साइबर अपराधियों पर कमिश्नरेट पुलिस की सख्त कार्रवाई, 18.50 करोड़ रुपए वापस कराए

-सालभर में 73 साइबर ठग गिरफ्तार, ठगी और ब्लैकमेलिंग के नए तरीके उजागर, साइबर दोस्त अभियान से लोगों को किया जागरूक

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। जनपद में साइबर अपराध को रोकने और आम लोगों को ठगी एवं ब्लैकमेलिंग से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से कमिश्नरेट पुलिस ने वर्ष 2025 का साइबर अपराध रिपोर्ट कार्ड जारी किया है। सालभर चलाए गए अभियान के तहत पुलिस ने साइबर ठगों से 18.50 करोड़ रुपए पीडि़तों के खाते में वापस कराए और 73 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा।
पुलिस कमिश्नर जे. रविंदर गौड़ ने बताया कि गाजियाबाद में साइबर ठगी की घटनाओं में सबसे अधिक मामले शेयर ट्रेडिंग के नाम पर सामने आए। इसमें लोगों को सोशल मीडिया विज्ञापन और एआई से तैयार वीडियो के जरिए निवेश का लालच दिया गया। इस श्रेणी में 124 पीडि़तों को कुल 14 करोड़ रुपए वापस दिलाए गए। टेलीग्राम टास्क फ्रॉड भी ठगी का बड़ा जरिया बना, जिसमें घर बैठे कमाई का झांसा देकर 55 लोगों से रकम वसूली गई। इस श्रेणी में पीडि़तों को दो करोड़ छह लाख रुपए वापस मिले।

डिजिलट अरेस्ट के 14 मामले सामने आए, जिनमें 34.84 लाख रुपए पीडि़तों को लौटाए गए। वहीं, एपीके फाइल या रिमोट एक्सेस ऐप से फोन हैक करके ठगी के 24 मामलों में 33.30 लाख रुपए वापस दिलाए गए। क्रिप्टो करेंसी के नाम पर पांच मामलों में 59.66 लाख रुपए और अन्य 43 घटनाओं में 1.30 करोड़ रुपए की रकम पीडि़तों को वापस मिली। सालभर में पुलिस ने 2098 बैंक खातों और 2958 मोबाइल नंबरों को ब्लॉक कर साइबर ठगी की रोकथाम सुनिश्चित की। पुलिस कमिश्नर ने बताया कि पहले जिले में केवल एक साइबर सेल थी, लेकिन अब हर थाने में साइबर सेल गठित कर दी गई है। 21 जनवरी 2024 से गाजियाबाद में साइबर थाना भी संचालित हो रहा है। पांच लाख रुपए और उससे अधिक की ठगी के मामले साइबर थाने में दर्ज होते हैं, जबकि पांच लाख से कम की ठगी संबंधित थानों में दर्ज होती है। इस साल साइबर थाने में अब तक 267 मामले दर्ज हो चुके हैं।

पुलिस कमिश्नर ने साइबर ठगों के ठगी और ब्लैकमेलिंग के तरीकों का भी खुलासा किया। साइबर अपराधी कॉल के जरिए खुद को फेडेक्स कोरियर अधिकारी, नारकोटिक्स विभाग का कर्मचारी या पुलिस अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं। नकली वारंट, विदेश से भेजे गए पार्सल में ड्रग्स या पासपोर्ट मिलने की कहानियों के जरिए रकम ट्रांसफर कराई जाती है। कई मामलों में पीडि़तों के फोन में एपीके फाइल या रिमोट एक्सेस ऐप इंस्टॉल कर ठगी की गई। इसके अलावा गूगल पर खोजे गए फर्जी कस्टमर केयर नंबर भी धोखाधड़ी का बड़ा जरिया बन गए। पुलिस कमिश्नर ने लोगों से अपील की कि वे इंडियन साइबर क्राइम को-ऑर्डिनेशन सेंटर (14सी) द्वारा चलाए जा रहे साइबर दोस्त अभियान से जुड़ें।

साइबर दोस्त को व्हाट्सऐप की सेटिंग्स में जाकर अपडेट्स में खोजकर फॉलो किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अनजान लिंक, ऐप या क्यूआर कोड पर क्लिक न करें। कस्टमर केयर नंबर हमेशा संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट से लें और सोशल मीडिया पर अनजान लोगों की कॉल या वीडियो चैट तुरंत समाप्त करें।
किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज या लेनदेन की सूचना तुरंत पुलिस को दें। साइबर ठगी की स्थिति में 1930 पर कॉल या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। पुलिस कमिश्नर ने कहा कि साइबर अपराध में गिरोह लगातार नए तरीके अपना रहे हैं। जागरूकता और सतर्कता ही इससे बचने का सबसे बड़ा उपाय है। उन्होंने युवाओं और आम जनता से अपील की कि वे अपने और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए साइबर सुरक्षा नियमों का पालन करें और साइबर दोस्त अभियान में सक्रिय रूप से भाग लें।