17 फरवरी से 27 फरवरी तक होगा शराब की दुकानों का आवेदन शुरू, ई-लॉटरी से होगा दुकानों का व्यवस्थापन

-नए नियमों के तहत पारदर्शी प्रक्रिया, ज्यादा से ज्यादा आवेदनों पर जोर
-गाजियाबाद में आबकारी विभाग की बड़ी पहल, राजस्व बढ़ाने के लिए ई-लॉटरी प्रक्रिया तेज

•  ई-लॉटरी से लाइसेंस आवंटन में पारदर्शिता
•  24 घंटे कंट्रोल रूम सक्रिय, हेल्पलाइन नंबर जारी
•  6 मार्च को पहला ई-लॉटरी चरण
•  अवैध शराब की सूचना देने वाले का नाम गोपनीय
•   ज्यादा आवेदन लाने के लिए विभागीय प्रयास तेज

उदय भूमि
गाजियाबाद। जिले में आबकारी विभाग की नई नीति के तहत शराब की दुकानों के लाइसेंस आवंटन के लिए ई-लॉटरी प्रक्रिया को गति दे दी गई है। जिला आबकारी अधिकारी संजय कुमार प्रथम के नेतृत्व में इस बार विभाग ने पारदर्शिता और अधिकतम राजस्व संग्रह के लिए नए प्रावधान लागू किए हैं। पूर्व की तरह इस बार भी आबकारी विभाग ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य कर दिया है, जिससे केवल पंजीकृत आवेदक ही शराब की दुकान के लिए आवेदन कर सकेंगे। विभाग का लक्ष्य अधिक से अधिक आवेदन प्राप्त करना है, जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और दुकानों की ई लॉटरी होने से राजस्व में वृद्धि होगी। गाजियाबाद में यह पहल न केवल नियमित राजस्व संग्रह को बढ़ावा देगी बल्कि अवैध शराब पर लगाम लगाने में भी मददगार साबित होगी।

24 घंटे सक्रिय रहेगा कंट्रोल रूम
शहर में पहली बार 24 घंटे सक्रिय कंट्रोल रूम बनाया गया है, जहां तीन शिफ्टों में अधिकारी एवं कर्मचारी तैनात रहेंगे। कंट्रोल रूम से शराब की दुकानों के आवेदन, रजिस्ट्रेशन, लाइसेंसिंग और अवैध शराब की शिकायतों से जुड़ी सभी जानकारियां दी जाएंगी। इसके लिए हेल्पलाइन नंबर 7065011003 जारी किया गया है।

अवैध शराब पर कसेगा शिकंजा
राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ अवैध शराब की बिक्री पर रोक लगाने के लिए सख्त अभियान चलाया जाएगा। कोई भी व्यक्ति अपने क्षेत्र में अवैध शराब की सूचना गुप्त रूप से विभाग को दे सकता है, जिस पर तत्काल कार्रवाई होगी।

6 मार्च को होगा ई-लॉटरी का पहला चरण
ई-लॉटरी की प्रक्रिया के तहत 17 फरवरी से 27 फरवरी तक आवेदन स्वीकार किए जाएंगे, जिसके बाद 6 मार्च को सुबह 11 बजे ई-लॉटरी का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए आबकारी निरीक्षक राकेश कुमार त्रिपाठी और आलोक कुमार सिंह को पर्यवेक्षणीय अधिकारी नियुक्त किया गया है।

शराब की दुकानों के व्यवस्थापन में पारदर्शिता
नई आबकारी नीति के तहत शराब की दुकानों के सही व्यवस्थापन और राजस्व वृद्धि को सुनिश्चित करने के लिए आबकारी विभाग ने दिन-रात मेहनत कर बड़ा लक्ष्य हासिल करने का प्रयास कर रही है। करीब 10 दिनों से आबकारी निरीक्षकों की टीम लगातार काम कर रही थी, ताकि ई-लॉटरी प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा किया जा सके।

चुनौतियों के बावजूद सफलता
कम समय में यह बड़ा कार्य करना विभाग के लिए किसी चुनौती से कम नहीं था। एक तरफ शराब की दुकानों पर ओवर रेटिंग को रोकना, दूसरी ओर अवैध शराब के कारोबार पर शिकंजा कसना, और फिर नई आबकारी नीति के तहत दुकानों की ई-लॉटरी को व्यवस्थित तरीके से लागू करना- ये सभी कार्य एक साथ करना विभाग के लिए बेहद कठिन था। ई-लॉटरी प्रक्रिया के तहत शराब की दुकानों का विवरण और राजस्व प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती थी, जिसमें आबकारी विभाग ने सफलता प्राप्त कर ली है। आबकारी निरीक्षकों की टीम लगातार फील्ड में रही और हर पहलू पर बारीकी से काम किया। आबकारी विभाग की इस कार्यशैली से यह स्पष्ट है कि सरकार की नीति के अनुसार अवैध शराब के कारोबार को खत्म कर और पारदर्शी व्यवस्था लागू कर, राजस्व वृद्धि को प्राथमिकता दी जा रही है। विभाग की सख्ती के चलते इस बार अवैध शराब बेचने वालों को भारी नुकसान हुआ है।

सरकार की नीति को सफल बनाने का प्रयास
जिला आबकारी अधिकारी संजय कुमार प्रथम ने सभी आबकारी निरीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि अधिक से अधिक आवेदकों को प्रक्रिया में शामिल किया जाए, जिससे सरकार का राजस्व बढ़े और विभाग की कार्यप्रणाली को मजबूत किया जा सके। विभाग की यह नई नीति जिले में शराब व्यवसाय को पारदर्शी और नियंत्रित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।


संजय कुमार प्रथम
जिला आबकारी अधिकारी

उन्होंने कहा कि हमारी प्राथमिकता पारदर्शिता और अधिकतम राजस्व संग्रह है। ई-लॉटरी से लाइसेंसिंग प्रक्रिया निष्पक्ष होगी, जिससे गाजियाबाद में शराब व्यापार को संगठित और नियंत्रित किया जा सकेगा। साथ ही, अवैध शराब पर पूरी तरह से शिकंजा कसने के लिए विभाग सतर्क रहेगा। हमारी पूरी टीम ने पारदर्शिता और सुचारु व्यवस्था के लिए दिन-रात काम किया है। हमारी प्राथमिकता ई-लॉटरी को बिना किसी बाधा के पूरा करना और अवैध शराब के कारोबार पर लगाम कसना है।