एटीएम में लॉक ढीला छोड़ की थी लाखों CASH चुराने की साजिश, लेकिन गाजियाबाद पुलिस की स्क्रिप्ट से हार गए चोर

-डीसीपी धवल जायसवाल और एसीपी रितेश त्रिपाठी की सटीक रणनीति से 10 लाख की रिकवरी
– दिल्ली के दो एटीएम टेक्नीशियन बने लुटेरे, 72 घंटों में केस सॉल्व, राजधानी दिल्ली तक फैला नेटवर्क ध्वस्त

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। डीसीपी सिटी की टीम ने एक और बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए एटीएम से लाखों की चोरी करने वाले दो हाईटेक लुटेरों को दबोच लिया है। घटना की गुत्थी सिर्फ चोरी नहीं, बल्कि तकनीकी विशेषज्ञता और योजनाबद्ध अपराध से जुड़ी थी, जिसे डीसीपी सिटी धवल जायसवाल और एसीपी कोतवाली रितेश त्रिपाठी की कड़ी निगरानी, रणनीति और तेज एक्शन ने महज कुछ ही दिनों में सुलझा लिया। नगर कोतवाली पुलिस और स्वॉट टीम ने मुखबिर की सूचना पर देर रात विजयनगर फ्लाईओवर के पास जाने वाले मार्ग से सूरज नारायण और सोनू राजपूत नामक दो शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया, जो दिल्ली के निवासी हैं लेकिन अपराध की जड़ें अयोध्या और मैनपुरी से जुड़ी हुई हैं। इन दोनों ने सॉफ्टवेयर-हार्डवेयर तकनीक की बारीक समझ का गलत इस्तेमाल कर एटीएम से 12.40 लाख की लूट को अंजाम दिया था। शनिवार को हरसांव स्थित पुलिस लाइन में प्रेस वार्ता के दौरान डीसीपी सिटी धवल जायसवाल ने बताया कि आरोपियों ने लूट को अंजाम देने के लिए तीन सप्ताह तक एटीएम मशीन को लेकर रणनीति बनाई थी।

आज अपराधियों के पास तकनीकी समझ है, लेकिन हमारे पास उससे बेहतर नेटवर्क, डेटा, निगरानी और हौसला है। हमारी टीम ने बेहद बारीकी से फुटेज खंगाले, मोबाइल ट्रैक किए, संदिग्धों की मूवमेंट देखी और आखिरकार इन पेशेवर अपराधियों को धर दबोचा गया। सूरज और सोनू, दोनों ही एटीएम रिपेयरिंग कंपनियों टेक बाइट और एनसीआर में कार्यरत थे। पहले सोनू ने एक एटीएम में लॉक डायलर तोड़ा, जिसे बाद में रिपेयर करते समय जानबूझकर लॉक के पेंच ढीले छोड़ दिए। इसके बाद कैमरों पर काली स्प्रे, फिर वायर काटना और अंत में हेलमेट लगाकर एटीएम के अंदर घुसना पूरा प्लान फिल्मी स्क्रिप्ट जैसा था, पर गाजियाबाद पुलिस की तेज आंखों और ठोस नेटवर्किंग ने इसका मंचन अधूरा छोड़ दिया। एसीपी कोतवाली रितेश त्रिपाठी ने बताया ये केस आम चोरी नहीं थी। यहां हर मूवमेंट सोची-समझी थी। लेकिन हमने संदिग्धों के एक-एक फोन लोकेशन, गतिविधि और व्यवहार का विश्लेषण किया और फिर कार्रवाई की।

पुलिस ने आरोपियों के पास से जो सामान बरामद किया, वह इस बात की पुष्टि करता है कि वे आधुनिक औजारों और प्रोफेशनल किट्स से लैस थे। जिनके पास से चोरी कि 10,00,500 नकद, मोटरसाइकिल (घटना में प्रयुक्त), तीन स्मार्टफोन, दो बैग, जिनमें पर्स, औजार, एटीएम खोलने के उपकरण, नकाब और दस्ताने शामिल थे जिन्हें बरामद किया गया। दोनों आरोपियों ने बताया कि चोरी के तुरंत बाद पैसे को आपस में बराबर बांटा गया। सूरज और सोनू दोनों को 6.20 लाख-6.20 लाख मिले थे। खर्च की गई रकम को छोड़कर शेष 10 लाख 500 रुपये पुलिस ने जब्त कर लिए। डीसीपी सिटी ने साबित कर दिया कि अपराध कितना भी हाईटेक क्यों न हो, कानून की पकड़ और तेज है। शहर की सुरक्षा व्यवस्था सिर्फ निगरानी नहीं, बल्कि एक्शन पर आधारित है। सिटी पुलिस लगातार ऐसे गिरोहों को बेनकाब कर रही है जो तकनीक के पीछे छिपकर अपराध को अंजाम देने की कोशिश करते हैं।