-तीन किसानों ने की करोड़ों की जमीन रजिस्ट्री, पारदर्शिता व विश्वास से बन रही है गाजियाबाद की भविष्य की टाउनशिप
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। गाजियाबाद में शहरी विकास की दिशा में एक नई शुरुआत मानी जा रही हरनंदीपुरम टाउनशिप योजना अब केवल कागजों की योजना नहीं, बल्कि जमीन पर हकीकत बनती जा रही है। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) द्वारा तैयार की गई इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत अब तक तीन किसानों ने अपनी भूमि जीडीए के पक्ष में रजिस्ट्री कर दी है, जिससे यह परियोजना एक ठोस मुकाम की ओर अग्रसर हो रही है। यह केवल भूमि अधिग्रहण नहीं, बल्कि किसानों और सरकार के बीच पारदर्शिता, संवाद और विश्वास की मिसाल बन रहा है, जहां किसी प्रकार की जबरदस्ती नहीं बल्कि सहमति और सहयोग के साथ काम हो रहा है। यह परियोजना गाजियाबाद के भविष्य की सबसे आधुनिक और सुनियोजित टाउनशिप बनकर उभरने जा रही है।
योजना के तहत न केवल आवासीय और व्यवसायिक भूखंड विकसित किए जाएंगे, बल्कि इसमें खुली हरियाली, स्मार्ट सड़कें, जल निकासी, विद्युत आपूर्ति, स्कूल, अस्पताल और सामुदायिक केंद्र जैसी सभी मूलभूत सुविधाएं भी प्रस्तावित हैं। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा यह भूमि किसानों की स्वेच्छा से, उचित मूल्य पर और बिना किसी दबाव के खरीदी जा रही है, जिससे यह प्रक्रिया सकारात्मक बदलाव का प्रतीक बन रही है। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में प्रतिकर निर्धारण की बैठक और जीडीए बोर्ड द्वारा पारित प्रस्तावों के अनुरूप हर प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ की जा रही है।
जीडीए उपाध्यक्ष श्री अतुल वत्स स्वयं इस योजना की निगरानी कर रहे हैं। अधिकारियों की सक्रियता, ईमानदारी और विज़न ने इस योजना को धरातल पर लाना संभव किया है। जीडीए अतुल वत्स ने कहा कि हम विकास की ऐसी नींव रख रहे हैं, जो विश्वास और पारदर्शिता पर आधारित है। हरनंदीपुरम न केवल एक टाउनशिप, बल्कि गाजियाबाद के भविष्य की कहानी है। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी भूखंड या मकान की अवैध खरीद-फरोख्त से बचें। योजना से संबंधित हर जानकारी जीडीए के माध्यम से सार्वजनिक की जा रही है। किसी भी गलत जानकारी या फर्जीवाड़े से सतर्क रहें।
किसानों ने दिखाई सकारात्मकता, करोड़ों में मिला प्रतिकर
पहला बैनामा:
ग्राम चम्पत नगर के निवासी अभय सिंघल पुत्र प्रमोद सिंघल ने खसरा संख्या 270 के तहत 0.1420 हेक्टेयर भूमि जीडीए को दी, जिसके बदले में 45,89,440 का प्रतिकर प्रदान किया गया।
दूसरा बैनामा:
ग्राम शमशेर के किसान किरणपाल त्यागी पुत्र त्रिलोक चंद ने खसरा संख्या 837 की 0.3455 हेक्टेयर भूमि जीडीए को सौंपी। इसके बदले में उन्हें 1,86,84,640 का भुगतान किया गया।
तीसरा बैनामा:
ग्राम नगला फिरोजपुर मोहनपुर की रूबी पत्नी दीपक कुमार ने खसरा संख्या 364 (0.0759 हेक्टेयर) का बैनामा जीडीए को सौंपा था, जिसका भुगतान पहले ही किया जा चुका है। इस तरह अब तक तीन किसानों के परिवारों ने पूर्ण सहमति के साथ जमीन जीडीए को सौंपी है, जो आने वाले दिनों में अन्य किसानों को भी इस योजना से जुडऩे के लिए प्रेरित करेगी।

















