-हाउस टैक्स में हेराफेरी, इंटरनल ऑडिट में पकड़ा गया मामला
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। नगर निगम के हाउस टैक्स विभाग में हेराफेरी का एक ऐसा मामला पकड़ में आया है जिससे वरिष्ठ अधिकारी भी सन्न हैं। मामला नगर निगम के कविनगर जोन से जुड़ा हुआ है। कविनगर जोन के हाउस टैक्स विभाग में तैनात कर्मचारियों और अधिकारियों ने हाउस टैक्स के मद में भवन स्वामी से वसूल की गई रकम सरकारी खजाने में जमा करने के बजाय अपनी पॉकेट में रख लिया। नगर निगम की इंटरनल ऑडिट में यह मामला पकड़ में आया है। टैक्स विभाग की इस हेराफेरी के लिए कविनगर जोन में तैनात टैक्स इंस्पेक्टर अनिल, रेवेन्यू इंस्पेक्टर और टैक्स सुपरिटेंडेंट आशुतोष को कसूरवार माना जा रहा है। इस मामले में कार्रवाई से बचने के लिए मामले को रफा-दफा करने की कोशिशें भी की जा रही है। लेकिन मामला सरकारी खजाने से जुड़ा हुआ है ऐसे में आरोपियों का बचना मुश्किल है। कवि नगर जोन पूर्व में भी विवादों में रहा है। जोनल प्रभारी राजवीर सिंह का विवादों से पुराना नाता है। राजवीर सिंह पर आरोपियों को बचाने का आरोप लग रहा है।
ज्ञात हो कि शाहपुर बम्हैटा निवासी प्रमोद कुमार अपने परिवार के साथ रहते है। हाउस टैक्स वसूली को लेकर नगर आयुक्त द्वारा अधिकारियों के पेंच कसने के बाद हाउस टैक्स वसूली को लेकर अभियान चलाया गया। प्रमोद कुमार पर नगर निगम टैक्स विभाग का 1 लाख 16 हजार 616 रुपये बकाया चल रहा था। 28 जनवरी 2024 को प्रमोद कुमार ने कविनगर जोनल कार्यालय पहुंच कर अपने बकाए टैक्स में से 75 हजार 500 रुपये जमा कराए। जिसकी उन्हें बकायदा रसीद भी दी गई। जिसके बाद से प्रमोद कुमार पर निगम का 37 हजार 247 रुपये बकाया रह गए। करीब 6 माह बीत जाने के बाद भी निगम अधिकारियों ने प्रमोद कुमार द्वारा वसूल गई रकम को सरकारी खाते में जमा नहीं किया। जब ऑडिट में इसकी जांच की गई तो पता चला कि प्रमोद कुमार द्वारा जोनल कार्यालय में रुपये जमा किए गए थे। मगर अभी तक सरकारी खाते में वह रुपये नहीं आए। अब अधिकारी और कर्मचारी एक-दुसरे को रुपये देने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। इस हेराफेरी का खुलासा होने के बाद से कविनगर जोन में तैनात टैक्स इंस्पेक्टर और टैक्स सुपरिटेंडेंट के अलावा जोनल प्रभारी पर भी उंगली उठनी शुरू हो गई है। अगर इस तरह से ही टैक्स वसूली का पैसा अधिकारी एवं कर्मचारी मिलकर अपनी जेब भरते रहे तो निगम का खजाना भरने की जगह खाली तो होगा ही, साथ ही करदाताओं के खून पसीने की कमाई को भी डकारते रहेंगे।
















