-गाजियाबाद विकास प्राधिकरण में तीन दिवसीय रेरा प्रशिक्षण का समापन
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा को लेकर गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) में आयोजित तीन दिवसीय रेरा प्रशिक्षण कार्यक्रम का शनिवार को समापन हो गया। अंतिम दिन जीडीए सभागार में रेरा एक्ट 2016 के तहत महत्वपूर्ण प्रावधानों पर गहन जानकारी दी गई, जिसमें बिल्डरों को अपनी योजनाओं के विज्ञापन में रेरा पोर्टल पर पंजीकरण संख्या का स्पष्ट उल्लेख करना अनिवार्य बताया गया। यह प्रशिक्षण सेंटर फॉर एक्सीलेंस एंड ट्रेनिंग, यूपी हाउसिंग एंड डवलपमेंट बोर्ड, लखनऊ के तत्वावधान में आयोजित हुआ, जिसमें रिटायर्ड डायरेक्टर राजेश मेहतानी ने रेरा एक्ट के तहत कंप्लीशन सर्टिफिकेट (सीसी), ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट (ओसी) जैसे तकनीकी और कानूनी पहलुओं को विस्तार से समझाया।
प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि प्रत्येक योजना के लिए बिल्डर को एक अलग बैंक खाता खोलना अनिवार्य है, जिसमें उसी योजना से संबंधित आवंटियों द्वारा दी गई धनराशि जमा की जाएगी। यह धनराशि किसी अन्य योजना में स्थानांतरित नहीं की जा सकेगी। योजना से संबंधित खर्चों का भुगतान तभी किया जाएगा जब वह चार्टर्ड एडवोकेट, संबंधित अभियंत्रण खंड और वित्त विभाग प्रमुख द्वारा अनुमोदित हो। प्रशिक्षण कार्यक्रम को जीडीए की एक अहम पहल माना जा रहा है, जिससे अधिकारी रेरा अधिनियम की बारीकियों को समझ सकें और रियल एस्टेट परियोजनाओं की निगरानी को और अधिक सशक्त किया जा सके।
जीडीए का प्रशासनिक अमला हुआ प्रशिक्षित
कार्यक्रम में जीडीए की ओएसडी कनिका कौशिक, चीफ इंजीनियर मानवेंद्र कुमार सिंह, विधि अधिकारी शशि भूषण, संयुक्त सचिव सुशील चौबे सहित अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता, अवर अभियंता और लिपिकीय संवर्ग के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। सभी ने रेरा अधिनियम से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।
रेरा कानून का पालन अनिवार्य, उल्लंघन पर होगी सख्त कार्रवाई
विशेषज्ञ राजेश मेहतानी ने साफ किया कि किसी भी रियल एस्टेट परियोजना का रजिस्ट्रेशन रेरा पोर्टल पर किए बिना न तो उसका प्रचार किया जा सकता है, न ही बुकिंग। यह नियम आवंटियों के हितों की रक्षा करता है और बिल्डरों की जिम्मेदारी तय करता है।
















