DME और EPE किनारे के 77 गांव जीडीए में होंगे शामिल, मधुबन-बापूधाम के किसानों को मिलेगा हक

18 मार्च को मेरठ में होगी जीडीए की 168वीं बोर्ड बैठक, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे (DME) और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे (EPE) के किनारे के 500-500 मीटर दायरे में आने वाले 77 गांवों को जीडीए क्षेत्र में शामिल करने की कवायद शुरू हो गई है। इसके साथ ही मधुबन-बापूधाम योजना के तहत प्रभावित किसानों को 15 साल बाद भूखंड देने की तैयारी भी पूरी हो चुकी है। इन दोनों अहम प्रस्तावों को 18 मार्च को मेरठ में मंडलायुक्त की अध्यक्षता में होने वाली 168वीं जीडीए बोर्ड बैठक में रखा जाएगा। बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पारित होने के बाद किसानों को उनके भूखंडों का आवंटन किया जाएगा और गांवों के विकास कार्यों की नींव रखी जाएगी। जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स ने बताया कि प्रस्ताव को लेकर पूरी तैयारी कर ली गई है। बोर्ड बैठक में इसे स्वीकृति मिलने की पूरी संभावना है।

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। गाजियाबाद के विकास को नई दिशा देने के लिए गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर ली है। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे (DME) और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे (EPE) के किनारे के 500-500 मीटर दायरे में आने वाले 77 गांवों को जीडीए क्षेत्र में शामिल करने की कवायद शुरू हो गई है। इसके साथ ही मधुबन-बापूधाम योजना के तहत प्रभावित किसानों को 15 साल बाद भूखंड देने की तैयारी भी पूरी हो चुकी है। इन दोनों अहम प्रस्तावों को 18 मार्च को मेरठ में मंडलायुक्त की अध्यक्षता में होने वाली 168वीं जीडीए बोर्ड बैठक में रखा जाएगा। बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पारित होने के बाद किसानों को उनके भूखंडों का आवंटन किया जाएगा और गांवों के विकास कार्यों की नींव रखी जाएगी। जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स ने बताया कि प्रस्ताव को लेकर पूरी तैयारी कर ली गई है। बोर्ड बैठक में इसे स्वीकृति मिलने की पूरी संभावना है। इससे गाजियाबाद और आसपास के क्षेत्रों के विकास को नई गति मिलेगी। 18 मार्च की जीडीए बोर्ड बैठक से गाजियाबाद के विकास को नई रफ्तार मिलने की पूरी उम्मीद है। इस बैठक में लिए गए फैसले गाजियाबाद के इतिहास में मील का पत्थर साबित हो सकते हैं। गाजियाबाद के किसानों ने लंबे समय से अपने हक की लड़ाई लड़ी है। अब जीडीए की इस योजना से उनका सपना पूरा होने की उम्मीद है।

500 मीटर क्षेत्र में 77 गांव होंगे जीडीए में शामिल
जीडीए ने दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे के किनारे के 77 गांवों को अपने दायरे में शामिल करने के लिए प्रस्ताव तैयार किया है। इन गांवों की सूची पहले भी एनसीआर प्लानिंग बोर्ड ने तैयार की थी, लेकिन इसे लागू नहीं किया जा सका था।
• ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे के किनारे 51 गांव और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे के किनारे 26 गांव आते हैं।
•  इन गांवों में अवैध और अनियोजित निर्माण कार्य तेजी से हो रहे हैं, जिससे इलाके के समुचित विकास में रुकावट आ रही है।
•  जीडीए इन गांवों को अपने दायरे में लेकर सुनियोजित तरीके से विकास कार्य शुरू करेगा।
•  इन गांवों को जीडीए क्षेत्र में शामिल करने के प्रस्ताव को बोर्ड बैठक में मंजूरी मिलने के बाद इसे फिर से एनसीआर प्लानिंग बोर्ड को भेजा जाएगा।
•  एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद इस प्रस्ताव को शासन के पास भेजा जाएगा, जहां से अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद गांवों के विकास कार्य शुरू होंगे।

मधुबन-बापूधाम योजना के किसानों को मिलेगा भूखंड
मधुबन-बापूधाम योजना से प्रभावित किसानों को 15 साल के लंबे इंतजार के बाद अब भूखंड मिलने का रास्ता साफ हो गया है। वर्ष 2004 में जीडीए ने छह गांवों की 1,234 एकड़ जमीन पर मधुबन-बापूधाम योजना लॉन्च की थी।
•  इस योजना के तहत पहले 800 एकड़ जमीन का अधिग्रहण कर लिया गया था।
•  बाद में 153 एकड़ जमीन और अधिग्रहित कर इसे भी विकसित किया गया।
•   शेष बची 281 एकड़ जमीन से जुड़े किसान सुप्रीम कोर्ट चले गए।
•   नवंबर 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने किसानों की याचिका पर फैसला देते हुए नए भूमि-अधिग्रहण एक्ट के तहत मुआवजा देने के आदेश दिए।
•   इसके बाद जीडीए ने 281 एकड़ जमीन के किसानों को मुआवजा देकर जमीन का अधिग्रहण किया।
•   अब 800 एकड़ जमीन वाले किसानों ने भी नए भूमि-अधिग्रहण कानून के तहत बढ़े मुआवजे और भूखंड की मांग की है।

भूखंड वितरण की योजना:
•    800 एकड़ जमीन के किसानों को योजना के तहत 6% विकसित जमीन दी जाएगी।
•    281 एकड़ जमीन के किसानों को 10% विकसित जमीन दी जाएगी।
•    112 भूखंड पहले ही किसानों को आवंटित किए जा चुके हैं, लेकिन अभी 600 से अधिक किसानों को भूखंड मिलना बाकी है।
•    जीडीए ने 10 प्रतिशत जमीन वाले किसानों का नोटिस जारी कर उनकी सहमति ले ली है।
•    बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पारित होने के बाद भूखंडों का आवंटन शुरू हो जाएगा।

तुलसी निकेतन में बहुमंजिला इमारत बनाने का प्रस्ताव
इसके अलावा जीडीए की बोर्ड बैठक में तुलसी निकेतन योजना के तहत मकानों को तोड़कर प्राइवेट-पब्लिक पार्टनरशिप (PPP) के तहत बहुमंजिला इमारत बनाने का प्रस्ताव भी रखा जाएगा। इससे क्षेत्र में आधुनिक सुविधाओं से युक्त रिहायशी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

गाजियाबाद के विकास को मिलेगी नई दिशा
गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की इस पहल से न सिर्फ दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे के किनारे के गांवों का विकास होगा, बल्कि मधुबन-बापूधाम योजना के किसानों को भी उनका हक मिलेगा।

प्रमुख बिंदु:
•  77 गांव जीडीए सीमा में होंगे शामिल
•   मधुबन-बापूधाम योजना के किसानों को मिलेगा भूखंड
•   तुलसी निकेतन में बहुमंजिला इमारत बनाने का प्रस्ताव

अतुल वत्स
जीडीए उपाध्यक्ष

गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) के उपाध्यक्ष अतुल वत्स ने कहा, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे के किनारे 500-500 मीटर के दायरे में आने वाले 77 गांवों को जीडीए में शामिल करने के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस प्रस्ताव को आगामी 18 मार्च को बोर्ड बैठक में रखा जाएगा। इसके अलावा मधुबन-बापूधाम योजना के किसानों को भूखंड आवंटित करने की तैयारी पूरी हो चुकी है। बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पारित होने के बाद भूखंडों का आवंटन शुरू कर दिया जाएगा। जीडीए का लक्ष्य है कि गाजियाबाद के विकास को नई दिशा दी जाए और किसानों को उनका हक दिलाया जाए। बोर्ड बैठक के लिए एजेंडा तैयार कर लिया गया है। कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को बैठक में स्वीकृति मिलने की संभावना है। इन प्रस्तावों के लागू होने से गाजियाबाद का विकास एक नई ऊंचाई पर पहुंचेगा।