हरसांव व डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण व 20 प्लॉट की बाउंड्रीवाल को जीडीए ने किया ध्वस्त

गाजियाबाद। बगैर नक्शा स्वीकृत कराए अवैध रूप से हरसांव-शास्त्री नगर में अवैध बिल्डिंग और हिंडन नदी डूब क्षेत्र में काटी जा रही अवैध कॉलोनी में भूखंडों की बाउंड्रीवाल, बिल्डर का ऑफिस आदि को गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) प्रवर्तन दस्ते की टीम ने बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया। साथ ही चेतावनी दी कि अगर दोबारा निर्माण पाया गया तो संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स के अवैध कॉलोनी व अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के आदेश के क्रम में सोमवार को जीडीए प्रवर्तन जोन-4 के प्रभारी एवं अपर सचिव प्रदीप कुमार सिंह ने टीम के साथ प्रवर्तन जोन-4 क्षेत्र का निरीक्षण किया गया।

जीडीए के अपर सचिव प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि सहायक अभियंता, अवर अभियंता एवं जीडीए पुलिस की मौजूदगी में न्यू पंचवटी कॉलोनी में खसरा संख्या-67 में भूखंड संख्या-303,304 व 305 में दीपक पोरवाल द्वारा अवैध निर्माण को ध्वस्त किया गया। इसके अलावा खसरा संख्या- 687 ग्राम-हरसांव के शास्त्रीनगर रवि शर्मा, नितिन शर्मा द्वारा अवैध रूप से बनाई जा रही चार मंजिला बिल्डिंग को बुलडोजर चलाकर ध्वस्त किया गया। इसके अलावा हिंडन नदी डूब क्षेत्र में काटी जा रही अनाधिकृत कॉलोनी में लगभग 20 प्लॉट की बाउंड्रीवाल,बिल्डर का अवैध ऑफिस एवं बनाए गए मकानों को बुलडोजर चलाकर ध्वस्त किया गया। इसके साथ ही सेक्टर-11 प्रताप विहार में भवन संख्या जी-28 में आशा पत्नी उदयवीर सिंह एवं भवन संख्या डी-25 महेन्द्रा एंक्लेव, शास्त्री नगर में रामवीर सिंह द्वारा किए गए अनधिकृत निर्माण को सहायक अभियंता, अवर अभियंता ने जीडीए पुलिस की मौजूदगी में सील करने की कार्रवाई की है।

जीडीए अपर सचिव ने इस कार्रवाई के दौरान निर्देश दिए कि बगैर मानचित्र स्वीकृति के कोई कार्य न कराया जाए। उन्होंने प्रवर्तन जोन-4 के अवर अभियंता तथा सुपरवाइजर को निर्देशित किया गया कि सतत् निगरानी रखते हुए यह सुनिश्चित किया जाए कि उक्त अवैध निर्माण पुन:शुरू न होने पाए। जीडीए द्वारा लगातार अवैध निर्माण एवं विकास कार्य के विरूद्ध विधि सम्मत कार्रवाई जारी रहेगी। इसी क्रम में निर्माण करने वालों और विकासकर्ता को निर्देशित किया कि जीडीए सीमा क्षेत्र में भूमि पर विधिवत मानचित्र स्वीकृत के अनुसार ही निर्माण किया जाए। इसके साथ ही आमजन किसी भी वादग्रस्त, विवादित निर्माण में भवनों का क्रय-विक्रय न करें।