नोएडा एयरपोर्ट को धरातल पर उतारने में डॉ. अरुणवीर सिंह ने निभाई सबसे अहम भूमिका, कोविड काल में भी नहीं रुका था एयरपोर्ट का काम

विजय मिश्रा (उदय भूमि संवाददाता)
नोएडा एयरपोर्ट। यमुना अथॉरिटी के तत्कालीन सीईओ डॉ अरुणवीर सिंह ने इस प्रॉजेक्ट में अहम भूमिका निभाई। एयरपोर्ट के लिए सरकार ने नोएडा इंटरनैशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (नायल) कंपनी बनाई। इस कंपनी का पहला सीईओ डॉ अरुणवीर सिंह को बनाया गया। यह एयरपोर्ट यमुना अथॉरिटी एरिया में ही है। इसलिए इनकी भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण रही। खास बात यह रही कि नायल में कोई कर्मचारी नहीं था और इतने बड़े प्रॉजेक्ट के लिए कंपनी चयन करने तक का सफर तय कर लिया। कोविड काल में जब देश में काम धंधा बंद था। तब उन्होंने स्विस कंपनी का चयन करके एग्रीमेंट किया।

नोएडा एयरपोर्ट ही नहीं यमुना अथॉरिटी को भी डॉ अरुणवीर सिंह ने सिफर से शिखर तक पहुंचाया है। 24 अप्रैल 2001 को यमुना प्राधिकरण का गठन हुआ था। शुरुआती दौर में प्राधिकरण की आर्थिक सेहत अच्छी नहीं थी। धीरे-धीरे हालत बिगड़ते चले गए। यमुना प्राधिकरण में काम करने वाले लोगों को वेतन तक नहीं मिल पाता था। आर्थिक स्थिति बद से बदतर होती चली गई। हालात इतने खराब हो गये कि यमुना प्राधिकरण को बंद करने या फिर इसका ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में विलय करने की चर्चाएं होने लगी। इन्हीं चर्चाओं के बीच वर्ष 2016 में यमुना अथॉरिटी की जिम्मेदारी डॉ. अरुणवीर सिंह के कंधों पर आई। सोच बदलो तो वक्त बदलेगा इस मंत्र के साथ डॉ. अरुणवीर सिंह ने प्राधिकरण को बचाने का बीड़ा उठाया। वर्ष 2016 में यमुना अथॉरिटी पर 4,800 करोड़ रुपए का भारी भरकम कर्ज था। लेकिन अरुणवीर सिंह की सोच ने प्राधिकरण की हालत ही बदल डाली।

जहां वेतन के लाले थे, वहां अब लाभांश की एफडी होने लगी। यमुना प्राधिकरण के इस कायाकल्प का पूरा श्रेय सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह को जाता है। आज यमुना प्राधिकरण क्षेत्र उद्यमियों और निवेशकों के लिए निवेश के लिहाज से सबसे पसंदीदा क्षेत्र बन गया। डॉ. अरुणवीर सिंह की दूरदर्शिता एवं नीतियों के चलते यमुना प्राधिकरण आज नई ऊंचाइयों पर है। यमुना प्राधिकरण के कायाकल्प के लिए डॉ. अरुणवीर सिंह ने कोई रॉकेट साइंस का फार्मूला नहीं लगाया बल्कि उन्होंने प्राधिकरण की ब्रांडिंग, मार्केटिंग स्ट्रेजी, मांग के अनुरूप जमीन की खरीद, फाइनेंशियल कंट्रोल, फिजूलखर्ची पर रोक और इफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर जोर दिया। उनकी कार्यशैली का असर एक वर्ष के दौरान ही दिखाई देने लगा था। उन्हीं की दूरदर्शिता के चलते प्राधिकरण क्षेत्र में विकास की गति काफी तेज हे। यहां नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, फिल्म सिटी, हेरिटेज क्लब, लॉजिस्टिक पार्क, जापानी सिटी, कोरियन सिटी, मेडिकल डिवाइस पार्क और अपैरल पार्क जैसे कई बड़े प्रोजेक्ट विकसित किए जा रहे हैं।