नई नीति में 55 हजार करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जो पिछले वित्तीय वर्ष से 4000 करोड़ रुपये अधिक है। अब शहरों में अंग्रेजी शराब और बीयर एक ही दुकान पर मिलेगी। सूत्रों के अनुसार नई आबकारी नीति में ये प्रावधान किए गए हैं। जल्द ही सरकार लॉटरी के जरिए दुकानों का आवंटन नए सिरे से किया जाएगा। प्रदेश में सात साल से शराब की दुकानों की लॉटरी नहीं हुई है, तब से पुरानी दुकानों का नवीनीकरण किया जा रहा था। आबकारी नीति में हुए बदलाव के बाद इस वर्ष शराब की दुकानों का नवीनीकरण नहीं होगा। दुकानों के नए सिरे से ई-लाटरी होने की सूचना के बाद काफी लोग उत्साहित हैं तो वहीं दुसरी ओर ई लॉटरी होने से वर्षों से शराब के कारोबार में जुड़े मठाधीशों की नींद उड़ी हुई है। आबकारी कार्यालय में हर दिन लोग नियम जानने के लिए पहुंच रहे हैं। एक सप्ताह बाद आवेदन को लेकर प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। कई वर्षों से शराब की दुकानों की ई-लाटरी होने की बजाय उन्हें नवीनीकरण कर दिया जाता था, लेकिन इस वर्ष शराब की दुकानों का ई-लाटरी होना है।
उदय भूमि
गौतमबुद्ध नगर। यूपी सरकार ने आबकारी नीति वर्ष 2025-26 में बड़ा बदलाव किया है। नई नीति में देशी-विदेशी शराब, बीयर, भांग की फुटकर दुकानों का लाइसेंस ई-लॉटरी के जरिए होगा। एक व्यक्ति को पूरे प्रदेश में अधिकतम 2 दुकानें ही ई-लॉटरी प्रक्रिया में आवंटित हो सकेंगी। पुराने लाइसेंस का रिन्यूअल नहीं होगा। इस नई नीति में 55 हजार करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जो पिछले वित्तीय वर्ष से 4000 करोड़ रुपये अधिक है। अब शहरों में अंग्रेजी शराब और बीयर एक ही दुकान पर मिलेगी। सूत्रों के अनुसार नई आबकारी नीति में ये प्रावधान किए गए हैं। जल्द ही सरकार लॉटरी के जरिए दुकानों का आवंटन नए सिरे से किया जाएगा। प्रदेश में सात साल से शराब की दुकानों की लॉटरी नहीं हुई है, तब से पुरानी दुकानों का नवीनीकरण किया जा रहा था।
आबकारी नीति में हुए बदलाव के बाद इस वर्ष शराब की दुकानों का नवीनीकरण नहीं होगा। दुकानों के नए सिरे से ई-लाटरी होने की सूचना के बाद काफी लोग उत्साहित हैं तो वहीं दुसरी ओर ई लॉटरी होने से वर्षों से शराब के कारोबार में जुड़े मठाधीशों की नींद उड़ी हुई है। आबकारी कार्यालय में हर दिन लोग नियम जानने के लिए पहुंच रहे हैं। एक सप्ताह बाद आवेदन को लेकर प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। कई वर्षों से शराब की दुकानों की ई-लाटरी होने की बजाय उन्हें नवीनीकरण कर दिया जाता था, लेकिन इस वर्ष शराब की दुकानों का ई-लाटरी होना है। साथ ही बदलाव भी किए गए हैं, अंग्रेजी, बीयर की दुकानों को एक ही में संचालित किया जाना है। ऐसे में हर कोई दुकान पाने के लिए आगे आ गया है और आवेदन तिथि निकलने का इंतजार कर रहा है। जिले में शराब के शौकीनों की संख्या बढ़ती जा रही है। शराब से जिले में राजस्व बेहतर मिलता है। पहले शराब की दुकानों को पाने के लिए कोई भी आवेदन कर देता था, लेकिन कुछ वर्षों से शराब की दुकानों के लिए आवेदन को लेकर बदलाव किया गया है।
गौतमबुद्ध नगर जिला आबकारी अधिकारी सुबोध कुमार श्रीवास्तव ने बताया इस बार शराब की दुकानों का आवंटन ई-लॉटरी के माध्यम से किया जाएगा। कोई भी व्यक्ति पूरे प्रदेश में अधिकतम दो दुकानें ही ले सकता है। हालांकि, वो सभी दुकानों के लिए आवेदन कर सकता है। इसके अलावा, अब केवल सफल आवेदकों से ही फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) या बैंक गारंटी (बीजी) मांगी जाएगी, जिससे आवेदन प्रक्रिया सरल होगी और ज्यादा लोग भाग ले सकेंगे। शीशे की बोतल में आने वाली देशी शराब को अब टेट्रा पैक में उपलब्ध कराया जाएगा, क्योंकि टेट्रा पैक में मिलावट की संभावना नहीं होती है।

जिला आबकारी अधिकारी
गौतमबुद्ध नगर
शराब की दुकान के खुले रहने का समय सुबह 10 बजे से रात 10 बजे तक रहेगा। बता दें कि नई नीति के तहत, अगले वित्तीय वर्ष 2026-27 से दुकानों को दो साल के लिए नवीनीकृत करने की सुविधा दी जाएगी। इससे व्यापारियों को लंबे समय तक कारोबार करने में आसानी होगी और आर्थिक स्थिरता बनी रहेगी। अभी तक जिले के लोगों को सस्ती शराब के लिए दिल्ली और गुरुग्राम जाना पड़ता था। गुरुग्राम में शराब सस्ती और इसके अधिक विकल्प मिल रहे थे। नई यूपी उत्पाद शुल्क नीति के साथ राज्य में अधिक विकल्प मिलेंगे और पूर्वी और उत्तरी दिल्ली के लोगों को गाजियाबाद-नोएडा से शराब लेना पास रहेगा। शराब की दुकान के लिए आवेदन करने वालों के पास हैसियत प्रमाण पत्र, आइटीआर, पैन कार्ड, पुलिस चरित्र सत्यापन रिपोर्ट होना चाहिए।
नई शराब कैटेगरी और पैकेजिंग में किया गया बदलाव
सरकार ने 28 प्रतिशत वी/वी तीव्रता वाली अनाज-आधारित यूपी निर्मित शराब (यूपीएमएल) की एक नई श्रेणी शुरू की है। अब विदेशी शराब और बीयर की अलग-अलग दुकानों की जगह कंपोजिट दुकानें बनाई जाएंगी, जिससे दुकानों की संख्या बढ़ाए बिना बिक्री को बढ़ाया जा सकेगा। देशी शराब केवल टेट्रा पैक में ही बेची जाएगी। पहले इसे पेट बॉटल्स और कांच की बोतलों में भी बेचा जाता था, लेकिन नए नियम से मिलावट और अवैध बिक्री पर रोक लगेगी। विदेशी शराब (आईएमएफएल) के रेगुलर श्रेणी में अब 90एमएल की नई बोतल उपलब्ध होगी। वाइन और लो-अल्कोहलिक बार (एलएबी) में अब बीयर की तरह कैन में भी उत्पाद बेचे जा सकेंगे।
मॉडल शॉप में मिलेगी शराब पीने की सुविधा
जिन कंपोजिट दुकानों का क्षेत्रफल 400 वर्ग फीट या अधिक है, वे मॉडल शॉप में बदली जा सकती हैं। मॉडल शॉप में ग्राहक बैठकर शराब का सेवन कर सकेंगे। देशी शराब की दुकानों को शर्तों के तहत बीयर बेचने की अनुमति भी दी गई है। नोएडा और नगर निगम क्षेत्रों में कम से कम 3,000 वर्ग फीट के क्षेत्रफल वाली दो मॉडल शॉप को प्रीमियम मॉडल शॉप के रूप में बदला जा सकता है और इन्हें वर्ष 2027-28 तक नवीनीकृत किया जा सकेगा।
लो-अल्कोहलिक बार (एलएबी) खुलेंगे
नोएडा, गाजियाबाद, आगरा और लखनऊ में लो-अल्कोहलिक बार (एलएबी) खोले जाएंगे, जहां केवल बीयर और वाइन परोसी जाएगी। इसी तरह, इन शहरों में लो-अल्कोहलिक प्रीमियम रिटेल वेंड (एलए-पीआरवी) की भी शुरुआत की गई है, जहां केवल बीयर और वाइन की बिक्री होगी। इसके साथ ही प्रदेश के विकास प्राधिकरण और औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में 20,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र वाले आईटी और आईटीईएस परिसरों में अब बार और पीआरवी खोलने की अनुमति दी गई है।
ये होंगे दुकानों के रेट
शराब दुकानों के लिए लाइसेंस फीस भी तय कर दी गई है। गौतम बुद्ध नगर विकास प्राधिकरण, गाजियाबाद, आगरा, वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, कानपुर, लखनऊ नगर निगमों में 65,000, कंपोजिट दुकान के लिए 90,000, मॉडल शॉप के लिए एक लाख, श्रेणी एक को छोड़कर अन्य नगर निगमों की सीमा के बाहर तीन किमी तक देसी, 60,000, कंपोजिट 85,000, मॉडल शॉप 90,000, नगर पंचायतों में देसी 50,000, कंपोजिट 65,000, मॉडल शॉप 70,000, ग्रामीण क्षेत्र में देसी 40,000, कंपोजिट 55,000 और मॉडल शॉप के लिए 60,000 रुपये फीस तय की गई है।
नई आबकारी नीति 2025-26
• ई लॉटरी के जरिये देशी शराब और भांग की दुकानों का होगा आवंटन
• शराब की दुकान के लिए एक आवेदक सिर्फ एक आवेदन करने का मौका मिलेगा।
• प्रदेश में एक व्यक्ति को 2 दुकानों से अधिक नहीं होगा आवंटन।
• कंपोजिट दुकान का प्रस्ताव हुआ पास।
• कंपोजिट दुकान के तहत शराब-बीयर की आसपास की दुकाने होंगी मर्ज।
• प्रोसेसिंग फीस को 5 श्रेणियों में बांटा गया. पहली श्रेणी में गौतम बुद्ध नगर, गाजियाबाद, लखनऊ, आगरा, वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर और कानपुर के नगर निगम क्षेत्र और उनके तीन किलोमीटर की परिधि का क्षेत्र शामिल होगा।
• दूसरी श्रेणी में पहली श्रेणी में शामिल महानगरों को छोड़कर बाकी जो बड़े शहर बचते हैं, उनमें और उनकी तीन किलोमीटर की परिधि में शराब की दुकानों (देसी शराब, कंपोजिट दुकान, मॉडल शॉप्स और भांग की दुकान) के लिए क्रमश: 60 हजार रुपये, 85 हजार रुपये, 90 हजार रुपये और 25 हजार रुपये प्रोसेसिंग शुल्क तय किया गया है।
• तीसरी श्रेणी में सभी नगर पालिका क्षेत्रों और उनके तीन किलोमीटर की परिधि के इलाकों को शामिल किया गया है। इनमें देसी शराब, कंपोजिट दुकान, मॉडल शॉप्स और भांग की दुकान के लिए क्रमश: 50 हजार रुपये, 75 हजार, 80 हजार और 25 हजार रुपये प्रोसेसिंग शुल्क तय किया गया है।
• चौथी श्रेणी में नगर पंचायत की सीमा और उसके तीन किलोमीटर की परिधि के इलाकों को शामिल किया गया है। इनमें प्रोसेसिंग शुल्क क्रमश: 45 हजार रुपये, 65 हजार रुपये, 70 हजार रुपये और 25 हजार रुपये रखा गया है।
• पांचवीं श्रेणी में ग्रामीण क्षेत्रों को शामिल किया गया है. उनमें देसी मदिरा, कंपोजिट दुकान, मॉडल शॉप्स और भांग की दुकान के लिए प्रोसेसिंग शुल्क क्रमश: 40 हजार रुपये, 55 हजार रुपये, 60 हजार रुपये और 25 हजार रुपये तय किया गया है।
• नई नीति में कंपोजिट दुकान के रूप में एक नया मॉडल पेश हुआ. कम्पोजिट दुकान का मतलब हुआ कि अलग-अलग तरह की बियर और बाकी तरह की शराब की दुकानों को मिलाकर एक दुकान का स्वरूप दिया जाएगा। ऐसा होने से उपभोक्ताओं को एक ही दुकान पर सारी चीजें उपलब्ध हो जाएंगी।
• कंपोजिट दुकानों में एक व्यवस्था यह भी की गई है कि अगर कहीं पर बियर की दुकान और विदेशी शराब की दुकान अगल-बगल है तो उन्हें एक साथ जोड़कर एक ही दुकान बना दी जाएगी।
• यह भी तय किया गया है कि उत्तर प्रदेश के जिन किसानों से फल खरीदकर शराब बनाई जा रही है, उनकी हर जिला मुख्यालय पर एक शराब की दुकान व्यवस्थित कराई जाएगी, जिससे वह प्रोत्साहित हों। मंडल मुख्यालयों पर ऐसी दुकानों की लाइसेंस फीस 50 हजार रुपये और बाकी जिला मुख्यालयों पर 30 हजार रुपये तय की गई है।
• ग्लास की जगह अब ट्रेटा पैक में ही बिकेगी शराब।
• प्रोसेसिंग शुल्क के तौर पर देसी मदिरा की दुकान के लिए 65 हजार रुपये, कंपोजिट दुकान के लिए 90 हजार रुपये, मॉडल शॉप्स के लिए एक लाख रुपये तथा भांग की दुकान के लिए 25 हजार रुपये की राशि तय की गई है।
• शराब की लाइसेंस फीस 254 से 260 रूपये/लीटर की गई।
• शराब के मार्जिन में भी की गई बढ़ोत्तरी।
• मॉडल शॉप और भांग की दुकान के लाइसेंस फीस 10 प्रतिशत बढ़ी।
• हर जिले में एक फ्रूट वाइन शॉप खुलेगी।
• मंडल पर फ्रूट वाइन शॉप की फीस 30 हजार मंडल पर 50 हजार होगी।
• मौजूदा वित्तीय वर्ष के लिए 60 हजार करोड़ रखा गया।
• अब शराब की दुकान के लिए एफडीआर के साथ बैंक गारंटी देनी होगी।
• मदिरा परिवहन के लिए बनेंगे ऑन लाइन पास।
• शराब की दुकान के खुले रहने का समय सुबह 10 बजे से रात 10 बजे तक रहेगा।
















