- 18 दिन पुराना आदेश, सत्ता गलियारों में उठे सवाल- फेरबदल के संकेत
उदय भूमि संवाददाता
लखनऊ। अगस्त की तपती दोपहरी में उत्तर प्रदेश की नौकरशाही में ऐसा झंझावात उठा जिसने लोक भवन से लेकर सचिवालय तक सबको हैरत में डाल दिया। महज़ 18 दिन पहले प्रदेश के मुख्य सचिव बनाए गए आईएएस शशि प्रकाश गोयल अचानक लंबी छुट्टी पर चले गए। 31 जुलाई को कार्यभार संभालने वाले गोयल को योगी सरकार के सबसे भरोसेमंद और काबिल अफसरों में गिना जाता था। मुख्यमंत्री कार्यालय में उनकी आठ साल की पकड़, दबंग और साफ-सुथरी छवि ने उन्हें प्रशासन का “फौलादी चेहरा” बना दिया था। लेकिन अचानक छुट्टी लेने का फैसला ऐसा रहा जिसने शासन के गलियारों में हलचल मचा दी और नौकरशाही में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया। गोयल की अनुपस्थिति में शासन ने कृषि उत्पादन आयुक्त दीपक कुमार को मुख्य सचिव और अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त का अतिरिक्त चार्ज सौंपा है। 1990 बैच के इस वरिष्ठ अफसर को प्रशासन में शांत लेकिन निर्णायक अधिकारी माना जाता है। अब उन्हें प्रदेश की सबसे बड़ी जिम्मेदारी संभालनी होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनावों और निवेशकों की अहम “ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी” से पहले यह जिम्मेदारी आसान नहीं होगी।
बड़े बदलाव की आहट से अफसरशाही में बेचैनी
सूत्रों का कहना है कि यूपी की नौकरशाही में बड़े पैमाने पर फेरबदल की तैयारी है। अपर मुख्य सचिवों से लेकर जिलाधिकारियों और मंडलायुक्तों तक की सूची लगभग तैयार थी। लेकिन लिस्ट जारी होने से पहले ही गोयल छुट्टी पर चले गए। अब मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव संजय प्रसाद पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कई चर्चित अफसरों की कुर्सियां हिल सकती हैं।
ऊर्जा विभाग से लेकर योजना तक में बदलाव की अटकलें
सत्ता के गलियारों में चर्चा है कि यूपी पावर कॉर्पोरेशन के चेयरमैन आशीष गोयल और ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा के बीच विवाद की वजह से आशीष गोयल की कुर्सी खतरे में है। वहीं योजना विभाग को लंबे समय से देख रहे आलोक कुमार को नई जिम्मेदारी मिल सकती है। कार्मिक विभाग और जीएसटी के प्रमुख सचिव एम. देवराज भी विभाग बदलने की मांग कर चुके हैं। इन संभावित फेरबदल ने प्रशासनिक हलकों में हलचल और तेज कर दी है।
गोयल की दबंग और बेबाक छवि
एसपी गोयल का नाम यूपी ही नहीं बल्कि दिल्ली की नौकरशाही में भी एक निडर और ईमानदार अफसर के रूप में लिया जाता है। करीबी अफसर कहते हैं कि वे किसी भी दबाव में झुकने वाले अधिकारी नहीं हैं। 2024 का एक बड़ा वाकया इसका सबूत है जब सिंचाई विभाग के 750 सहायक इंजीनियरों के तबादले की फाइल उन्होंने बार-बार लौटा दी थी। यही नहीं, सैमसंग इंडिया को सीमा से अधिक सब्सिडी देने का प्रस्ताव भी उन्होंने सख्ती से खारिज कर दिया था। उनके इस बेबाक रवैये ने उन्हें सत्ता तंत्र में अलग पहचान दिलाई। इतने मजबूत और भरोसेमंद अफसर का अचानक लंबी छुट्टी पर जाना सवाल खड़े कर रहा है। क्या यह महज़ व्यक्तिगत कारण है या फिर सत्ता के भीतर कोई गहरी खींचतान? अफसरशाही से जुड़े लोग मानते हैं कि गोयल का अवकाश केवल एक प्रशासनिक घटना नहीं बल्कि बड़े बदलावों का संकेत है।
नौकरशाही के पारे पर चढ़ा पारा
लखनऊ से लेकर दिल्ली तक अफसरों की निगाहें अब प्रदेश सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। दीपक कुमार की कमान और संभावित तबादलों की लिस्ट ने सचिवालय में बेचैनी बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि यह छुट्टी सिर्फ एक औपचारिकता थी या फिर यूपी की नौकरशाही में बड़े राजनीतिक समीकरण बदलने का इशारा।
















