GDA में लंबित 722 RTI प्रकरणों का होगा त्वरित निस्तारण

-सूचना का अधिकार नागरिकों का संवैधानिक अधिकार, पारदर्शिता ही प्राथमिकता: अतुल वत्स

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) में सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) के तहत लंबित मामलों की संख्या 722 तक पहुंच गई है। इनमें से 637 मामले वह हैं जो निर्धारित समय सीमा पार कर चुके हैं। इन प्रकरणों के शीघ्र निस्तारण को लेकर शनिवार को जीडीए सभागार में समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें उपाध्यक्ष अतुल वत्स ने स्पष्ट निर्देश दिए कि आरटीई प्रकरणों का शत-प्रतिशत और समयबद्ध निस्तारण प्राथमिकता पर किया जाए। आरटीआई केवल एक कानूनी प्रावधान नहीं, बल्कि आम नागरिक के अधिकारों का सशक्त माध्यम है। इसका त्वरित और पारदर्शी निस्तारण जीडीए की कार्यप्रणाली में विश्वास और पारदर्शिता को बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि जो अधिकारी समय पर उत्तर नहीं दे रहे हैं, उनकी जवाबदेही तय की जाएगी, और भविष्य में ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

जीडीए के अपर सचिव प्रदीप कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई इस समीक्षा बैठक में विभागीय अधिकारियों और जन सूचना अधिकारियों से लंबित मामलों की स्थिति का ब्योरा लिया गया। बैठक में बताया गया कि अब तक जीडीए को कुल 1694 आरटीआई आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 971 का निस्तारण हो चुका है, जबकि 722 अभी भी लंबित हैं। इनमें से अधिकांश मामले समय-सीमा से पार जा चुके हैं, जो कि आरटीआई अधिनियम की भावना के विपरीत है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि बिना देरी के सभी लंबित आरटीआई प्रकरणों का निस्तारण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करें। बैठक में जीडीए के सभी जन सूचना अधिकारी, सहायक जन सूचना अधिकारी, अभियंता वर्ग, अधिशासी अधिकारी एवं संबंधित विभागों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। सभी को व्यक्तिगत रूप से प्रकरणों की समीक्षा करने और एक सप्ताह के भीतर प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

आरटीआई निस्तारण से नागरिकों में विश्वास बढ़ेगा
जीडीए अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि आरटीआई से संबंधित हर आवेदन को गंभीरता से लिया जाए और अधिनियम की निर्धारित समयसीमा (30 दिन) के भीतर उत्तर दिया जाए। इससे न सिर्फ सूचना प्राप्त करने में नागरिकों को सुविधा होगी, बल्कि जीडीए के कार्यों में जनता का विश्वास भी मजबूत होगा।