• महापौर सुनीता दयाल और नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने किया औचक निरीक्षण
• व्यवस्थाओं की तारीफ, आत्मनिर्भर गौशाला का विजन हुआ मजबूत
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। नगर निगम गाजियाबाद द्वारा संचालित नंदी पार्क गौशाला अब सिर्फ निराश्रित गोवंशों के लिए आश्रय स्थल नहीं रही, बल्कि यह आत्मनिर्भरता, स्वच्छता और नवाचार की प्रेरणास्रोत बनती जा रही है। गुरुवार को महापौर सुनीता दयाल और नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने संयुक्त रूप से गौशाला का औचक निरीक्षण किया और वहां की व्यवस्थाओं का गहन अवलोकन किया। निरीक्षण के दौरान साफ-सफाई, चारे-पानी की गुणवत्ता और सेवा-संस्कार की भावना से प्रशासनिक टीम संतुष्ट नजर आई। निरीक्षण के दौरान महापौर और नगर आयुक्त ने गोवंशों को हरा चारा और गुड़ खिलाकर सेवा भाव का परिचय दिया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में गौशाला में 956 नंदी और 929 गायें रह रही हैं, जिनके लिए 19 शेड्स बनाए गए हैं।
शेड्स की साफ-सफाई से लेकर खोरों में नियमित सफाई का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। इसके लिए 63 कर्मचारियों की नियमित तैनाती है, जो दिन-रात सेवा में लगे हैं। महापौर ने निरीक्षण के बाद कहा कि गौवंशों के लिए स्वच्छ पानी, हरा चारा, भूसा, चिकित्सा सुविधा और आश्रय, सभी पहलुओं पर नगर निगम की टीम सतत कार्य कर रही है। इसके साथ ही महिला स्वच्छता कार्यकर्ताओं की भूमिका भी उल्लेखनीय है जो पूरे परिसर को साफ-सुथरा बनाए रखने में लगी हैं।
आत्मनिर्भर गौशाला का निर्माण – नवाचार और योजनाओं की झलक
नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने निरीक्षण के दौरान बताया कि नगर निगम गौशाला को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कई नवाचारी प्रयास कर रहा है। गौशाला में अब गोबर से उपले, वर्मी कंपोस्ट, गोमय लकड़ी, सजावटी गमले, मूर्तियां और अन्य उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इन उत्पादों को बाजार में बेचकर गौशाला की आय में वृद्धि की योजना बनाई जा रही है। नगर आयुक्त ने बताया कि भविष्य में गोबर से पेंट बनाने और जैविक खेती के लिए उपयोगी उत्पाद तैयार करने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं। यह पहल न केवल गौशाला को आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि गोबर जैसी जैविक संपदा के व्यापक उपयोग की मिसाल भी बनेगी।
बढ़ती संख्या को देखते हुए तैयार हो रही नई संरचना
महापौर और नगर आयुक्त ने निरीक्षण के दौरान देखा कि निराश्रित गोवंशों की संख्या लगातार बढ़ रही है, इसलिए अतिरिक्त शेड्स के निर्माण हेतु तत्काल आदेश दिए गए हैं। निर्माण विभाग की टीम को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए कहा गया कि आने वाले समय में किसी भी गौवंश को खुले में नहीं रहना पड़े, इसकी पूरी तैयारी की जाए।
सेवा, समर्पण और संरक्षण का केंद्र बनेगा नंदी पार्क
इस मौके पर अपर नगर आयुक्त जंग बहादुर यादव, मुख्य पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डॉ. आशीष, उप मुख्य अधिकारी डॉ. अनुज कुमार सिंह सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने एक सुर में कहा कि यह गौशाला अब सिर्फ एक संरचना नहीं, बल्कि संवेदनशील प्रशासनिक सोच और समाज के प्रति जिम्मेदारी का परिचायक बन चुकी है। नगर निगम की यह पहल यह संदेश देती है कि संवेदनशीलता, समर्पण और सतत नवाचार के सहारे कोई भी योजना सफल और आत्मनिर्भर बन सकती है। नंदी पार्क गौशाला अब एक आदर्श गौशाला मॉडल के रूप में उभर रही है, जिसे पूरे प्रदेश में दोहराया जा सकता है।

















