कोडीन युक्त सिरप की अवैध बिक्री पर अब गाजियाबाद में बड़ी कार्रवाई की तैयारी

-कोडीन सिरप की अवैध बिक्री पर प्रशासन सख्त, हर स्तर पर होगी कार्रवाई
-गाजियाबाद केमिस्ट एसोसिएशन ने औषधि नियंत्रक से की सख्त जांच की मांग
-विशेष टीम के गठन से अवैध बिक्री पर जल्द नजर
-कोडीन युक्त सभी प्रोडक्ट्स की होगी गहन जांच: आशुतोष मिश्रा
-जनपद के मेडिकल स्टोरों और वितरकों पर भी होगी कार्रवाई
-सभी व्यापारियों और आम जनता से अपील-संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत सूचना दें

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। जनपद में कोडीन युक्त सिरप की अवैध बिक्री का मामला लगातार गहराता जा रहा है। नशे के कारोबार से शहर की छवि धूमिल हो रही है और युवाओं के जीवन पर इसका दुष्प्रभाव बढ़ता जा रहा है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए गाजियाबाद केमिस्ट एसोसिएशन (रजि.) ने प्रशासन से ठोस कदम उठाने की मांग की है। संस्था के अध्यक्ष राजदेव त्यागी ने मंगलवार को औषधि नियंत्रक उत्तर प्रदेश शशि मोहन गुप्ता से दूरभाष पर वार्ता कर इस पूरे मामले में व्यापक जांच और सख्त कार्रवाई की अपील की। राजदेव त्यागी ने कहा कि पिछले दो वर्षों से जनपद में मैनकाइंड फार्मा की कोडीस्टार एनएफ सहित कई जेनेरिक कंपनियों द्वारा कोडीन युक्त सिरप की बिक्री बढ़ी है, जिससे नशे की लत फैल रही है। उन्होंने कहा कि इन सभी कंपनियों की बिक्री का दो वर्षों का पूरा रिकॉर्ड खंगालना जरूरी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि आखिर ये उत्पाद कहां और किन माध्यमों से अवैध रूप से बिक रहे हैं। त्यागी ने कहा कि यह सिर्फ एक व्यापारिक या प्रशासनिक मामला नहीं बल्कि जनहित और समाज की सुरक्षा से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि इस नशे के कारोबार का अंत किया जाए। स्वच्छ छवि से दवा व्यापार करने वाले व्यापारी इन अवैध गतिविधियों की वजह से बदनाम हो रहे हैं। गाजियाबाद की पहचान ईमानदार व्यापारियों के शहर के रूप में है, और हम इसे दागदार नहीं होने देंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि विभाग की एक विशेष टीम गठित की जानी चाहिए, जो केवल इस विषय पर केंद्रित होकर काम करे। त्यागी ने बताया कि जनपद में फिलहाल केवल दो औषधि निरीक्षक तैनात हैं, जबकि यहां 5000 से अधिक लाइसेंसधारी, सी. एंड. एफ. एजेंसियां, डिस्ट्रीब्यूटर, मैन्युफैक्चरर्स और ब्लड बैंक संचालित हैं। ऐसे में काम की अधिकता के कारण जांच और कार्रवाई प्रभावित हो रही है, जिसे दूर करने के लिए प्रशासन को अतिरिक्त टीम नियुक्त करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिले में सैकड़ों अवैध मेडिकल स्टोर भी सक्रिय हैं, जहां बिना किसी लाइसेंस के दवाएं बेची जा रही हैं। उन्होंने मांग की कि इन पर भी सख्त कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस प्रकार के अवैध कार्य करने का साहस न कर सके। उन्होंने बताया कि संस्था शीघ्र ही सरकार को भी एक विस्तृत प्रतिवेदन सौंपेगी, जिसमें नशे के अवैध कारोबार पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के सुझाव दिए जाएंगे।

इसी बीच, ड्रग इंस्पेक्टर आशुतोष मिश्रा ने भी इस पूरे प्रकरण पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रशासन इस विषय को अत्यंत गंभीरता से ले रहा है। उन्होंने बताया कि मार्केट में जितने भी कोडीन युक्त प्रोडक्ट हैं-चाहे वे एबॉट, मैनकाइंड, या किसी छोटी-बड़ी लेबोरेटरी कंपनी के हों-सभी की जांच कराई जा रही है। ड्रग इंस्पेक्टर ने आगे बताया कि विभाग जल्द ही एक समर्पित टीम गठित करने जा रहा है, जो इन सभी औषधियों की निगरानी, सैंपल जांच और वितरण चैनल की जांच करेगी। यदि किसी भी स्टोर या वितरक के खिलाफ अनियमितता या अवैध बिक्री का मामला पाया गया, तो तुरंत लाइसेंस निरस्त कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि टीम को छापेमारी के विशेष अधिकार दिए जाएंगे और हर सप्ताह रिपोर्ट तैयार कर जिला प्रशासन को सौंपी जाएगी। मिश्रा ने आम जनता और व्यापारियों से भी अपील की कि वे किसी भी संदिग्ध दवा बिक्री की सूचना विभाग को दें, ताकि जनपद को नशे की गिरफ्त से मुक्त किया जा सके। गाजियाबाद केमिस्ट एसोसिएशन और औषधि विभाग की इस सक्रियता से उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में कोडीन युक्त सिरप के अवैध कारोबार पर पूरी तरह लगाम लगेगी और जनपद में स्वच्छ, सुरक्षित व जिम्मेदार दवा व्यापार की छवि एक बार फिर स्थापित होगी। राजदेव त्यागी ने अंत में कहा कि यह लड़ाई सिर्फ एक संगठन की नहीं बल्कि समाज के हर जिम्मेदार नागरिक की है। उन्होंने कहा कि हम सबकी जिम्मेदारी है कि युवाओं को इस नशे के जाल से बचाया जाए और भविष्य को स्वस्थ बनाया जाए। गाजियाबाद को स्वच्छ और सुरक्षित बनाना हमारा सामूहिक कर्तव्य है।