ग्रेटर नोएडा में 5,881 करोड़ रुपये का मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स हब बनेगा

• दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारे के तहत क्षेत्र को लॉजिस्टिक्स और विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बनाने की योजना
• रेल, सड़क और हवाई मार्गों से उद्योगों को तेज और निर्बाध माल परिवहन की सुविधा
• तीन चरणों में क्रियान्वयन: कंटेनर और गैर-कंटेनरीकृत माल का उच्च क्षमता संचालन
• 14.89 हेक्टेयर भूमि भविष्य के विस्तार और दीर्घकालिक विकास के लिए सुरक्षित
• जेवर हवाई अड्डे और डीएमआईसी नेटवर्क से समय, लागत और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में लाभ

उदय भूमि संवाददाता
ग्रेटर नोएडा। दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारा एकीकृत औद्योगिक नगर (डीएमआईसी आईआईटीजीएनएल) ने ग्रेटर नोएडा में एक अत्याधुनिक मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स हब (एमएमएलएच) विकसित करने के लिए वैश्विक निविदा जारी की है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 5,881 करोड़ रुपये है और इसे 311 हेक्टेयर भूमि पर विकसित किया जाएगा।
अधिकारियों ने बताया कि यह परियोजना दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारे के तहत एक प्रमुख कदम है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय माल ढुलाई का केंद्रीय केंद्र बनाना है। यह परियोजना नोएडा और ग्रेटर नोएडा के उद्योगों को उच्च गति वाले माल ढुलाई मार्गों और निर्यात चैनलों से जोड़ेगी। डीएमआईसी आईआईटीजीएनएल एक विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी) है, जिसे राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास एवं कार्यान्वयन ट्रस्ट और उत्तर प्रदेश सरकार ने संयुक्त रूप से स्थापित किया है। ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (जीएनआईडीए) इसका प्रतिनिधित्व करेगा। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एन.जी. रवि कुमार ने कहा कि यह परियोजना न केवल क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगी, बल्कि ग्रेटर नोएडा को लॉजिस्टिक्स और विनिर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने में मदद करेगी। इससे स्थानीय उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता और आपूर्ति श्रृंखला दक्षता में सुधार होगा।

रणनीतिक स्थान और कनेक्टिविटी के फायदे
– रेल और सड़क मार्ग से माल ढुलाई में आएगी क्रांतिकारी सुविधा

एमएमएलएच दादरी में पूर्वी और पश्चिमी समर्पित माल ढुलाई गलियारों (डीएफसी) के जंक्शन के पास विकसित होगा। यह स्थान परियोजना को एक विशिष्ट रणनीतिक लाभ प्रदान करता है क्योंकि डीएफसी से सीधी रेल कनेक्टिविटी घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय माल के कुशल संचालन में मदद करेगी। परियोजना दिल्ली-हावड़ा ब्रॉड-गेज रेलवे लाइन और राष्ट्रीय राजमार्ग-91 के पास स्थित होगी। रेलवे साइडिंग और लंबी दूरी के ट्रैक के निर्माण के लिए अतिरिक्त भूमि आवंटित की गई है, जिससे हब और माल ढुलाई गलियारों के बीच सीधा माल परिवहन संभव होगा। अधिकारियों ने बताया कि एमएमएलएच को एक विश्वस्तरीय माल संचालन परिसर के रूप में डिजाइन किया गया है। इसमें कंटेनरीकृत और गैर-कंटेनरीकृत माल हैंडलिंग, बड़े पैमाने पर गोदाम, शीत भंडारण, बैंकिंग, बीमा, शिपिंग, बुनियादी असेंबली और पैकेजिंग जैसी सेवाओं को एकीकृत किया जाएगा।

तीन चरणों में कार्यान्वयन और निवेश योजना
– पहले चरण में सालाना 0.74 मिलियन टीईयू कंटेनरयुक्त माल की क्षमता

परियोजना सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के माध्यम से डिज़ाइन, निर्माण, संचालन और हस्तांतरण (डीबीएफओटी) के आधार पर विकसित की जाएगी। इसे तीन चरणों में लागू किया जाएगा:
-पहला चरण: 0.74 मिलियन टीईयू कंटेनरयुक्त कार्गो और 6.7 मिलियन टन गैर-कंटेनरीकृत माल का संचालन। 30 लाख वर्ग फुट भंडारण और 0.3 मिलियन वर्ग फुट शीत भंडारण का निर्माण। निवेश: 2,374 करोड़ रुपये।
-दूसरा चरण: पहले चरण की 80 प्रतिशत क्षमता या पांचवें वर्ष के बाद। निवेश: 1,412 करोड़ रुपये।
-तीसरा चरण: दसवें वर्ष या 80 प्रतिशत क्षमता उपयोग होने पर। निवेश: 2,095 करोड़ रुपये।
चयनित निजी रियायतग्राही हब के वित्तपोषण, निर्माण, संचालन और रखरखाव के लिए जिम्मेदार होगा। परियोजना में कंटेनर फ्रेट स्टेशन (सीएफएस), ट्रैक-साइड गोदाम, बॉन्डेड भंडारण क्षेत्र और कंटेनर मरम्मत कार्यशालाओं का विकास भी शामिल है।

भविष्य का विस्तार और दीर्घकालिक योजना
– 14.89 हेक्टेयर भूमि भविष्य के लिए आरक्षित

परियोजना के मास्टर प्लान में दीर्घकालिक विकास का ध्यान रखा गया है। लॉजिस्टिक्स ज़ोन के पश्चिमी हिस्से में लगभग 14.89 हेक्टेयर भूमि भविष्य के विस्तार के लिए छोड़ दी गई है। रेल पटरियों के नीचे अंडरपास की योजना बनाई गई है और लंबी दूरी की मालगाडिय़ों के लिए रेल यार्ड का बाद में विस्तार किया जाएगा। इस परियोजना का राजस्व मॉडल निजी भागीदार और डीएमआईसी आईआईटीजीएनएल के बीच राजस्व साझा करने पर आधारित होगा। निजी रियायतग्राही लॉजिस्टिक्स और गोदाम सेवाओं के लिए उपयोगकर्ता शुल्क वसूल करेगा और इसका एक हिस्सा प्राधिकरण के साथ साझा किया जाएगा।

राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कनेक्टिविटी से उद्योगों को मिलेगा लाभ
– जेवर हवाई अड्डे के पास होने से माल का निर्बाध परिवहन संभव
अधिकारियों ने बताया कि यह लॉजिस्टिक्स हब समर्पित माल गलियारों और नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए फीडर हब के रूप में कार्य करेगा। यह रेल, सड़क और हवाई माल परिवहन प्रणाली को जोड़कर माल की कुशल आवाजाही सुनिश्चित करेगा। जेवर हवाई अड्डे की निकटता से माल का निर्बाध परिवहन संभव होगा। इससे माल ढुलाई का समय कम होगा और निर्यातोन्मुखी उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। परियोजना ग्रेटर नोएडा को दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारे में एक केंद्रीय लॉजिस्टिक्स और विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने की योजना का हिस्सा है।

एन.जी. रवि कुमार
मुख्य कार्यकारी अधिकारी
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण

यह परियोजना न केवल ग्रेटर नोएडा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के औद्योगिक और आर्थिक परिदृश्य को बदलने वाली है, बल्कि इसे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय माल ढुलाई का एक प्रमुख केंद्र भी बनाएगी। इस हब से उद्योगों को तेज, कुशल और लागत-कुशल माल परिवहन की सुविधा मिलेगी, जिससे आपूर्ति श्रृंखला में सुधार होगा और क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी। हमारा लक्ष्य है कि यह लॉजिस्टिक्स हब आधुनिकतम सुविधाओं से लैस हो और मल्टी-मॉडल परिवहन प्रणाली के माध्यम से रेल, सड़क और हवाई माल वाहनों को जोड़कर उद्योगों को निर्बाध सेवाएं प्रदान करे। इस परियोजना से न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि निर्यातोन्मुखी उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा। ग्रेटर नोएडा को दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारे में एक केंद्रीय लॉजिस्टिक्स और विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना हमारी प्राथमिकता है।
एन.जी. रवि कुमार
मुख्य कार्यकारी अधिकारी
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण