-यात्रा मार्ग से लेकर मंदिर प्रांगण तक सुरक्षा और यातायात प्रबंधन की हर कड़ी की गहराई से समीक्षा
-श्रद्धालुओं को पूरी सुरक्षा और सुविधा देना हमारी प्राथमिकता: आलोक प्रियदर्शी
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। शिवभक्तों की आस्था का महापर्व कांवड़ यात्रा जैसे-जैसे गति पकड़ रहा है, वैसे-वैसे जनपद प्रशासन भी सजग और तत्पर होता जा रहा है। श्रावण माह के पवित्र अवसर पर जहां एक ओर श्रद्धालु गंगा जल लेकर दूधेश्वरनाथ मंदिर जैसे प्राचीन शिवधाम में जलाभिषेक के लिए उमड़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर गाजियाबाद पुलिस प्रशासन की सक्रियता और संवेदनशीलता ने यह साबित कर दिया है कि आस्था की डगर को सुरक्षा और सुगमता से जोडऩा उनका दायित्व नहीं, बल्कि सेवा है। इसी कड़ी में शनिवार को अपर पुलिस आयुक्त (अपराध एवं कानून-व्यवस्था) आलोक प्रियदर्शी एवं नगर पुलिस उपायुक्त धवल जायसवाल ने एसीपी कोतवाली रितेश त्रिपाठी, कविनगर भाष्कर वर्मा, नंदग्राम पूनम मिश्रा और कोतवाली एसएचओ संजीव शर्मा के साथ दूधेश्वरनाथ मठ मंदिर पहुंचकर कांवड़ यात्रा को लेकर सुरक्षा, ट्रैफिक प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण की व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने मंदिर मार्ग, बैरिकेडिंग क्षेत्रों, प्रवेश और निकासी बिंदुओं तथा भीड़भरे संवेदनशील इलाकों की बारीकी से समीक्षा की। इस अवसर पर सहायक पुलिस आयुक्त कोतवाली नगर, कविनगर एवं नंदग्राम भी अपने अमले के साथ मौजूद रहे। आलोक प्रियदर्शी, जिनकी प्रशासनिक छवि एक दृढ़, योजनाबद्ध और परिणामोन्मुख अधिकारी की रही है, उन्होंने मौके पर स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी श्रद्धालु को असुविधा न हो। उन्होंने कहा कि यह केवल धार्मिक उत्सव नहीं है, यह जन-आस्था का महासागर है जिसमें एक भी चूक क्षम्य नहीं हो सकती। हमारी पहली प्राथमिकता श्रद्धालुओं को निर्बाध, सुरक्षित और व्यवस्थित वातावरण देना है। चाहे वह रूट डायवर्जन हो, ट्रैफिक मैनेजमेंट हो या भीड़ नियंत्रण हर कड़ी पर हमारी चौकस निगाह होनी चाहिए।
डीसीपी सिटी धवल जायसवाल, जो अपनी कार्यकुशलता, तेज निर्णय क्षमता और फील्ड विजि़बिलिटी के लिए पुलिस महकमे में विशेष स्थान रखते हैं, उन्होंने भी इस अवसर पर कहा कि दूधेश्वरनाथ मंदिर केवल एक धार्मिक केंद्र नहीं, बल्कि पूरे गाजियाबाद की भावनाओं से जुड़ा स्थल है। हर सोमवार और विशेष रूप से सावन में यहां भक्तों की संख्या अप्रत्याशित हो जाती है। हम पहले से तैयारी कर रहे हैं, ताकि भीड़ चाहे जितनी भी हो, न कोई अव्यवस्था हो, न कोई असहजता। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि मंदिर के समीपवर्ती सभी मार्गों पर पुलिस पिकेट्स की सघन तैनाती सुनिश्चित की जाए, सीसीटीवी निगरानी हर कोने पर सक्रिय रहे, और किसी भी आपात स्थिति के लिए क्तक्रञ्ज (क्विक रिस्पॉन्स टीम) हर वक्त तैयार हो। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि कांवड़ यात्रियों के रुकने, चलने और विश्राम के लिए बनाए गए अस्थायी शिविरों के आसपास पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था और साफ-सफाई बनी रहे।
निरीक्षण के दौरान यह भी निर्णय लिया गया कि मंदिर परिसर के प्रवेश और निकासी मार्गों पर एकतरफा यातायात व्यवस्था लागू की जाएगी, जिससे किसी प्रकार की धक्का-मुक्की या भगदड़ की स्थिति न उत्पन्न हो। साथ ही, आस-पास के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और स्थानीय निवासियों से भी समन्वय बनाकर शांतिपूर्ण और सहयोगात्मक वातावरण तैयार किया जाएगा। गौरतलब है कि गाजियाबाद पुलिस ने इस वर्ष कांवड़ यात्रा को लेकर न केवल पारंपरिक इंतजाम किए हैं, बल्कि तकनीकी सहायता, डेटा-आधारित भीड़ विश्लेषण और ड्यूटी रोटेशन सिस्टम जैसी नई पहलें भी लागू की हैं, जिससे पुलिस बल पर अतिरिक्त दबाव न पड़े और व्यवस्था लगातार गतिशील बनी रहे। मंदिर क्षेत्र में निगम द्वारा टेंट, पेयजल, सफाई और छांव की व्यवस्थाएं भी की गई हैं, जिससे पुलिस प्रशासन को सहयोग मिल रहा है। शहरवासियों और श्रद्धालुओं में प्रशासन की इन तैयारियों को लेकर विश्वास और संतोष की भावना देखी जा रही है। दूधेश्वरनाथ मंदिर की ओर आने वाले शिवभक्त अब न केवल भक्ति भाव से अभिसिंचित हैं, बल्कि उन्हें यह विश्वास भी है कि उनका सुरक्षा कवच पूरी तत्परता के साथ तैनात है।

















