गाजियाबाद में भिक्षावृत्ति रेस्क्यू अभियान, दो मासूमों को भीख की जंजीरों से दिलाई आज़ादी

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। जनपद गाजियाबाद में चल रहे बाल भिक्षावृत्ति उन्मूलन अभियान के तहत शनिवार को जिला प्रशासन और पुलिस ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। सड़क पर भीख मांगने को मजबूर दो मासूम बच्चों को संयुक्त टीम ने रेस्क्यू कर उनकी नई जिंदगी की राह तैयार कर दी। प्रशासन का कहना है कि अब इन बच्चों को सुरक्षित माहौल के साथ-साथ शिक्षा और पुनर्वास की सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। इस कार्रवाई को जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मांदड़ के आदेश और मुख्य विकास अधिकारी अभिनव गोपाल के निर्देशन में अंजाम दिया गया। जिला प्रोबेशन अधिकारी मनोज कुमार पुष्कर ने बताया कि जनपद में भिक्षावृत्ति के खात्मे के लिए लगातार मुहिम चलाई जा रही है। इसी क्रम में गठित संयुक्त टीम ने जिला बाल संरक्षण इकाई के संरक्षण अधिकारी जितेंद्र कुमार के नेतृत्व में शहर के अलग-अलग हिस्सों में अभियान चलाया। अभियान के दौरान दो बच्चे सड़क किनारे भीख मांगते हुए पाए गए।

टीम ने तुरंत उन्हें रेस्क्यू किया और सुरक्षित स्थान पर ले जाकर सीडब्ल्यूएस (चाइल्ड वेलफेयर सिस्टम) के समक्ष प्रस्तुत किया। वहां दोनों बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया और उन्हें आवश्यक चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध कराई गई। इसके बाद उनकी पुनर्वास प्रक्रिया शुरू की गई ताकि वे समाज की मुख्यधारा से जुड़कर एक सम्मानजनक जीवन जी सकें। अभियान में कई विभागों ने मिलकर सक्रिय भूमिका निभाई। संरक्षण अधिकारी जितेंद्र कुमार, श्रम प्रवर्तन अधिकारी हंसराज, ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट थाना से उपनिरीक्षक कृष्णपाल, महिला हेड कांस्टेबल सुमन, कांस्टेबल नेहा, हेड कांस्टेबल मुनिंद्र मोहन शर्मा, और चाइल्ड हेल्पलाइन-1098 से सुपरवाइजर संजय कुमार सहित पूरी टीम ने मेहनत कर बच्चों को भिक्षावृत्ति से मुक्त कराया।

जिला प्रशासन ने की अपील
रेस्क्यू अभियान के बाद जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि यदि कहीं भी बाल श्रम, भीख मांगने या बच्चों के शोषण जैसी गतिविधि दिखाई दे तो तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर-1098 या नजदीकी थाने को सूचना दें। प्रशासन का कहना है कि समाज की मदद के बिना इस कुप्रथा का अंत संभव नहीं है।

बदलती तस्वीर की झलक
रेस्क्यू के बाद बच्चों के चेहरे पर झलकती मुस्कान इस बात का प्रमाण थी कि प्रशासन का यह प्रयास उनके जीवन को नई दिशा देने वाला साबित होगा। अब यह बच्चे न केवल भीख मांगने की मजबूरी से मुक्त हो चुके हैं बल्कि उन्हें शिक्षा, संस्कार और उज्ज्वल भविष्य की राह पर आगे बढ़ाने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है।