–11 घंटे 19 मिनट तक लगातार ठंडी लहरों और खतरनाक धाराओं से लड़ा, फ्रांस की धरती पर तैरकर रखा कदम
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। गाजियाबाद के मुख्य विकास अधिकारी और 2020 बैच के आईएएस अधिकारी अभिनव गोपाल ने वो कर दिखाया है, जो देश के गिने-चुने अफसर ही कर पाते हैं। उन्होंने इंग्लैंड और फ्रांस के बीच स्थित विश्व की सबसे कठिन समुद्री बाधाओं में से एक इंग्लिश चैनल को तैरकर पार किया है। 18 जून 2025 की सुबह 3 बजे शुरू हुई यह रोमांचकारी यात्रा करीब 11 घंटे 19 मिनट तक चली, जिसके बाद उन्होंने फ्रांस की धरती पर कदम रखकर यह असाधारण कीर्तिमान स्थापित किया। इंग्लिश चैनल को पार करना केवल एक खेल नहीं बल्कि शरीर और मन की परीक्षा है। समुद्र का तापमान बेहद कम रहता है, जिसमें हाइपोथर्मिया का खतरा बना रहता है। उलझी हुई समुद्री धाराओं और खतरनाक जलीय जीवों के बीच संतुलन बनाए रखना किसी साधना से कम नहीं। यही कारण है कि यह दूरी भले ही सामान्य रूप से 33 किलोमीटर मानी जाती है, लेकिन व्यावहारिक रूप से तैराकों को करीब 55 किलोमीटर तैरना पड़ता है। इस अद्वितीय उपलब्धि से पहले भी अभिनव गोपाल कई उल्लेखनीय कीर्तिमान स्थापित कर चुके हैं।
उन्होंने अप्रैल 2023 में श्रीलंका से भारत के धनुषकोडी तक स्थित पाल्क स्ट्रेट को तैरकर पार किया था। प्रयागराज के मूल निवासी अभिनव गोपाल ने आईआईटी मद्रास से इंजीनियरिंग करने के बाद भारतीय वन सेवा और केंद्रीय सुरक्षा बल जैसी सेवाओं में चयन पाया, लेकिन उनका सपना आईएएस बनना था। 2020 में वह यह सपना पूरा करने में सफल रहे। वर्तमान में वह गाजियाबाद में मुख्य विकास अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। खुद अभिनव गोपाल का मानना है कि तैराकी केवल शारीरिक क्षमता का खेल नहीं, बल्कि मानसिक शक्ति और आत्मनियंत्रण की परीक्षा है। उन्होंने बताया कि समुद्र की गहराइयों और लहरों के बीच ‘राम नाम’ के जाप ने उन्हें संबल दिया।
उनके अनुसार समुद्र में तैरते समय सबसे बड़ी चुनौती डर होता है कभी बह जाने का, कभी थक जाने का, और कभी हार मान लेने का। लेकिन आस्था और आत्मविश्वास ने उन्हें हर बार किनारे तक पहुँचाया। देश के युवाओं के लिए अभिनव गोपाल अब एक नई प्रेरणा हैं जो यह दिखाते हैं कि एक प्रशासनिक अधिकारी भी अपनी सीमाओं को तोड़कर, अनुशासन, समर्पण और साधना से किसी भी ऊँचाई को छू सकता है। गाजियाबाद के लोगों के लिए यह गौरव का विषय है कि उनके जिले का एक अधिकारी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का परचम लहरा रहा है।
समुद्र की धाराओं से जूझे, पर थमे नहीं
इंग्लिश चैनल को पार करना केवल तैराकी नहीं, बल्कि मानसिक-शारीरिक युद्ध होता है। 33 किलोमीटर की सीधी दूरी समुद्री धाराओं के कारण बढ़कर 55 किलोमीटर तक हो जाती है। ठंडे पानी का तापमान हाइपोथर्मिया का खतरा पैदा करता है और तैराक को अनेक दिशा-भ्रमित करंटों से जूझना होता है। साथ ही शार्क और जेलीफिश जैसे जीव भी चुनौती का हिस्सा बनते हैं।
पहले भी कर चुके हैं कमाल जीत चुके है ‘आयरनमैन’ का खिताब
यह अभिनव गोपाल की पहली साहसिक उपलब्धि नहीं है। अप्रैल 2023 में उन्होंने श्रीलंका से भारत तक पाल्क जलडमरूमध्य (28 किलोमीटर) को भी तैरकर पार किया था। इतना ही नहीं, 24 अगस्त 2024 को एस्टोनिया में आयोजित ‘आयरनमैन ट्रायथलॉन’ में उन्होंने 3.8 किलोमीटर तैराकी, 180 किलोमीटर साइकिलिंग और 42.2 किलोमीटर मैराथन को 14 घंटे में पूर्ण कर आयरनमैन खिताब प्राप्त किया। यह प्रतियोगिता विश्व की सबसे कठिन खेल स्पर्धाओं में गिनी जाती है।
अभिनव गोपाल का सफर
प्रयागराज के मूल निवासी अभिनव गोपाल ने आईआईटी मद्रास से बीटेक और एमटेक किया। 2015 में सीएपीएफ परीक्षा उत्तीर्ण कर उन्होंने 2017 में वन सेवा जॉइन की, लेकिन आईएएस बनने का सपना नहीं छोड़ा। 2020 में उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास कर आईएएस अधिकारी के रूप में चयनित हुए। वर्तमान में वे गाजियाबाद में सीडीओ के पद पर कार्यरत हैं, जहां वे प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ खुद को एक प्रेरणास्तंभ के रूप में स्थापित कर चुके हैं।
समुद्र ने सिखाया डर को भी दोस्त बनाने का रास्ता
अभिनव कहते हैं, तैराकी मेरे लिए शरीर की नहीं, मन की साधना है। जितना गहरा समुद्र है, उतना ही गहरा आत्मविश्वास चाहिए होता है। और जब आप साधना में होते हैं, तो हर लहर आपके लिए रास्ता बन जाती है। आईएएस अभिनव गोपाल न केवल अफसर हैं, बल्कि एक प्रेरणास्रोत, एक योद्धा और एक आध्यात्मिक साधक भी हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया कि अगर आपमें संकल्प, अनुशासन और आत्मबल है, तो न कोई प्रशासनिक दायित्व भारी पड़ता है और न ही समुद्र की लहरें आपको रोक सकती हैं।
11 घंटे 19 मिनट की तैराकी, फ्रांस की धरती पर विजय
18 जून 2025 को सुबह 3 बजे जब दुनिया सो रही थी, तब अभिनव गोपाल ने इंग्लैंड से अपनी तैराकी शुरू की और लगातार 11 घंटे 19 मिनट की कठोर परीक्षा के बाद फ्रांस की धरती पर विजय का झंडा गाड़ा। यह न केवल एक एथलेटिक उपलब्धि है, बल्कि प्रशासनिक जीवन में संतुलन, अनुशासन और मानसिक शक्ति का प्रमाण भी है।


















