जल संरक्षण की मिसाल बना Ghaziabad, अंतरराष्ट्रीय मंच पर दोहरे सम्मान से बढ़ी शहर की शान

-वर्ल्ड वाटर अवार्ड में सस्टेनेबल अर्बन वॉटर मैनेजमेंट और सैनिटेशन में उत्कृष्ट पहल को मिला सम्मान
-महापौर और नगर आयुक्त ने साझा किए नवाचार मॉडल, जल संरक्षण की योजनाओं को सराहा गया
-टीएसटीपी प्लांट, वर्षा जल संचयन और पुनर्चक्रण मॉडल ने दिलाई वैश्विक पहचान

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। विश्व जल दिवस के उपलक्ष में दिल्ली में आयोजित वर्ल्ड वाटर अवार्ड 2025-26 कार्यक्रम में सोमवार को गाजियाबाद नगर निगम ने एक बार फिर अपनी कार्यशैली और नवाचार का लोहा मनवाया। इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मंच पर नगर निगम को  ‘सस्टेनेबल अर्बन वॉटर मैनेजमेंट’ एवं  ‘सर्कुलर इकोनॉमी इन सैनिटेशन’ की दो महत्वपूर्ण श्रेणियों में सम्मानित किया गया। यह सम्मान वाटर डाइजेस्ट तथा यूनेस्को द्वारा प्रदान किया गया, जो न केवल नगर निगम बल्कि पूरे शहर के लिए गर्व का विषय है। कार्यक्रम में गाजियाबाद की महापौर सुनीता दयाल और नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने संयुक्त रूप से प्रतिभाग किया और शहर में जल संरक्षण एवं प्रबंधन के लिए किए जा रहे कार्यों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल और राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी द्वारा महापौर, नगर आयुक्त और जलकल विभाग की टीम को सम्मानित किया गया। इस दौरान नगर निगम के अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में नगर निगम के अपर नगर आयुक्त अवनींद्र कुमार, जलकल महाप्रबंधक कामाख्या प्रसाद आनंद,अधिशासी अभियंता जल आश कुमार टीम के साथ उपस्थित रहे।

नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने बताया कि गाजियाबाद नगर निगम द्वारा ग्रीन म्युनिसिपल बॉण्ड के अंतर्गत संचालित तृतीयक मलजल उपचार संयंत्र (टीएसटीपी) के माध्यम से शोधित जल का पुन: उपयोग कर उसे औद्योगिक इकाइयों तक पहुंचाया जा रहा है। इस पहल से न केवल जल संरक्षण को बढ़ावा मिला है, बल्कि उद्योगों में स्वच्छ जल की उपलब्धता भी सुनिश्चित हुई है। यही नवाचार इस सम्मान का प्रमुख आधार बना। महापौर सुनीता दयाल ने कहा कि नगर निगम ने अपशिष्ट जल उपचार के क्षेत्र में बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाया है, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ संसाधनों के कुशल उपयोग का उदाहरण है। 40 एमएलडी क्षमता वाले टीएसटीपी प्लांट के माध्यम से जल पुनर्चक्रण की प्रक्रिया को प्रभावी बनाया गया है। इसके साथ ही मियावाकी वृक्षारोपण जैसी पहल में भी उपचारित जल का उपयोग किया जा रहा है, जिससे पर्यावरण को लाभ मिल रहा है और भूजल स्तर को बनाए रखने में मदद मिल रही है।

उन्होंने यह भी बताया कि नगर निगम द्वारा 100 से अधिक सार्वजनिक स्थानों पर वर्षा जल संचयन प्रणाली स्थापित की गई है, जबकि 400 से अधिक ऊंची आवासीय सोसायटियों में छतों पर वर्षा जल संचयन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इसके अलावा शहर के तालाबों का पुनरोद्धार और उनकी क्षमता का विस्तार भी किया गया है, जिससे जल संरक्षण को मजबूती मिली है। कार्यक्रम के दौरान गाजियाबाद नगर निगम ने अपने जल प्रबंधन मॉडल को अन्य राज्यों और संस्थाओं के साथ साझा किया। इस अवसर पर हरियाणा, नोएडा अथॉरिटी, बेंगलुरु सहित कई औद्योगिक और जल प्रबंधन से जुड़े संस्थानों ने भी भाग लिया और गाजियाबाद के प्रयासों की सराहना की। वाटर डाइजेस्ट की डायरेक्टर अनुपमा मदहोक सूद ने गाजियाबाद नगर निगम के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह मॉडल अन्य शहरों के लिए प्रेरणास्रोत बन सकता है।

उन्होंने महापौर और नगर आयुक्त का कार्यक्रम में सहभागिता के लिए आभार व्यक्त किया। गौरतलब है कि गाजियाबाद नगर निगम द्वारा शहर में जलापूर्ति के बेहतर प्रबंधन, पानी के छिड़काव, औद्योगिक इकाइयों को जल आपूर्ति तथा आमजन को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इन पहलों का ही परिणाम है कि नगर निगम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुआ है। यह उपलब्धि न केवल नगर निगम की कार्यकुशलता को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि यदि योजनाओं को सही दिशा और समर्पण के साथ लागू किया जाए, तो शहरों को सतत विकास की राह पर आगे बढ़ाया जा सकता है। गाजियाबाद का यह मॉडल अब अन्य शहरों के लिए एक मिसाल बनता जा रहा है और भविष्य में भी इस तरह की पहलें शहर को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगी।