मधुबन-बापूधाम योजना में बड़ी राहत: जुलाई अंत तक 1000 किसानों को मिलेंगे भूखंड

• चार हजार करोड़ की परिसंपत्तियों के निस्तारण की बनी रणनीति, ले-आउट तैयार, आवंटन लॉटरी के जरिए
• श्मशान घाट से प्रभावित किसानों को मिलेगा नया भूखंड, बड़े साइज वाले भूखंडों का सीधा आवंटन
• प्रत्येक पॉकेट में लगेगा बड़ा नक्शा और सूचक बोर्ड, भूखंड की दिशा और लोकेशन की जानकारी होगी स्पष्ट
• विकास कार्यों में बाधा बनी तो जीडीए उठाएगा सख्त कदम, किसानों से सहयोग की अपील
• बॉर्डर रोड निर्माण के लिए किसानों की मांग पर सहमति, डीपीआर के अनुरूप तेजी से होंगे कार्य

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) की बहुप्रतीक्षित मधुबन-बापूधाम आवासीय योजना अब किसानों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है। जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स की अध्यक्षता में बुधवार को आयोजित समीक्षा बैठक में निर्णय लिया गया कि जुलाई माह के अंत तक लगभग 1000 किसानों को भूखंड आवंटित कर दिए जाएंगे। इसके लिए जीडीए ने विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर ली है और परिसंपत्तियों के निस्तारण को प्राथमिकता पर रखा गया है। बैठक में उपाध्यक्ष ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी तकनीकी एवं प्रशासनिक कार्यों को तेजी से पूरा किया जाए। योजना के तहत 40, 60, 90, 120 और 300 वर्गमीटर के भूखंडों के लिए आवेदन करने वाले आवंटियों को लॉटरी प्रक्रिया के माध्यम से भूखंड आवंटित किए जाएंगे, जबकि बड़े आकार के भूखंडों का सीधा आवंटन किया जाएगा।

जिन किसानों के भूखंड श्मशान घाट के समीप हैं, उन्हें दूसरे स्थान पर सृजित नए भूखंड उपलब्ध कराए जाएंगे। जीडीए ने यह तय किया है कि प्रत्येक पॉकेट में बड़ा नक्शा व दिशा सूचक बोर्ड लगाया जाएगा ताकि आवंटी यह आसानी से समझ सकें कि उनका भूखंड कहां स्थित है। मधुबन-बापूधाम योजना को लेकर जीडीए अब एक्शन मोड में है। किसानों को जुलाई के अंत तक भूखंड मिलने की उम्मीद है, जिससे वर्षों से लंबित मांग पूरी हो सकेगी और गाजियाबाद में विकास की एक नई इबारत लिखी जा सकेगी। गांव की सीमा से सटी सड़कों के निर्माण के लिए किसानों की मांग पर जीडीए सकारात्मक रुख अपनाते हुए ले-आउट में जरूरी संशोधन कर रहा है।

उपाध्यक्ष अतुल वत्स ने किसानों से अपील की कि जीडीए की इस पहल में सहयोग करें और विकास कार्यों में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न करें। उन्होंने साफ चेतावनी भी दी कि अगर विकास में व्यवधान उत्पन्न हुआ, तो जीडीए मजबूर होकर सख्त कदम उठाएगा। करीब 4000 करोड़ की परिसंपत्तियों का निस्तारण करके प्राधिकरण योजना को लाभ की ओर ले जाना चाहता है, ताकि न केवल किसानों को उनका हक मिल सके, बल्कि योजना में निवेश व अधोसंरचना विकास को भी नई गति मिल सके।