प्रधानमंत्री लखपति दीदी योजना: हुनर से कमाएंगी महिलाएं लाखों, ज्वेलरी और लिफाफा बनाकर बनेगा कारोबार

  • स्वयं सहायता समूह ग्रामीण अर्थव्यवस्था में दे रहे योगदान: अभिनव गोपाल
  • महिलाओं के घरेलू उत्पाद अब ऑनलाइन और थोक बाजार में होंगे उपलब्ध, आर्थिक सशक्तिकरण को मिलेगी गति
  • प्रधानमंत्री लखपति दीदी योजना के तहत 400 स्वयं सहायता समूहों में जुड़ी 12,536 महिलाएं बन रही हैं आत्मनिर्भर
  • ट्रेनिंग से महिलाएं तैयार करेंगी ऑर्गेनिक अचार, मुरब्बा, पापड़, चिप्स, जुट की टोकरी और सजावटी सामान
  • पिछले वर्ष 46 नए समूहों का गठन, लगभग 500 महिलाओं को रोजगार और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया गया
  • 7408 महिलाएं अपने उत्पाद बेचकर बन चुकी हैं लखपति, सामाजिक और आर्थिक बदलाव का प्रतीक
  • जिले में 2400 सहायता समूह के माध्यम से करीब 12,000 महिलाएं आज कर रही हैं उत्पाद निर्माण और बिक्री

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति सुधारने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री लखपति दीदी योजना के तहत जिले की महिलाओं को ज्वेलरी और लिफाफा बनाने का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह प्रशिक्षण राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन विभाग द्वारा आयोजित किया जा रहा है। मुरादनगर में आर्टिफिशियल ज्वेलरी और लोनी में लिफाफा निर्माण के प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए गए हैं। प्रशिक्षण प्राप्त महिलाओं को अब अपने हुनर का उपयोग कर घरेलू उत्पाद जैसे ऑर्गेनिक अचार, मुरब्बा, पापड़, चिप्स, जुट की टोकरी और सजावटी सामान बनाने और बेचने का अवसर मिलेगा। इन उत्पादों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और थोक बाजार के माध्यम से बेचा जाएगा, जिससे महिलाएं अपनी आय में वृद्धि कर सकेंगी और लखपति बनने की दिशा में कदम बढ़ाएंगी। ग्राम विकास अधिकारी प्रज्ञा श्रीवास्तव ने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष में जिले में 46 नए स्वयं सहायता समूहों का गठन किया गया था, जिनसे लगभग 500 महिलाएं जुड़ीं। अब जिले में कुल 400 स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनमें 12,536 महिलाएं शामिल हैं। ये महिलाएं न केवल घरेलू उत्पाद बनाती हैं बल्कि त्योहारों और सरकारी कार्यक्रमों में स्टॉल लगाकर अपने उत्पादों की बिक्री भी करती हैं।

उन्होंने आगे कहा कि पहले जो महिलाएं केवल घरेलू कामकाज तक सीमित थीं, आज वही महिलाएं स्वयं का व्यवसाय चलाकर आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं। इस योजना के तहत अब तक 7408 महिलाएं अपने उत्पादों को बेचकर लखपति बन चुकी हैं। यह न केवल महिलाओं की आय बढ़ाने में मददगार है, बल्कि सामाजिक बदलाव और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। मुख्य विकास अधिकारी अभिनव गोपाल ने बताया कि स्वयं सहायता समूह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को ऊँचाई पर ले जाने में मदद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को प्रशिक्षण देने, उत्पाद बनाने और बेचने के अवसर देने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और उन्हें अपनी पहचान बनाने में मदद मिल रही है।

महिलाओं का कहना है कि प्रशिक्षण और लखपति दीदी योजना के माध्यम से उन्हें अपने हुनर को व्यावसायिक अवसर में बदलने का अवसर मिला है। अब वे न केवल अपने परिवार की आय में योगदान कर रही हैं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक रूप से भी स्वतंत्र बन रही हैं। इस योजना के तहत प्रशिक्षण प्राप्त महिलाएं सजावटी सामान, आर्टिफिशियल ज्वेलरी, लिफाफा और खाद्य पदार्थ बनाकर थोक विक्रेता, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और सरकारी कार्यक्रमों में बेचकर अपने व्यवसाय को बढ़ा रही हैं। इसका सीधा लाभ महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता प्राप्त करना है। प्रधानमंत्री लखपति दीदी योजना ग्रामीण महिलाओं के लिए न केवल रोजगार का अवसर लेकर आई है, बल्कि उनके जीवन में आत्मविश्वास, सामाजिक सम्मान और व्यवसायिक क्षमता भी बढ़ा रही है। यह योजना महिलाओं को उनकी मेहनत और हुनर के माध्यम से सशक्त बनाकर पूरे समाज में बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।