आगामी बजट में रियल एस्टेट सेक्टर को इंडस्ट्री का दर्जा देने की मांग

-लंबे समय से लंबित पॉलिसी सपोर्ट से सेक्टर को मिलेगी नई गति: प्रदीप गुप्ता
-सिंगल-विंडो क्लीयरेंस और मंजूरी प्रक्रिया में तेजी का प्रस्ताव
-इंडस्ट्री दर्जा मिलने से आसान लोन, कम ब्याज और व्यवस्थित फाइनेंसिंग के रास्ते खुलेंगे

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। केंद्रीय बजट 2026-27 के मद्देनजर रियल एस्टेट सेक्टर ने सरकार से अपनी प्रमुख मांगें दोहराई हैं। व्यापारी एकता समिति संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रदीप गुप्ता ने कहा कि रियल एस्टेट सेक्टर पिछले कई वर्षों से सरकार से इंडस्ट्री का दर्जा देने की मांग कर रहा है। उनका कहना है कि यदि इस बार के बजट में यह मांग पूरी होती है, तो सेक्टर की गति और निवेश के अवसर दोनों में सुधार होगा। प्रदीप गुप्ता ने बताया कि इस दिशा में सेक्टर ने सरकार के सामने कई सुझाव रखे हैं। इनमें जमीन के रिकॉर्ड को ऑनलाइन करना, मंजूरी प्रक्रिया में तेजी लाना, और मकानों की मांग को बढ़ाने के लिए एक आसान सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम शुरू करना शामिल है।

उन्होंने कहा कि इस तरह की पहल से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि निवेशकों और डेवलपर्स को भी सहज और पारदर्शी वातावरण मिलेगा। उन्होंने आगे कहा कि यदि रियल एस्टेट को इंडस्ट्री का दर्जा दिया जाता है, तो सेक्टर को सस्ते और लंबी अवधि के लोन आसानी से मिलेंगे, कर्ज पर ब्याज दर कम होगी और व्यवस्थित फाइनेंसिंग विकल्पों में वृद्धि होगी।

प्रदीप गुप्ता ने सरकार से अपील की कि इस बार के केंद्रीय बजट में पॉलिसी सपोर्ट देकर रियल एस्टेट सेक्टर की लंबित मांगों को पूरा किया जाए, जिससे सेक्टर में निवेश और निर्माण गतिविधियों को नई गति मिले। रियल एस्टेट से जुड़े डेवलपर्स और संस्थाओं का मानना है कि बजट में यह कदम आने वाले वर्षों में रोजगार सृजन, निर्माण गतिविधियों और आर्थिक विकास के लिए भी अत्यंत लाभकारी होगा।