-गूगल फॉर एजुकेशन रेफरेंस इंस्टीट्यूशन के रूप में पुन: चयन, डिजिटल शिक्षा मॉडल को अंतरराष्ट्रीय सराहना
-एआई, जेमिनी और गूगल वर्कस्पेस के जरिए बदल रहा शिक्षण का पारंपरिक स्वरूप
-नवाचार, वैश्विक दृष्टिकोण और छात्र-केंद्रित शिक्षा से एनसीआर में स्थापित की अग्रणी पहचान
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। डिजिटल शिक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित शिक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करते हुए नेहरू वर्ल्ड स्कूल ने एक बार फिर वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। विद्यालय को पुन: गूगल फॉर एजुकेशन रेफरेंस इंस्टीट्यूशन के रूप में मान्यता प्रदान की गई है। यह सम्मान उन चुनिंदा शिक्षण संस्थानों को दिया जाता है जो आधुनिक तकनीक, एआई टूल्स और नवाचारपूर्ण शिक्षण पद्धतियों का प्रभावी और प्रेरणादायक उपयोग करते हैं। यह उपलब्धि केवल एक उपाधि नहीं, बल्कि वैश्विक शैक्षिक समुदाय द्वारा विद्यालय की गुणवत्ता, दूरदृष्टि और तकनीक-आधारित शिक्षण प्रणाली पर जताया गया विश्वास मानी जा रही है। गूगल द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थान शिक्षा में डिजिटल साधनों के आदर्श उपयोग का मॉडल प्रस्तुत करते हैं, जिन्हें विश्वभर के अन्य विद्यालय अपनाने योग्य मानते हैं। नेहरू वर्ल्ड स्कूल ने पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा को पारंपरिक सीमाओं से बाहर निकालते हुए तकनीक को सीखने की प्रक्रिया का सक्रिय हिस्सा बनाया है। विद्यालय में गूगल वर्कस्पेस, एआई आधारित जेमिनी प्लेटफॉर्म और अन्य डिजिटल संसाधनों को इस तरह एकीकृत किया गया है कि विद्यार्थियों के लिए सीखना अधिक रोचक, व्यक्तिगत और परिणामोन्मुख बन सके।
विद्यालय प्रशासन के अनुसार तकनीक का उपयोग केवल ऑनलाइन कक्षाओं या डिजिटल असाइनमेंट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह छात्रों की सीखने की गति का विश्लेषण करने, उनकी व्यक्तिगत जरूरतों को समझने और शिक्षकों को बेहतर मार्गदर्शन देने का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। शिक्षण प्रक्रिया में डेटा आधारित निर्णय और एआई सहायता ने कक्षा वातावरण को अधिक सहयोगात्मक और सक्रिय बना दिया है। विद्यालय के निदेशक डॉ. अरुणाभ सिंह ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा का भविष्य तकनीक और मानवीय बुद्धिमत्ता के संतुलन में निहित है। उन्होंने कहा कि तकनीक कभी भी शिक्षकों का स्थान नहीं ले सकती, लेकिन जो शिक्षक तकनीक का प्रभावी उपयोग करेंगे, वे निश्चित रूप से शिक्षा के नए युग का नेतृत्व करेंगे। उनका मानना है कि एआई और जेमिनी जैसे उपकरण मानव सोच को प्रतिस्थापित नहीं बल्कि उसका विस्तार करने का माध्यम हैं। विद्यालय का उद्देश्य ऐसी कक्षाओं का निर्माण करना है जहां नवाचार गहन अधिगम को मजबूत करे और विद्यार्थियों की रचनात्मकता को नई दिशा मिले।
विद्यालय की एक्जीक्यूटिव हेड सुश्री सुसन होम्स ने कहा कि गूगल टूल्स के समावेश ने शिक्षकों के व्यावसायिक विकास को नई गति प्रदान की है। शिक्षकों के बीच सहयोग की संस्कृति मजबूत हुई है और विद्यार्थियों तथा शिक्षकों को साथ मिलकर सीखने, सोचने और समस्याओं का समाधान खोजने का अवसर मिला है। उनके अनुसार डिजिटल प्लेटफॉर्म ने शिक्षा को अधिक संवादात्मक, लचीला और वैश्विक स्तर से जुड़ा बनाया है। एनसीआर क्षेत्र में एआई आधारित शिक्षा और डिजिटल परिवर्तन की दिशा में नेहरू वर्ल्ड स्कूल आज अग्रणी संस्थानों में गिना जा रहा है। विद्यालय निरंतर नवाचार, वैश्विक सहयोग और तकनीक सम्मिलित शिक्षण के माध्यम से शिक्षा को 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने की दिशा में कार्य कर रहा है। यहां छात्रों को केवल अकादमिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि भविष्य के कौशल, आलोचनात्मक सोच, समस्या समाधान और रचनात्मकता पर आधारित सीखने का वातावरण प्रदान किया जा रहा है।
वर्ष 1978 में स्थापित नेहरू वर्ल्ड स्कूल गाजियाबाद का एक प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान है, जो सीबीएसई तथा कैम्ब्रिज बोर्ड से संबद्ध है। विद्यालय अपनी अकादमिक उत्कृष्टता, वैश्विक दृष्टिकोण और छात्र-केंद्रित शिक्षण पद्धति के लिए लंबे समय से जाना जाता रहा है। नई वैश्विक मान्यता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय विद्यालय भी आधुनिक तकनीक और एआई आधारित शिक्षा के क्षेत्र में विश्व स्तर पर नेतृत्व करने की क्षमता रखते हैं। आने वाले समय में शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदलने वाला है और ऐसे में नेहरू वर्ल्ड स्कूल जैसे संस्थान भविष्य की शिक्षा प्रणाली की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। गूगल की यह पुन: मान्यता न केवल विद्यालय के लिए गौरव का विषय है, बल्कि भारतीय शिक्षा जगत के लिए भी एक प्रेरणादायक उपलब्धि मानी जा रही है।
















