गाजियाबाद नगर निगम चैंपियन : नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक के नेतृत्व में दर्ज हुआ एक और रिकार्ड, कानपुर व लखनऊ को पीछे छोड़ा

उत्तर प्रदेश सरकार के युवा आईएएस अधिकारी विक्रमादित्य सिंह मलिक की कार्यशैली की खूब चर्चा हो रही है। कभी कर्ज और देनदारियों के बोझ तले दबे गाजियाबाद नगर निगम आज आर्थिक संपन्नता के साथ स्वावलंबी बनने की ओर तेजी से अग्रसर है। नगर निगम कई बड़े और महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। शहर में विकास की रफ्तार को गति देने के साथ ही प्रदूषण मुक्ति की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। गाजियाबाद नगर निगम की इस कायापलट के लिए विक्रमादित्य सिंह मलिक ने किसी रॉकेट सांइस का फामूर्ला नहीं लगाया बल्कि उन्होंने ठोस प्लानिंग, फाइनेंशियल कंट्रोल, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और राजस्व वसूली पर जोर देते हुए अनुशासित तरीके से काम किया। विक्रमादित्य सिंह मलिक की इसी मेहनत का नतीजा है कि गाजियाबाद नगर निगम के नाम कई रिकॉर्ड दर्ज हुए हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में गाजियाबाद नगर निगम ने 75 प्रतिशत की ग्रोथ रेट के साथ 620 करोड़ रुपये की राजस्व वसूली का रिकॉर्ड बनाया है। गाजियाबाद ने लखनऊ और कानपुर सहित अधिकांश नगर निगमों को काफी पीछे छोड़ दिया है। विक्रमादित्य सिंह मलिक ने जब गाजियाबाद का चार्ज संभाला था उस समय नगर निगम की राजस्व वसूली 277 करोड़ रुपये था। जो कि सिर्फ डेढ़ साल में बढ़कर 620 करोड़ तक पहुंच गया है। यह आंकड़े अपने आप में बहुत कुछ बयां कर रहे हैं। बिना शोर मचाये चुपचाप काम करते हुए आपेक्षित परिणाम हासिल करना विक्रमादित्य सिंह मलिक की कार्यशैली है। इसी कार्यशैली से उन्होंने गाजियाबाद नगर निगम को चालू वित्त वर्ष में पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर और स्वाबलंबी बनाते हुए 1000 करोड़ रुपये के राजस्व वसूली का लक्ष्य निर्धारित किया है।

विजय मिश्रा (उदय भूमि)
गाजियाबाद। खेलते तो सभी हैं, लेकिन विषम परिस्थितियों में अपने शानदार प्रदर्शन से टीम को जीत दिलाने वाला व्यक्ति ही कप्तान कहलाता है। उत्तर प्रदेश सरकार के युवा आईएएस अधिकारी विक्रमादित्य सिंह मलिक की कार्यशैली की खूब चर्चा हो रही है। कर्ज और देनदारियों के मकड़जाल में उल­झे गाजियाबाद नगर निगम को आर्थिक संपन्नता तक पहुंचाने के फार्मूले की हर तरफ चर्चा हो रही है। गाजियाबाद नगर निगम कई बड़े और महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। शहर में विकास की रफ्तार को गति मिलने के साथ ही गाजियाबाद को प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। गाजियाबाद नगर निगम की इस कायापलट के लिए विक्रमादित्य सिंह मलिक ने किसी रॉकेट सांइस का फार्मूला नहीं लगाया बल्कि उन्होंने ठोस प्लानिंग, फाइनेंशियल कंट्रोल, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और राजस्व वसूली पर जोर देते हुए अनुशासित तरीके से काम किया। विक्रमादित्य सिंह मलिक की इसी मेहनत का नतीजा है कि गाजियाबाद नगर निगम के नाम कई रिकॉर्ड दर्ज हुए हैं। मलिक ने नगर आयुक्त के रूप में गाजियाबाद नगर निगम को आर्थिक रूप से स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बनाने का जो लक्ष्य निर्धारित किया था, वह उसके बेहद करीब पहुंच चुके हैं। राजस्व वसूली के मामले में गाजियाबाद नगर निगम ने नया कीर्तिमान बनाया है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में गाजियाबाद नगर निगम ने 620 करोड़ रुपये की राजस्व वसूली की है। जो कि पिछले वित्तीय वर्ष से 265 करोड़ रुपये अधिक है। गाजियाबाद नगर निगम की चर्चा इसलिए भी अधिक हो रही है क्योंकि राजस्व वसूली के ग्रोथ में लखनऊ और कानपुर को भी पीछे छोड़ दिया है। गाजियाबाद का ग्रोथ रेट 75 प्रतिशत है। जबकि लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज सहित प्रदेश के अधिकांश नगर निगम का ग्रोथ रेट 50 प्रतिशत से नीचे हैं। लखनऊ नगर निगम ने राजस्व वसूली में 46 फीसद की ग्रोथ हासिल की है। वहीं, कानपुर नगर निगम का ग्रोथ रेट 35 फीसद है। यानी कानपुर नगर निगम के मुकाबले गाजियाबाद नगर निगम ने दोगुना से भी अधिक ग्रोथ रेट हासिल किया।

 

चुपचाप कार्य योजना को पहनाते हैं अमलीजामा
बिना शोर मचाये चुपचाप काम करते हुए आपेक्षित परिणाम हासिल करना विक्रमादित्य सिंह मलिक की कार्यशैली है। इसी कार्यशैली से उन्होंने गाजियाबाद नगर निगम को चालू वित्त वर्ष में पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर और स्वाबलंबी बनाते हुए 1000 करोड़ रुपये के राजस्व वसूली का लक्ष्य निर्धारित किया है। दिगर बात यह है कि राजस्व वसूली के लक्ष्य में नगर आयुक्त स्वयं जुट गये हैं। अधिनिस्थ अधिकारियों के साथ नियमित रूप से बैठकें करने के साथ ही वसूली बढ़ाने को लेकर आवश्यक दिशा निर्देश भी दे रहे हैं। सभी जोन से नियमित समीक्षा रिपोर्ट मंगाई जा रही है। राजस्व वसूली बढ़ाने के साथ ही नगर आयुक्त कई ऐसे प्रोजेक्ट को लेकर प्लानिंग कर रहे हैं, जिससे भविष्य में नगर निगम को काफी आमदनी होगी। गौर करने वाली बात यह है कि नगर आयुक्त के रूप में विक्रमादित्य सिंह मलिक का कार्यकाल अभी महज डेढ़ वर्ष ही हुआ है। ऐसे में अगले कुछ वर्षों में नगर निगम के नाम कई और रिकार्ड दर्ज होंगे। किसी भी नगर आयुक्त के लिए राजस्व बढ़ाना सबसे महत्वपूर्ण काम माना जाता है। शहर में किस तरह से विकास कार्य होंगे वह इस बात पर निर्भर करता है कि नगर निगम को कितनी आमदनी हो रही है। विक्रमादित्य सिंह मलिक ने जब गाजियाबाद का चार्ज संभाला था उस समय नगर निगम की राजस्व वसूली 277 करोड़ रुपये थे। जो कि अब बढ़कर 620 करोड़ तक पहुंच गई है। यह आंकड़े अपने आप में बहुत कुछ बयां कर रहा है।
विकास के नए आयाम गढ़ रहे हैं नगर आयुक्त
नगर आयुक्त न केवल आर्थिक स्थिति सुधारने पर जुटे हैं बल्कि विकास कार्यों को भी गति देने में लगातार प्रयासरत हैं। शहर में सड़क, सीवर, पानी जैसी प्रमुख जरूरत को पूरा करने के लिए टीम को लगाए हुए हैं। वह विकास के नए आयाम गढ़ रहे हैं। लोगों की शिकायतों का तुरंत समाधान उनकी कार्यशैली का प्रमुख हिस्सा है। नगर निगम में आने वाली शिकायतों की लगातार निगरानी करना और उनका समाधान करना उनकी प्राथमिकता में रहता है।
विक्रमादित्य सिंह मलिक
नगर आयुक्त
नगर निगम को स्वाबलंबी बनाने के लिए आर्थिक रूप से संपन्न होना बेहद जरूरी है। नगर निगम की आमदनी कैसे बढ़े इसको लेकर प्रयास किया जा रहा है। आय बढ़ाने के नये स्त्रोत ढ़ूढ़े जा रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में राजस्व वसूली में गाजियाबाद नगर निगम ने अच्छा प्रदर्शन किया है। चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में हमने जो लक्ष्य निर्धारित किया है, उसे हासिल करने को लेकर काम किया जा रहा है। नई संपत्तियों की पहचान कर उन्हें टैक्स नेट के दायरे में लाया जा रहा है। टैक्स विभाग में कई सुधार किये जा रहे हैं। इसके और अच्छे परिणाम दिखाई देंगे।
विक्रमादित्य सिंह मलिक
नगर आयुक्त
गाजियाबाद नगर निगम