतर्गत सिला जाता है। डॉ. आशीष कुमार सिंह ने एमडीएस विद्यार्थियों और युवा दंत चिकित्सकों को इस ज्ञानवर्धक मंच से लाभान्वित होते देखकर प्रसन्नता जाहिर की और संस्थान को इस आयोजन के लिए धन्यवाद दिया। सभी प्रतिभागियों ने कार्यक्रम की उपयोगिता की सराहना की और आईटीएस-द एजुकेशन ग्रुप के चेयरमैन डॉ. आर.पी. चड्ढा तथा वाइस चेयरमैन अर्पित चड्ढा के प्रति आभार प्रकट किया। यह कार्यक्रम न सिर्फ दंत चिकित्सकों के ज्ञान में वृद्धि का माध्यम बना, बल्कि सौंदर्य चिकित्सा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

















