-स्वास्थ विभाग में फैले भ्रष्टाचार की खुली पोल, कुएं से भी गहरा है तेल का काला खेल
-एक अधिकारी और पेट्रोल पंप संचालक के बीच बातचीत का ऑडियो हुआ लीक
-पेट्रोल पंप से सफाई इंस्पेक्टर को चाहिए एक महीने में 8 लाख, बाकी लोगों का अलग से है हिस्सा
उदय भूमि ब्यूरो
गाजियाबाद। नगर निगम गाजियाबाद में भ्रष्टाचार के एक बड़े खेल की पोल खुली है। करोड़ों रुपये के तेल के काले खेल में भ्रष्टाचार की गहराई कुएं से भी अधिक है। इस खेल का खुलासा तब हुआ जब नगर निगम के एक अधिकारी और पेट्रोल पंप मालिक के बीच बातचीत का ऑडियो लीक हो गया। लीक ऑडियो में अधिकारियों को दिए जाने वाली रिश्वत का पूरा ब्यौरा है। भ्रष्टाचार के इस खेल में हिसाब किताब को लेकर पूरी ईमानदारी बरती जा रही है। पेट्रोल पंप मालिक से लेकर अधिकारी तक रिश्वत की इस काली कमाई का पूरा हिसाब-किताब अपने पास रखते हैं और जरूरत पड़ने पर इस गोपनीय बही खाते का दोनों पक्ष मिलान भी कराते हैं। लीक ऑडियो में इस बात का पूरा जिक्र है। पेट्रोल पंप मालिक और अधिकारी यह कहते हैं कि चलो बैठकर डायरी में हिसाब-किताब मिला लेंगे और जो भी नीचे-ऊपर होगा, उसे बैठकर सुलझा लेंगे।
नगर निगम का स्वास्थ विभाग भ्रष्टाचार को लेकर लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर आरोप लगते रहे हैं। लेकिन भ्रष्टाचार का जो ताजा मामला उजागार हुआ है, उससे नगर निगम के अन्य विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी हतप्रभ हैं। दरअसल नगर निगम के अधिकारी और पेट्रोल पंप मालिक के बीच बातचीत का जो आॅडियो लीक हुआ है, उसने नगर निगम को हिला दिया है। ऑडियो में स्वास्थ विभाग के एक इंस्पेक्टर को काली कमाई में मिलने वाले हिस्से को लेकर बातचीत दर्ज है। बातचीत में इंस्पेक्टर द्वारा अधिक पैसे मांगने और बिना पैसे दिए फाइल पर साइन नहीं करने का जिक्र है। इंस्पेक्टर द्वारा जहां तेल के खेल में अधिक रेट मांगा जा रहा है, वहीं पेट्रोल पंप मालिक द्वारा कहा जा रहा है कि जिस रेट से अन्य पेट्रोल पंप में हिस्सा मिलता है, उसी रेट से वह देगा। वाक्या नगर निगम के सिटी हिंडन क्षेत्र के एक जोन से जुड़ा हुआ है। इस जोन में पहले कविनगर क्षेत्र स्थित एक पेट्रोल पंप से तेल लिया जाता था। लेकिन कुछ महीने पहले इस पेट्रोल पंप से हटाकर दूसरे पेट्रोल पंप पर वाहनों को शिफ्ट कर दिया गया है। लीक ऑडियो के मुताबिक एक पेट्रोल पंप से इंस्पेक्टर को प्रतिमाह 5 से 6 लाख रुपये मिलते थे। इंस्पेक्टर के अलावा अन्य अधिकारियों के अलग-अलग रेट तय हैं। बाकी सबका तो ठीक है, लेकिन अब इंस्पेक्टर द्वारा एक पेट्रोल पंप से प्रतिमाह 8 लाख रुपये की मांग की जा रही है। कहा जा रहा है कि जब तक 8 लाख रुपये नहीं मिलेंगे तब तक फाइल पर साइन नहीं होगा। पेट्रोल पंप मालिक द्वारा यह भी कहा जा रहा है कि पहले फाइल साइन करवा दो। एकाउंट से पैसा मिलते ही बकाया रकम का भुगतान कर दिया जाएगा। सोचने की बात यह है कि जब एक सफाई इंस्पेक्टर द्वारा एक जोन के बदले 8 लाख रुपये मांगे जा रहे हैं और इंस्पेक्टर के अलावा विभाग के अन्य बाबुओं और अधिकारियों का अलग से रेट तय है। ऐसे में तेल के खेल के इस भ्रष्टाचारी कुएं की गहराई कितनी है।
लीक ऑडियो में हुई है यह बात
उदय भूमि के भरोसेमंद सूत्र ने इस शर्त के साथ ऑडियो साझा किया कि हम ऑडियो किसी और से साझा नहीं करेंगे और फोन पर बातचीत करने वाले अधिकारी एवं पेट्रोल पंप मालिक का नाम नहीं जाहिर करेंगे। उदय भूमि का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को टारगेट करना नहीं बल्कि भ्रष्ट सिस्टम को सुधारने का प्रयास करना है। ऐसे में सूत्र के आग्रह का सम्मान करते हुए हम बातचीत के अंश में नाम का उल्लेख नहीं करेंगे। पेश है बातचीत के मुख्य अंश :
अधिकारी: हेलो।
पंप मालिक: नमस्कार।
अधिकारी: नमस्कार।
पंप मालिक: स्वास्थ्य कैसा है ?
अधिकारी: अभी ठीक नहीं है।
पंप मालिक: आप गैरेज में हो क्या ?
अधिकारी: नहीं अभी नहीं हूं।
पंप मालिक: देखो इंस्पेक्टर साहब ने वह फाइल नहीं की उनके पास ही थी, उन्होंने वापसी कर दी।
अधिकारी: हूं।
पंप मालिक: साहब ने तो बिल्कुल गांठ बांध रखी है और जिद कर बैठे हैं।
अधिकारी: देखते हैं।
पंप मालिक: 1 महीने का हिसाब तो 5 लाख ही बैठता है, उसमें क्या हिसाब है, मैंने ………. से बोला है कि चेक करो इनका कितना बनता है।
अधिकारी: हिसाब देखो।
पंप मालिक: अभी तक हिसाब नहीं किया फाइल रोकने से क्या होगा ?
अधिकारी: थोड़े दे दो ना।
पंप मालिक: मैंने ढाई लाख दे दिया और बाकी पेमेंट होने पर देने की बात कही। मंगलवार को पेमेंट होगा तो दे दूंगा।
अधिकारी: हूं।
पंप मालिक: इनका महीने का 5 से 6 लाख का हिसाब बनता है। ……. जोन में कितना बनता था ?
अधिकारी: वही सात साढ़े सात।
पंप मालिक: बोल रहे हैं … …. जोन में आठ बनता था और आठ ही चलेगा।
अधिकारी: चलो देखते हैं।
पंप मालिक: चलो साहब जो मिस्टेक है उसको देख लेंगे बाद में फिलहाल फाइल करवा दो।
अधिकारी: चलो एक-दो दिन में देखते हैं।
पंप मालिक: महीने का 6 लाख का तो हिसाब है। साहब कह रहे हैं जब पैसे आएंगे तभी फाइल होगी। मैंने बोला जब पेमेंट होगा तभी सारा हिसाब कर लेंगे।
अधिकारी: ठीक है।
पंप मालिक: मैं कॉपी लेकर आऊंगा हिसाब मिला लेंगे।
नगरायुक्त ने चलाया है हंटर
विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए कुबेर साबित हो रहे इस तेल के खेल को समूल नष्ट करने की तैयारी
नगरायुक्त महेंद्र सिंह तंवर द्वारा की गई है। नगरायुक्त ने तेल का हिसाब मंगाया और खेल को रोकने के लिए पेंच कसने शुरू कर दिए हैं। नगरायुक्त ने ऐसी योजना बनाई है जिस पर अमल करके इस खेल पर लगाम लगाई जा सकती है। ट्रायल के रूप में इस योजना पर अमल किया गया और उसके उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। काम-काज को तकनीकी से जोड़ते हुए अब वाहनों को जीपीएस से पूरी तरह जोड़ दिया जाएगा। इससे नगर निगम को प्रत्येक महीने करोड़ों रुपये की बचत होगी और तेल का काला खेल भी रूक जाएगा।
एक महीने में बचाए लगभग 50 लाख
नगरायुक्त ने नगर निगम के वाहनों को जीपीएस से जोड़कर सिर्फ एक महीने में लगभग 50 लाख रुपये बचाए हैं। एक अप्रैल से सभी वाहनों में जीपीएस लागू किया जाएगा। ऐसे में संभावित रूप से नगर निगम को प्रत्येक महीने दो से ढ़ाई करोड़ रुपये तक की बचत होगी। गाजियाबाद नगर निगम के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि होगी। नगर स्वास्थ अधिकारी डॉ. मिथलेश कुमार ने बताया कि नगरायुक्त के निर्देशन में 30 गाड़ियों में जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम लगाकर एक महीने में लगभग 60 हजार लीटर डीजल की बचत की गई है। सख्ती जारी रहेगी।
















