गाजियाबाद। कौशांबी स्थित प्राचीन सनातन धर्म मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा का भव्य आयोजन किया गया है। मंदिर के प्रधान पुजारी पंडित राजेंद्र प्रसाद पांडे ने बताया यह आयोजन स्व. विनीता रानी की पुण्य स्मृति में किया गया है। कथा के मुख्य यजमान मोहन गुप्ता (लक्ष्मी नगर दिल्ली) है। श्रीमद् भागवत कथा के मुख्य संयोजक एवं मंदिर समिति के वरिष्ठ सदस्य दीपक गुप्ता कथा की संपूर्ण व्यवस्था देख रहे है। श्रीमद् भागवत कथा का वाचन कथा व्यास गुप्तेश्वर महादेव शक्ति पीठाधीश्वर आचार्य ऋषि दीक्षित महाराज की अमृतवाणी में किया जा रहा है। मंगलवार को कथा के छठे दिवस के अवसर पर रुक्मणी विवाह बड़े धूमधाम से मनाया गया। कथावाचक ने कहा कि गोपियों ने भगवान श्रीकृष्ण से उन्हें पति रूप में पाने की इच्छा प्रकट की।
भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों की इस कामना को पूरी करने का वचन दिया। अपने वचन को पूरा करने के लिए भगवान ने महारास का आयोजन किया। इसके लिए शरद पूर्णिमा की रात को यमुना तट पर गोपियों को मिलने के लिए कहा गया। सभी गोपियां सज-धजकर नियत समय पर यमुना तट पर पहुंच गईं। कृष्ण की बांसुरी की धुन सुनकर सभी गोपियां अपनी सुध-बुध खोकर कृष्ण के पास पहुंच गईं। उन सभी गोपियों के मन में कृष्ण के नजदीक जाने, उनसे प्रेम करने का भाव तो जागा, लेकिन यह पूरी तरह वासना रहित था। इसके बाद भगवान ने रास आरंभ किया। माना जाता है कि वृंदावन स्थित निधिवन ही वह स्थान है, जहां श्रीकृष्ण ने महारास रचाया था। यहां भगवान ने एक अद्भुत लीला दिखाई थी, जितनी गोपियां उतने ही श्रीकृष्ण के प्रतिरूप प्रकट हो गए। सभी गोपियों को उनका कृष्ण मिल गया और दिव्य नृत्य व प्रेमानंद शुरू हुआ। रुक्मिणी विवाह का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने सभी राजाओं को हराकर विदर्भ की राजकुमारी रुक्मिणी को द्वारका में लाकर उनका विधिपूर्वक पाणिग्रहण किया।
मौके पर आयोजक मंडली की ओर से आकर्षक वेश-भूषा में श्रीकृष्ण व रुक्मिणी विवाह की झांकी प्रस्तुत कर विवाह संस्कार की रस्मों को पूरा किया गया। कथा के साथ-साथ भजन संगीत भी प्रस्तुत किया गया। वहीं मुख्य अतिथि के रूप में क्षेत्रीय पार्षद कुसुम गोयल पूर्व पार्षद भाजपा नेता डॉ मनोज गोयल और कौशांबी थाने के प्रभारी सर्वेश पाल ने कथा का रसपान करते हुए महाराज से आर्शीवाद लिया। सभी श्रद्धालुओं को चाट के काउंटर लगवा कर सभी श्रद्धालु जनों के लिए अनेक प्रकार के व्यंजनों का विशेष प्रबंध किया गया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से मोहन लाल, पंडित देवमणि पांडेय (मन्दिर पुजारी), शकुंतला गुप्ता, एवं गुप्ता परिवार के सभी पारिवारिकजन, मंदिर समिति के पदाधिकारी, तथा सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु जन उपस्थित रहे।

















