292 करोड़ की वसूली का अल्टीमेटम: जीडीए का सख्त एक्शन प्लान तैयार

-2607 बकायेदारों पर गिरेगी गाज, अंतिम ओटीएस के बाद आवंटन निरस्तीकरण और कुर्की की चेतावनी
-10-20 साल से बकाया, रिकॉर्ड में 1808 सबसे पुराने डिफॉल्टर

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने वर्षों से किस्तें और अन्य देयक न चुकाने वाले आवंटियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई का खाका तैयार कर लिया है। प्राधिकरण के ताजा आंकड़ों के मुताबिक जिले में 2607 आवंटी ऐसे हैं जिन पर कुल 292 करोड़ रुपये से अधिक की बकाया राशि लंबित है। इनमें सबसे चिंताजनक स्थिति उन 1808 आवंटियों की है जिन्होंने 10 साल से भी अधिक समय से एक रुपया तक जमा नहीं किया। आंकड़ों के अनुसार 5 से 10 वर्ष के बकायेदार 316, 1 से 5 वर्ष के 335 और एक वर्ष से बकाया रखने वाले 148 हैं। इसके अतिरिक्त 32 मामलों में मानचित्र (मैप) शुल्क लंबित है। प्राधिकरण का मानना है कि लंबे समय से भुगतान न होने के कारण मूलधन पर जुर्माना और चक्रवृद्धि ब्याज बढ़ता गया, जिससे वसूली चुनौतीपूर्ण होती चली गई। अब प्रशासन ने ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत कठोर कदम उठाने का निर्णय लिया है।

जीडीए प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शासन स्तर से एक और ‘वन टाइम सेटलमेंट’ (ओटीएस) योजना लाने की तैयारी है, जो बकायेदारों के लिए अंतिम अवसर साबित होगी। इससे पहले दो बार लागू ओटीएस में ब्याज में बड़ी छूट दी गई थी और अनेक आवंटियों ने लाभ लेकर अपने प्रकरण निस्तारित कर लिए थे। हालांकि 2607 आवंटियों ने उस समय भी भुगतान नहीं किया। नई ओटीएस लागू होने पर सीमित अवधि के भीतर बकाया जमा करने वालों को राहत मिलेगी, लेकिन अवधि समाप्त होते ही जोनवार अभियान चलाकर कड़ी कार्रवाई शुरू की जाएगी। बड़े प्लॉट या मकानों के जानबूझकर भुगतान न करने वाले आवंटियों का आवंटन पत्र निरस्त किया जाएगा। इसके बाद संपत्तियों को सील कर पुलिस बल की मदद से कब्जा मुक्त कराया जाएगा और दोबारा नीलामी की प्रक्रिया शुरू होगी। आवश्यकता पडऩे पर आरसी (रिकवरी सर्टिफिकेट) जारी कर कुर्की की कार्रवाई भी की जाएगी।

जीडीए सचिव विवेक कुमार मिश्रा ने कहा कि प्राधिकरण का धन जनता का धन है। इसे वर्षों तक रोककर रखना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। हम बकायेदारों को एक अंतिम अवसर दे रहे हैं, ताकि वे ओटीएस का लाभ लेकर अपनी संपत्ति सुरक्षित रख सकें। लेकिन यदि इस बार भी भुगतान नहीं हुआ तो आवंटन निरस्तीकरण, सीलिंग और कुर्की जैसी कार्रवाई में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। उन्होंने कहा कि जीडीए अब डिजिटल मॉनिटरिंग और जोनवार समीक्षा के माध्यम से बकाया मामलों की नियमित निगरानी करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया हमारी प्राथमिकता है कि राजस्व की स्थिति मजबूत हो, ताकि शहर में विकास परियोजनाएं बाधित न हों। सड़क, सीवर, नाला और अन्य आधारभूत कार्यों के लिए धन आवश्यक है।

बकाया वसूली से ही विकास की गति को बनाए रखा जा सकेगा। प्राधिकरण ने सभी आवंटियों से अपील की है कि वे अपनी संपत्तियों का स्टेटस तुरंत जांचें और आने वाली ओटीएस योजना के लिए आर्थिक तैयारी करें। अधिकारियों के अनुसार अब ‘वेट एंड वॉच’ की नीति समाप्त हो चुकी है। जीडीए 292 करोड़ रुपये की वसूली के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और नियमों के अनुरूप सख्त कदम उठाए जाएंगे। शहर के हजारों बकायेदारों के लिए यह स्पष्ट संकेत है कि समय रहते भुगतान कर दें, अन्यथा घर और प्लॉट दोनों हाथ से निकल सकते हैं।