गाजियाबाद रेलवे स्टेशन पर विकास कार्य की धीमी रफ्तार

  • यात्रियों की बढ़ी परेशानी, शहर विधायक ने रेल मंत्री से की सख्त कार्रवाई की मांग

उदय भूमि संवाददाता

गाजियाबाद। रेलवे स्टेशन पर चल रहे आधुनिकीकरण के कार्यों की धीमी गति ने यात्रियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गंदगी, अव्यवस्था और अधूरे निर्माण कार्यों से रोजाना हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी को लेकर शहर विधायक संजीव शर्मा ने शुक्रवार को केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर उच्च स्तरीय समीक्षा और मौके पर निरीक्षण की मांग की है। गाजियाबाद रेलवे स्टेशन, दिल्ली से पहले का एक प्रमुख जंक्शन है। यहां से प्रतिदिन हजारों यात्री दिल्ली और अन्य राज्यों के लिए ट्रेन पकड़ते हैं। भीड़ के दबाव के चलते स्टेशन पर हर समय यात्री आवागमन बना रहता है। ऐसे में विकास कार्यों की सुस्त रफ्तार और अव्यवस्था लोगों के लिए परेशानी का बड़ा कारण बन गई है।

स्टेशन का कायाकल्प अमृत भारत योजना के तहत किया जा रहा है। योजना के अनुसार विकास कार्यों को 25 अगस्त 2025 तक पूरा किया जाना था। लेकिन अब तक मात्र 25 प्रतिशत कार्य ही हो पाया है। शहर साइड पर केवल एक बिल्डिंग बनी है और विजयनगर साइड पर अधिकारियों के कार्यालय का काम चल रहा है, जो अभी आधा-अधूरा ही है। विधायक ने अपने पत्र में लिखा कि इस गति से कार्य पूरा होना मुश्किल है और यात्रियों को लंबे समय तक असुविधा झेलनी पड़ेगी। निर्माण कार्य की धीमी रफ्तार के साथ-साथ स्टेशन की मौजूदा स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। स्टेशन परिसर में गंदगी और जलभराव आम बात है। शौचालयों की स्थिति बेहद खराब है और उनकी सफाई नियमित रूप से नहीं हो रही।

मानसून के दिनों में स्टेशन परिसर में पानी भर जाता है, जिससे यात्रियों को आने-जाने में काफी दिक्कत होती है। शहर विधायक संजीव शर्मा ने रेल मंत्री को लिखे पत्र में स्पष्ट कहा कि स्टेशन पर हो रहे कार्य की गुणवत्ता और समयबद्धता की जांच जरूरी है। उन्होंने सुझाव दिया कि एक उच्च स्तरीय समिति गठित की जाए। समिति मौके पर जाकर निरीक्षण करे। निर्माण कार्य की गति, सफाई व्यवस्था और यात्रियों की सुविधाओं की निगरानी की जाए। गाजियाबाद रेलवे स्टेशन पर रोजाना हजारों लोग सफर करते हैं। ऐसे में अधूरे निर्माण, अव्यवस्था और गंदगी का सीधा असर यात्रियों की यात्रा पर पड़ रहा है। यात्री चाहते हैं कि सरकार और रेलवे विभाग केवल वादे न करें, बल्कि जमीनी स्तर पर सुविधाओं में सुधार लाएं।