-13 आवेदन और पारदर्शी बोली से जिले को 8 लाख 45 हजार रुपये का अतिरिक्त राजस्व
-कम्पोजिट शराब दुकान का नया लाइसेंस 83 लाख 30 हजार रुपये में आवंटित
-आबकारी विभाग की निगरानी से शराब बिक्री में पारदर्शिता सुनिश्चित
-जिले में नियमों के उल्लंघन पर कोई छूट नहीं, सख्त कार्रवाई का संदेश
-ई-टेंडर प्रक्रिया से न केवल राजस्व में वृद्धि, बल्कि कानून का पालन भी सुनिश्चित
-सुबोध कुमार श्रीवास्तव के नेतृत्व में ई-टेंडर में पारदर्शिता और जिले को 8 लाख 45 हजार रुपये का अतिरिक्त राजस्व
उदय भूमि संवाददाता
गौतमबुद्ध नगर। जिले में शराब के नियमों का उल्लंघन अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दनकौर नंबर-2 झांझर बस स्टैण्ड के पास कम्पोजिट शराब की दुकान के लिए शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में ई-टेंडर का आयोजन किया गया। यह ई-टेंडर न केवल जिले में शराब की बिक्री की पारदर्शिता को सुनिश्चित करने के लिए था, बल्कि आबकारी विभाग की सख्ती और अनुशासन का भी प्रमाण बना। पूर्व में इसी दुकान का लाइसेंस मानवीय और कानूनी मानकों के उल्लंघन के चलते निरस्त कर दिया गया था। आबकारी विभाग की टीम द्वारा की गई जांच में पता चला था कि पूर्व लाइसेंसी मनोज द्वारा शराब की बोतल में पानी मिलाकर ग्राहकों को बेचा जा रहा था। इस गंभीर उल्लंघन के चलते जिलाधिकारी के आदेश पर लाइसेंस तत्काल निरस्त कर दिया गया। इस ई-टेंडर में नए लाइसेंस के लिए विभाग को कुल 13 आवेदन प्राप्त हुए। सबसे अधिक बोली पवन कुमार बंसल ने लगाई और 83 लाख 30 हजार रुपये की राशि से यह लाइसेंस अपने नाम किया। इससे पहले इस दुकान की लाइसेंस फीस 30 लाख 65 हजार रुपये थी। केवल आवेदन फीस से ही जिले को अतिरिक्त 8 लाख 45 हजार रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। इस प्रकार न केवल नियमों का पालन हुआ, बल्कि जिले के राजस्व में भी महत्वपूर्ण वृद्धि हुई।
ई-टेंडर की प्रक्रिया में आबकारी विभाग की पूरी टीम मौजूद रही। एडीएम फाइनेंस अतुल कुमार, जिला आबकारी अधिकारी सुबोध कुमार श्रीवास्तव, एसीपी हेडक्वार्टर पवन कुमार, आबकारी निरीक्षक आशीष पाण्डेय, नामवर सिंह, अखिलेश कुमार और संजय चन्द्र सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद थे। सभी ने सुनिश्चित किया कि ई-टेंडर पूरी पारदर्शिता और अनुशासन के साथ संपन्न हो। जिला आबकारी अधिकारी सुबोध कुमार श्रीवास्तव ने इस अवसर पर स्पष्ट संदेश दिया कि नियमों के विरुद्ध कार्य करने वालों के लिए अब कोई जगह नहीं है। उनका कहना है कि आबकारी विभाग जिले में कानून के पालन और जनहित के लिए लगातार सक्रिय है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। ई-टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया कि लाइसेंस केवल योग्य और नियमों के अनुसार कार्य करने वाले व्यक्तियों को ही मिले। सुबोध कुमार श्रीवास्तव की कार्यशैली और टीम की सक्रियता ने यह सुनिश्चित किया कि न केवल नियमों का पालन हुआ बल्कि जिले के राजस्व में भी वृद्धि दर्ज की गई।
उनकी अनुशासित निगरानी और सख्त कदमों के कारण अब शराब माफियाओं और नियम तोडऩे वालों के लिए किसी भी प्रकार की छूट नहीं है। ई-टेंडर प्रक्रिया से जिले को वित्तीय रूप से बड़ा लाभ मिला। पवन कुमार बंसल द्वारा सबसे अधिक बोली लगाने के साथ ही आवेदन फीस और लाइसेंस राशि के माध्यम से कुल राजस्व में वृद्धि हुई। इस प्रक्रिया से यह भी सुनिश्चित हुआ कि शराब की बिक्री पारदर्शी तरीके से हो और किसी भी प्रकार की अनियमितता न हो।
सुबोध कुमार श्रीवास्तव ने यह भी कहा कि आबकारी विभाग की यह कार्रवाई केवल राजस्व वृद्धि के लिए नहीं, बल्कि जिले में कानून और सुरक्षा बनाए रखने के लिए भी है। किसी भी दुकान या समारोह में शराब बेचने से पहले आवश्यक लाइसेंस और नियमों का पालन अनिवार्य है। गौतमबुद्ध नगर में आबकारी विभाग की यह सख्त नीति और सुबोध कुमार श्रीवास्तव की अनुशासित नेतृत्व क्षमता यह स्पष्ट करती है कि नियम तोडऩे वालों के लिए अब कोई राहत नहीं है। ई-टेंडर के माध्यम से पारदर्शिता, अनुशासन और जिले के राजस्व में वृद्धि का एक आदर्श उदाहरण स्थापित हुआ है। आबकारी विभाग की सक्रियता और सख्ती के कारण अब जिले में शराब की बिक्री सुरक्षित और नियंत्रित माहौल में होगी।
















