जीडीए वीसी अतुल वत्स का निर्देश ऑडिट आपत्तियों को स्पष्ट और निर्धारित अवधि में दें जवाब

उदय भूमि ब्यूरो
गाजियाबाद। ऑडिट आपत्तियों को हल्के में लेना जीडीए अधिकारियों और कर्मचारियों को भारी पड़ सकता है। जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स ने स्पष्ट निर्देश दिया कि आपत्तियों का जवाब स्पष्टता और समयबद्धता के साथ दिया जाये। ऐसा नहीं करने वालों को काम के प्रति लापरवाह मानते हुए कार्रवाई की जाएगी। ऑडिट  आपत्तियों के जरिये काम और व्यवस्था में सुधार करने का अवसर मिलता है, वहीं यदि कहीं कोई गड़बड़ी है तो वह भी पकड़ में आती है। लेकिन सिर्फ जीडीए ही नहीं ज्यादातर सरकारी विभागों में ऑडिट आपत्तियों को हल्के में लेने की परंपरा है। ज्यादातर मामलों में देखा जाता है कि टाल-मटोल वाली मानसिकता से आपत्तियों का गोल-मोल जवाब भेज दिया जाता है। ऐसे जवाबों से ना तो आपत्तियां निस्तारित हो पाती हैं और ना ही आपत्ति दर्ज कराने वाला संतुष्ट होता है। लेकिन जीडीए वीसी की सख्ती से गाजियाबाद विकास प्राधिकरण में इस परंपरा पर विराम लगने की संभावना बढ़ गई है।

जीडीए वीसी अतुल वत्स ने अधिकारियों एवं कर्मचारियों से कहा है कि ऑडिट आपत्तियों का सटीक जवाब भेजा जाए। अगर सही जवाब नहीं दिया गया तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जीडीए उपाध्यक्ष ने बुधवार को ऑडिट आपत्तियों को लेकर समीक्षा बैठक के दौरान यह बातें कही। समीक्षा बैठक में यह बात सामने आई कि 4 से 5 साल पुराने आपत्तियों का भी निस्तारण नहीं हुआ है। कई ऐसी आपत्तियां है जिनका कई बार जवाब दिया गया है और अभी भी वह निस्तारण की श्रेणी में नहीं रखा गया है। इसकी वजह जवाब का दिशाहीन और तथ्यों से परिपूर्ण नहीं होना है। हालांकि जीडीए के कई विभागों में इस बाबत कमोबेश एक जैसी ही स्थिति है। लेकिन भू-अर्जन अनुभाग और नियोजन अनुभाग की स्थिति बेहद खराब है। इन दोनों विभाग में सबसे अधिक अनिस्तारित ऑडिट आपत्तियां हैं। जीडीए वीसी ने सभी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए है कि ऑडिट में जिन प्रकरण की आपत्ति लगी है। उसका क्लियर जवाब भेजा जाए।  ऐसा नहीं करने पर संबंधित बाबू और अधिकारी को जिम्मेदार मानते हुए कार्रवाई की जाएगी।