-जिला आबकारी अधिकारी संजय कुमार प्रथम की सख्ती से अवैध कारोबार पर लगाम
– हर दिन 4-5 करोड़ की शराब बिक्री, राजस्व में ऐतिहासिक इजाफा
-पॉश मशीन बनी उपभोक्ताओं के अधिकारों की ढाल, ओवररेटिंग हुई खत्म
-हिंडन खादर क्षेत्र में कच्ची शराब के अड्डों पर ताला, माफियाओं के हौसले पस्त
-सात इंस्पेक्टरों की फौज दिन-रात शराब तस्करी पर रख रही है पैनी नजर
– हर दिन 4-5 करोड़ की शराब बिक्री, राजस्व में ऐतिहासिक इजाफा
-पॉश मशीन बनी उपभोक्ताओं के अधिकारों की ढाल, ओवररेटिंग हुई खत्म
-हिंडन खादर क्षेत्र में कच्ची शराब के अड्डों पर ताला, माफियाओं के हौसले पस्त
-सात इंस्पेक्टरों की फौज दिन-रात शराब तस्करी पर रख रही है पैनी नजर
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। जनपद गाजियाबाद इन दिनों आबकारी विभाग की सख्त कार्यवाही और लगातार सफलताओं की वजह से सुर्खियों में है। अवैध शराब का काला कारोबार, जो कभी जिले की काली हकीकत था, अब इतिहास बनने की ओर है। इसकी बड़ी वजह हैं जिला आबकारी अधिकारी संजय कुमार प्रथम, जिनकी रणनीति और सख्ती ने शराब माफियाओं की जड़ें हिला दी हैं। आबकारी विभाग की कार्रवाई ने न सिर्फ अवैध कारोबार पर नकेल कसी है, बल्कि विभाग की आय को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया है। आंकड़े बताते हैं कि गाजियाबाद में हर दिन करीब 4 से 5 करोड़ रुपये की शराब बिक्री हो रही है। यह साफ इशारा है कि अब लोग अधिकृत दुकानों से ही शराब खरीद रहे हैं। जिला आबकारी अधिकारी का सबसे बड़ा कदम है पॉश (प्वाइंट ऑफ सेल) मशीन का प्रयोग। जिले की करीब 90 प्रतिशत शराब बिक्री पॉश मशीन से ही हो रही है। यह मशीन न सिर्फ बिक्री को पारदर्शी बनाती है, बल्कि ओवररेटिंग जैसी पुरानी समस्याओं को भी पूरी तरह खत्म कर देती है। ग्राहक जैसे ही शराब खरीदता है, पॉश मशीन पर उसका बिल दर्ज हो जाता है और पूरी जानकारी विभाग के सर्वर तक पहुंच जाती है।
गाजियाबाद। जनपद गाजियाबाद इन दिनों आबकारी विभाग की सख्त कार्यवाही और लगातार सफलताओं की वजह से सुर्खियों में है। अवैध शराब का काला कारोबार, जो कभी जिले की काली हकीकत था, अब इतिहास बनने की ओर है। इसकी बड़ी वजह हैं जिला आबकारी अधिकारी संजय कुमार प्रथम, जिनकी रणनीति और सख्ती ने शराब माफियाओं की जड़ें हिला दी हैं। आबकारी विभाग की कार्रवाई ने न सिर्फ अवैध कारोबार पर नकेल कसी है, बल्कि विभाग की आय को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया है। आंकड़े बताते हैं कि गाजियाबाद में हर दिन करीब 4 से 5 करोड़ रुपये की शराब बिक्री हो रही है। यह साफ इशारा है कि अब लोग अधिकृत दुकानों से ही शराब खरीद रहे हैं। जिला आबकारी अधिकारी का सबसे बड़ा कदम है पॉश (प्वाइंट ऑफ सेल) मशीन का प्रयोग। जिले की करीब 90 प्रतिशत शराब बिक्री पॉश मशीन से ही हो रही है। यह मशीन न सिर्फ बिक्री को पारदर्शी बनाती है, बल्कि ओवररेटिंग जैसी पुरानी समस्याओं को भी पूरी तरह खत्म कर देती है। ग्राहक जैसे ही शराब खरीदता है, पॉश मशीन पर उसका बिल दर्ज हो जाता है और पूरी जानकारी विभाग के सर्वर तक पहुंच जाती है।
इससे दुकानदार की मनमानी और उपभोक्ताओं के शोषण की गुंजाइश ही नहीं बचती। हालांकि तकनीकी कारणों से 10 प्रतिशत बिक्री मशीन से बाहर हो जाती है, लेकिन विभाग लगातार इन खामियों को दूर करने पर काम कर रहा है। पॉश मशीन के इस्तेमाल से जहां एक ओर ओवर रेटिंग की समस्याओं पर रोक लग रही है तो वहीं दुसरी ओर दुकानों पर मौजूद स्टॉक की भी जानकारी विभाग के पास रहती है। जिला आबकारी अधिकारी का कहना है कि पॉश मशीनें हमारी सबसे बड़ी ताकत हैं। इनसे न केवल पारदर्शिता आती है, बल्कि यह सुनिश्चित होता है कि हर बोतल वैध माध्यम से बिके और राजस्व का एक-एक पैसा सरकार तक पहुंचे। जिले के हिंडन खादर क्षेत्र को कभी कच्ची शराब का गढ़ माना जाता था। यहां खुलेआम जहरीली शराब बनती और बेची जाती थी। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। आबकारी विभाग की सख्ती से यहां कच्ची शराब के अड्डों पर ताले लटक गए हैं।
इतना ही नहीं, बाहरी राज्यों से गाजियाबाद में शराब तस्करी रोकने के लिए राष्ट्रीय राजमार्गों और सीमाओं पर 24 घंटे आबकारी की टीमें चौकसी कर रही हैं। अवैध शराब पर रोक और पॉश मशीन की व्यवस्था से सबसे बड़ा फायदा जनता को हुआ है। अब उपभोक्ताओं को न तो ओवररेटिंग का डर है और न ही जहरीली शराब का। लोग निश्चिंत होकर अधिकृत दुकानों से शराब खरीद रहे हैं। गाजियाबाद के निवासी संजय त्यागी बताते हैं कि पहले दुकान पर ज्यादा दाम वसूलते थे और नकली बोतलें भी थमा देते थे। लेकिन अब पॉश मशीन से सही दाम पर शराब मिलती है। बिल हाथ में होता है, तो मन को भी सुकून मिलता है।
सात इंस्पेक्टरों की मजबूत टीम
जिला आबकारी अधिकारी की इस मुहिम को सफल बनाने में उनकी मजबूत टीम का भी बड़ा योगदान है। जिले में तैनात सात इंस्पेक्टर मनोज शर्मा, डॉ. राकेश त्रिपाठी, कीर्ति सिंह, अखिलेश कुमार, अनुज वर्मा, चमन सिंह और चन्द्रजीत सिंह अपने-अपने क्षेत्रों में शराब माफियाओं के खिलाफ मोर्चा संभाले हुए हैं। ये सातों अधिकारी अपनी-अपनी टीमों के साथ रोजाना निगरानी करते हैं, छापेमारी करते हैं और सुनिश्चित करते हैं कि अवैध शराब की एक भी बोतल बाजार तक न पहुंचे। आबकारी विभाग कि यह सात टीमें किसी बड़ी फौज से कम नहीं हैं। उनकी मेहनत और ईमानदारी से ही गाजियाबाद में यह बदलाव संभव हुआ है।
जिला आबकारी अधिकारी की इस मुहिम को सफल बनाने में उनकी मजबूत टीम का भी बड़ा योगदान है। जिले में तैनात सात इंस्पेक्टर मनोज शर्मा, डॉ. राकेश त्रिपाठी, कीर्ति सिंह, अखिलेश कुमार, अनुज वर्मा, चमन सिंह और चन्द्रजीत सिंह अपने-अपने क्षेत्रों में शराब माफियाओं के खिलाफ मोर्चा संभाले हुए हैं। ये सातों अधिकारी अपनी-अपनी टीमों के साथ रोजाना निगरानी करते हैं, छापेमारी करते हैं और सुनिश्चित करते हैं कि अवैध शराब की एक भी बोतल बाजार तक न पहुंचे। आबकारी विभाग कि यह सात टीमें किसी बड़ी फौज से कम नहीं हैं। उनकी मेहनत और ईमानदारी से ही गाजियाबाद में यह बदलाव संभव हुआ है।
राजस्व में ऐतिहासिक इजाफा
अवैध शराब पर लगाम कसने का सीधा असर सरकारी खजाने पर पड़ा है। हर दिन करोड़ों की शराब बिक्री से जिले का राजस्व तेजी से बढ़ा है। यह अतिरिक्त आय सरकार के विकास कार्यों और जनकल्याण योजनाओं में काम आ रही है। जिला आबकारी अधिकारी का मानना है कि विभाग की जिम्मेदारी सिर्फ राजस्व जुटाना नहीं है। अवैध शराब से आम लोगों की जान को खतरा होता है। जहरीली शराब से होने वाली मौतों पर रोक लगाना भी विभाग की पहली प्राथमिकता है।
अवैध शराब पर लगाम कसने का सीधा असर सरकारी खजाने पर पड़ा है। हर दिन करोड़ों की शराब बिक्री से जिले का राजस्व तेजी से बढ़ा है। यह अतिरिक्त आय सरकार के विकास कार्यों और जनकल्याण योजनाओं में काम आ रही है। जिला आबकारी अधिकारी का मानना है कि विभाग की जिम्मेदारी सिर्फ राजस्व जुटाना नहीं है। अवैध शराब से आम लोगों की जान को खतरा होता है। जहरीली शराब से होने वाली मौतों पर रोक लगाना भी विभाग की पहली प्राथमिकता है।
माफियाओं के खिलाफ युद्ध जारी
गाजियाबाद में आबकारी विभाग की इस सख्ती से शराब माफिया सकते में हैं। उनकी जड़ें धीरे-धीरे कमजोर पड़ रही हैं। लगातार चल रही छापेमारी और निगरानी ने उनके हौसले पस्त कर दिए हैं। लेकिन विभाग का कहना है कि यह जंग अभी खत्म नहीं हुई है। गाजियाबाद आज उत्तर प्रदेश का वह जिला बन चुका है, जहां पॉश मशीन से पारदर्शी बिक्री और अवैध शराब पर नकेल एक मिसाल पेश कर रही है। जिला आबकारी अधिकारी संजय कुमार प्रथम और उनकी टीम ने दिखा दिया है कि अगर इच्छाशक्ति और ईमानदारी हो तो संगठित अपराध को भी खत्म किया जा सकता है।
गाजियाबाद में आबकारी विभाग की इस सख्ती से शराब माफिया सकते में हैं। उनकी जड़ें धीरे-धीरे कमजोर पड़ रही हैं। लगातार चल रही छापेमारी और निगरानी ने उनके हौसले पस्त कर दिए हैं। लेकिन विभाग का कहना है कि यह जंग अभी खत्म नहीं हुई है। गाजियाबाद आज उत्तर प्रदेश का वह जिला बन चुका है, जहां पॉश मशीन से पारदर्शी बिक्री और अवैध शराब पर नकेल एक मिसाल पेश कर रही है। जिला आबकारी अधिकारी संजय कुमार प्रथम और उनकी टीम ने दिखा दिया है कि अगर इच्छाशक्ति और ईमानदारी हो तो संगठित अपराध को भी खत्म किया जा सकता है।

जिला आबकारी अधिकारी
गाजियाबाद में आबकारी विभाग का मकसद केवल राजस्व बढ़ाना नहीं, बल्कि अवैध और नकली शराब के कारोबार पर पूरी तरह नकेल कसना भी है। पॉश मशीनों के इस्तेमाल से पारदर्शिता आई है और ओवररेटिंग जैसी शिकायतें पूरी तरह खत्म हो चुकी हैं। हमारी सातों टीमें 24 घंटे मुस्तैद हैं और बड़े पैमाने पर अवैध शराब के अड्डों को ध्वस्त कर चुकी हैं। हिंडन खादर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में कच्ची शराब के धंधे पर पूरी तरह ताला लग चुका है। हमारी कोशिश है कि हर उपभोक्ता को सुरक्षित और वैध शराब उचित दाम पर मिले और सरकार के खजाने को नुकसान पहुँचाने वाले माफियाओं को किसी भी हाल में बख्शा न जाए।
संजय कुमार प्रथम
जिला आबकारी अधिकारी

















