- पुलिस की अनूठी पहल- मिठाई, उपहार और आत्मीयता से मनाया गया रोशनी का पर्व
- किसी और के जीवन में खुशियों का दीप जलाना ही सच्ची दीपावली है: उपासना पांडेय
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। दीयों की रौशनी, मिठास और खुशियों के इस पर्व दीपावली पर गाजियाबाद कमिश्नरेट पुलिस ने मानवीय संवेदना की ऐसी मिसाल पेश की जिसने सभी के दिलों को छू लिया। सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) नंदग्राम उपासना पांडेय ने दीपावली का यह शुभ दिन थाना सिहानी गेट क्षेत्र में निवासरत बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के साथ बिताया, और उनके बीच जाकर खुशियाँ, मिठास और मुस्कान बाँटी। पुलिस बल के साथ एसीपी उपासना पांडेय ने क्षेत्र में भ्रमण करते हुए बुज़ुर्गों और परिवारों के घर जाकर मिठाई, उपहार सामग्री और दीप वितरित किए। उन्होंने बच्चों के साथ दीप जलाए, महिलाओं से संवाद किया और क्षेत्रवासियों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। पूरा क्षेत्र उस समय भावनाओं से भर उठा जब बुज़ुर्गों ने पुलिस टीम को अपने बीच देख आशीर्वाद दिया।
दीपों की रौशनी के बीच बुज़ुर्गों के चेहरे की मुस्कान ने पर्व की चमक को और बढ़ा दिया। क्षेत्र के नागरिकों ने एसीपी उपासना पांडेय की इस संवेदनशील पहल की जमकर प्रशंसा की। लोगों ने कहा कि उनके इस कदम ने पुलिस और जनता के बीच की दूरी को कम किया है और यह साबित किया है कि पुलिस केवल वर्दी में सख्ती नहीं, बल्कि मानवता और ममता का प्रतीक भी है। महिलाओं और बच्चों ने पुलिस टीम के साथ सेल्फी लीं, वहीं बुजुर्गों ने उन्हें आशीर्वाद देते हुए कहा कि इस तरह की पहल से समाज में सकारात्मक ऊर्जा और अपनापन बढ़ता है।
एसीपी उपासना पांडेय ने लिया क्षेत्र का हालचाल, जताया अपनापन
एसीपी उपासना पांडेय ने इस अवसर पर क्षेत्र के नागरिकों से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने बुज़ुर्गों का हालचाल पूछा, उनकी कुशलता की जानकारी ली और कहा कि पुलिस केवल कानून का पालन कराने वाली संस्था नहीं, बल्कि समाज की सेवा और सुरक्षा के लिए समर्पित परिवार का हिस्सा है। उन्होंने विशेष रूप से क्षेत्र की महिलाओं से संवाद करते हुए सुरक्षा और आत्मनिर्भरता पर चर्चा की तथा उन्हें आश्वस्त किया कि गाजियाबाद पुलिस हर नागरिक की सुरक्षा और सम्मान के लिए चौबीसों घंटे तत्पर है।
किसी और के जीवन में रोशनी फैलाना ही सच्ची दीपावली है: एसीपी
त्योहार की खुशियों के बीच एसीपी उपासना पांडेय ने एक भावनात्मक संदेश देते हुए कहा कि दीपावली का अर्थ केवल अपने घर में दीप जलाना नहीं, बल्कि दूसरों के जीवन में भी उजाला फैलाना है। जब हम किसी जरूरतमंद के चेहरे पर मुस्कान लाते हैं, तब ही सच्ची दीपावली होती है। समाज में प्रेम, सहयोग और सेवा की भावना ही इस पर्व का असली सार है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे इस त्यौहार को सिर्फ दिखावे में नहीं, बल्कि सेवा और सहयोग की भावना से मनाएँ।
खुशियों के इस पर्व पर एक प्रेरणादायक संदेश
दीपावली के इस शुभ अवसर पर एसीपी उपासना पांडेय की यह पहल समाज के लिए एक प्रेरक उदाहरण बन गई। जब पूरा शहर दीयों से जगमगा रहा था, तब पुलिस ने यह साबित किया कि सबसे बड़ी रौशनी वह है जो किसी और के जीवन में उजाला भर दे। उनकी इस पहल ने गाजियाबाद पुलिस की संवेदनशील और जनहितकारी छवि को और मजबूत किया है। हम सबके जीवन में असली दीपावली तब होती है, जब हम किसी की मदद करें, किसी की आँखों में उम्मीद जगाएँ, और किसी की दुनिया को थोड़ा और रौशन बना दें। एसीपी उपासना पांडेय की यह पहल पुलिस केवल सुरक्षा की नहीं, बल्कि संवेदना की भी प्रहरी है।

एसीपी नंदग्राम
दीपावली केवल रोशनी का पर्व नहीं, बल्कि यह मानवता, सहयोग और संवेदना का प्रतीक है। हमारे समाज में ऐसे अनेक लोग हैं जिनके जीवन में थोड़ी-सी मुस्कान और अपनापन लाने की ज़रूरत होती है। अगर हम किसी जरूरतमंद के चेहरे पर ख़ुशी ला सकें, तो वही हमारी सबसे बड़ी पूजा और सबसे सच्ची दीपावली है। पुलिस केवल कानून-व्यवस्था की संरक्षक नहीं, बल्कि समाज की सेवा करने वाली एक संवेदनशील संस्था है। हमारी वर्दी का अर्थ सिर्फ अनुशासन नहीं, बल्कि हर नागरिक के प्रति करुणा और कर्तव्यनिष्ठा भी है। दीपावली का यह पर्व हमें सिखाता है कि जैसे एक दीप अनेक दीपों को जलाकर अंधकार मिटा देता है, वैसे ही हम सबको भी दूसरों के जीवन में उजियारा फैलाना चाहिए।
उपासना पांडेय
एसीपी नंदग्राम

















