-लोन दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले बीए पास दो शातिर गिरफ्तार
-400 लोगों से 90 लाख की ठगी की वारदात को दे चुके अंजाम
गाजियाबाद। साइबर सैल की टीम ने लोन दिलाने के नाम पर सैकड़ो लोगों के खातों पर डाका डालने वाले मास्टर माइंड समेत दो शातिरों को गिरफ्तार किया है। जो लोन दिलाने के नाम पर कैंसिल चैक को फ्रिक्शन पैन (मैजिक पैन) की मदद से भुुना लेते थे। चैक को पहले मैजिक पैन से कैसिंग कराते थे, फिर रबड या आग की मदद से उस इंक को साफ कर खातों से पैसा निकाल लेते थे। जो कि अब तक 400 से अधिक लोगों को अपना निशाना बनाते हुुए 80 से 90 लाख रूपए हड़प चुके है।
बुधवार को क्राइम ब्रांच ऑफिस पर एसपी क्राइम दीक्षा शर्मा ने घटना का खुलासा करते हुए बताया कि जनपद के विभिन्न थानों में लोनी के नाम पर ठगी की पांच शिकायतें आई थी। जिस पर साइबर सैल की टीम कार्रवाई कर रही थी। जांच में सामने आया कि यह ठगी 5 लोगों के साथ नही बल्कि 400 से अधिक लोगों के साथ विभिन्न जनपदों में हो चुकी है। साइबर सैल प्रभारी सुमित कुमार, एसआई अशोक कुमार की टीम ने बुधवार दोपहर राजनगर एक्सटेंशन से बीए पास सुनील शर्मा पुत्र वीरेन्द्र शर्मा निवासी साया गोल्ड शिप्रा इंदिरापुरम, बीए पास रजनीकांत शुक्ला पुत्र प्रमोद कुमार शुक्ला निवासी निवइया प्रयागराज को गिरफ्तार किया गया।
जिनकी निशानदेही पर 10 मोबाइल, 9 फर्जी आधार कार्ड, 32 चैक, तीन मैजिक पैन, लैपटॉप, कार, स्कूटी बरामद किया गया। एसपी क्राइम ने बताया कि आरोपी साथी के साथ मिलकर फर्जी आधार कार्ड बनाकर उससे फर्जी सिम लेते थे। लोन दिलाने के नाम पर प्रचार के लिए विजिटिंग कार्ड छपवाते थे। फिर उन विजिटिंग कार्ड को हजार-पांच सौ रूपए देकर लोगों से बटवाते थे। जब कोई लोन के लिए उन्हें फोन करता तो घर जाकर लोन से संबधित सभी दस्तावेज ले लेते थे। उन दस्तावेजों में बैंक की स्टेटमेंट भी होती थी। जिससे उन्हें पता चल जाता था कि बैंक में कितने रूपए रखे हुए है। बैंक में रूपए न होने पर लोन लेने के लिए बैंक में 1
लाख रूपए रखने की बात कहकर खाते में रूपए जमा करवा लेते थे। जिसके बाद आरोपित उनसे चैक को लेते थे और चैक को मैजिक पैन से कैसिंल कराते थे। फिर कैसिंग चैक की इंक को रबड व आग की लौ से मिटा देते थे। बाद में उक्त चैक को अपने नाम से भरकर खाते से रूपए निकाल लेते थे। रूपए निकालने से पहले अपने शिकार को गुमराह करने के लिए उनका दो से तीन घंटे मोबाइल बंद या फिर कॉल को फोन पर फारवर्ड करवा देते थे। जिससे उनके मोबाइल पर रूपए निकालने का मैसेज न पहुंच सकें। खाते से रूपए निकालने के बाद अपने फोन को फेंक देते थे। उसके बाद अगले शिकार की तैयारी के लिए नई आईडी और नए फोन सिमकार्ड के साथ ठगी का काम शुरू कर देते थे। उन्होंने बताया पकड़े गये आरोपियों ने दिल्ली, एनसीआर, मेरठ समेत विभिन्न राज्यों में ठगी की वारदात को अंजाम दिया है।
साइबर सैल प्रभारी सुमित कुमार ने बताया कि सुनील शर्मा वर्ष 2019 में सिविल लाइन मेरठ से पूर्व में जेल जा चुका है। जेल जाने से पूर्व उसका दुसरा गिरोह था, लेकिन जेल से छूटने के बाद आरोपी नया गैंग तैयार किया और फिर ठगी का कारोबार शुरू कर दिया। लोन के प्रचार-प्रसार के लिए विजिटिंग कार्ड को छपवाकर उसे लोगों में बटवाता था। नेट के माध्यम से अंजान लोगों का आधार कार्ड निकालकर फोटोशॉप की मदद से नाम-पता बदलकर उससे नई सिम कार्ड लेते थे। फिर फोन आने पर ठगी की वारदात को अंजाम देते थे। जनपद के विभिन्न थानों में आरोपियों के खिलाफ पांच मुकदमे दर्ज है। जब मामले की जांच की गई तो पता चला कि इन्होंने 400 से अधिक लोगों से 80 से 90 लाख रूपए की ठगी कर चुके है। गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तार के भी प्रयास किए जा रहे है।















