रामपुर में ‘शराब माफिया’ पर आबकारी विभाग के मुखिया हिम्मत की सर्जिकल स्ट्राइक!

-एक्शन मोड में आबकारी विभाग, माफिया की कमर तोड़ने की रणनीति
-130 लीटर कच्ची शराब बरामद, 400 किलो लहन नष्ट, गांवों में लगातार दबिश                                     -‘ऑपरेशन शराबमुक्त रामपुर’ की कमान आबकारी अधिकारी ने खुद संभाली

उदय भूमि संवाददाता
रामपुर। जनपद रामपुर में आबकारी विभाग एक नई कार्यशैली के साथ मैदान में उतरा है। इस बार काम महज दस्तावेजी खानापूर्ति का नहीं, बल्कि अवैध शराब के कारोबार को जड़ से खत्म करने की लड़ाई का है। और इस पूरे अभियान की बागडोर खुद जिला आबकारी अधिकारी हिम्मत सिंह ने अपने हाथों में ले रखी है। रामपुर को बदनाम करने वाले अवैध शराब माफियाओं के खिलाफ इस बार की रणनीति न केवल ज़मीनी है, बल्कि प्रभावी, सतत और निर्णायक भी है। जैसे ही अवैध शराब के नए ठिकानों की जानकारी मिली, वैसे ही आबकारी विभाग की दो टीमों ने सोमवार को एक के बाद एक कई गांवों में दबिश दी। बिलासपुर क्षेत्र के बेरखेड़ी, बेरखेडा, मनुनगर, पसियापुरा और नवाबगंज गांवों में सुबह-सुबह छापेमारी कर न केवल 130 लीटर कच्ची शराब बरामद की गई, बल्कि 400 किलो से ज्यादा लहन (शराब बनाने का मूल कच्चा माल) को मौके पर ही नष्ट कर दिया गया। टीम की अगुवाई आबकारी निरीक्षक अरविंद कुमार मिश्रा और संजय कुमार ने की। शराब छिपाने के लिए माफिया ने झाड़ियों, झोपड़ियों, नदी किनारे की मिट्टी में गड्ढे और यहां तक कि पेड़ों की ओट तक का सहारा लिया, लेकिन प्रशासनिक चौकसी के सामने इनकी कोई चाल काम नहीं आई।

24×7 एक्शन मोड में विभाग
आबकारी अधिकारी हिम्मत सिंह ने कहा कि रामपुर में अब कोई भी शराब माफिया कानून से ऊपर नहीं है। हमारी कार्यवाही सिर्फ दिखावा नहीं, एक जन आंदोलन है। हमारा उद्देश्य है आमजन को जहरीली और अवैध शराब से बचाना और समाज को इस जहर से मुक्त कराना। सिर्फ कार्रवाई ही नहीं, बल्कि विभाग लोगों को जागरूक भी कर रहा है। टीम ने गांव में स्थानीय नागरिकों से संवाद किया और उन्हें शराब के दुष्प्रभाव, स्वास्थ्य पर पड़ने वाले गंभीर परिणाम, और कानूनन इसके खिलाफ किए जा सकने वाले कदमों की जानकारी दी। ग्रामीणों से यह अपील की गई कि वे खुद को और समाज को इस बुराई से बचाएं तथा अपने आसपास अवैध गतिविधियों की सूचना तुरंत प्रशासन को दें।

शराब माफिया की नींद हराम
रामपुर में पहले से ही ओवररेटिंग और बाहरी शराब की आपूर्ति पर रोक लगाई जा चुकी है। अब हिम्मत सिंह का पूरा फोकस कच्ची शराब के नेटवर्क को तोड़ने पर है। यह नेटवर्क न केवल स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है, बल्कि समाज को भी खोखला कर रहा है। अब तक जिन क्षेत्रों को माफिया का गढ़ माना जाता था, वहां भी आबकारी टीम का बुलडोजर चल चुका है। पुलिस-प्रशासन का पूरा सहयोग आबकारी विभाग को मिल रहा है और साझा कार्ययोजना के तहत उन व्यक्तियों की सूची तैयार की जा रही है जो इस कारोबार से किसी भी रूप में जुड़े हैं चाहे प्रत्यक्ष रूप से या पीछे से समर्थन देने वाले हों।

रामपुर बन रहा मिशन मॉडल
आबकारी विभाग की यह सख्ती अब सिर्फ एक विभागीय कार्रवाई नहीं रह गई है, बल्कि यह रामपुर की छवि सुधारने की एक मुहिम बन गई है। माफिया को अब स्पष्ट संकेत मिल चुका है रामपुर में अब अवैध कारोबार की कोई जगह नहीं। हिम्मत सिंह की इस मुहिम को जनता का भी समर्थन मिल रहा है। लोगों का कहना है कि अब उन्हें महसूस हो रहा है कि प्रशासन उनके लिए वाकई काम कर रहा है। गांवों में अवैध शराब की बिक्री पर लगाम लगने से न सिर्फ अपराध में कमी आई है, बल्कि पारिवारिक तनाव, युवाओं की बर्बादी जैसे मुद्दों पर भी असर पड़ा है।