• गाजियाबाद नगर निगम ने बनाई 10 प्रमुख नालों के शुद्धिकरण की योजना
• आईआईटी दिल्ली व मुंबई के विशेषज्ञों संग नगर ने बनाई प्राकृतिक पद्धति से शोधित करने की कार्य योजना
• हिंडन में गिरने वाले नालों का जल होगा अब साफ, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक कदम
• आईआईटी मुंबई के साइंस टेक्निकल हेड इंद्रकांत झा ने दिखाया जीवंत मॉडल, उसी आधार पर होगी कार्यवाही
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। हिंडन नदी के पुनर्जीवन की दिशा में गाजियाबाद नगर निगम ने एक साहसिक, ठोस और ऐतिहासिक कदम उठाया है। नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक के नेतृत्व में नगर निगम जलकल विभाग द्वारा 10 प्रमुख नालों को चिन्हित किया गया है, जिनके जल को अब प्राकृतिक पद्धति से शोधित कर ही हिंडन में प्रवाहित किया जाएगा। इस पूरी कार्ययोजना को आईआईटी दिल्ली और आईआईटी मुंबई के विशेषज्ञों की तकनीकी सलाह व मार्गदर्शन में अंजाम दिया जा रहा है। नगर आयुक्त एवं जलकल महाप्रबंधक कामाख्या प्रसाद आनंद ने बुधवार को विशेषज्ञों के साथ मिलकर पूरे मॉडल का डेमो देखा और उसकी कार्यशीलता की पुष्टि की। यह पहल उत्तर प्रदेश में नदी संरक्षण के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी शुरुआत के रूप में देखी जा रही है।
इस योजना के अंतर्गत अर्थला, सिटी फॉरेस्ट, डासना, करहेड़ा, केला भट्टा, नंदग्राम, प्रताप विहार, राहुल विहार, इंदिरापुरम और हिंडन विहार जैसे प्रमुख नालों का जल प्राकृतिक जैविक तकनीकों से शोधित किया जाएगा। इसमें फ्लोटिंग कचरे की सफाई, पानी में घुले हुए हानिकारक तत्वों और बैक्टीरिया की शुद्धि, और ऑक्सीजन लेवल को बढ़ाने जैसी प्रक्रियाएं अपनाई जाएंगी। नगर निगम का मानना है कि यदि इन 10 प्रमुख नालों से स्वच्छ जल हिंडन में पहुंचेगा, तो नदी में प्रदूषण का स्तर काफी हद तक कम हो जाएगा, और उसका पारिस्थितिक संतुलन पुन: स्थापित हो सकेगा। नगर आयुक्त ने बताया कि हमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के निर्देशों के अनुरूप नदियों की रक्षा करनी है। यही कारण है कि हम रासायनिक विकल्पों से दूर रहकर प्रकृति आधारित समाधान को प्राथमिकता दे रहे हैं। आईआईटी के विशेषज्ञों से मिले सहयोग से हमारा आत्मविश्वास और योजना दोनों मजबूत हुए हैं।
आईआईटी वैज्ञानिकों का सहयोग बना रहा गाजियाबाद की ताकत
नगर निगम द्वारा आईआईटी दिल्ली और मुंबई के विशेषज्ञों से तकनीकी मार्गदर्शन लिया जा रहा है। इस प्रक्रिया में आईआईटी मुंबई के साइंस टेक्निकल हेड डॉ. इंद्रकांत झा द्वारा डेमो प्रस्तुत किया गया, जिसके आधार पर आगे की विस्तृत कार्यवाही की जा रही है।
स्वच्छता, पर्यावरण और तकनीक का अद्भुत संगम
यह पूरी कार्ययोजना गाजियाबाद के लिए केवल एक पर्यावरणीय परियोजना नहीं, बल्कि जन स्वास्थ्य, जल संरक्षण और सतत विकास का प्रतीक बन रही है। नगर निगम ने यह दिखा दिया है कि जब संकल्प हो, तो नदियों की रक्षा केवल नारा नहीं, जमीनी सच्चाई बन सकती है।
नदियों की रक्षा के लिए तकनीक और प्रकृति का संगम
नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने बताया हिंडन नदी की स्वच्छता और संरक्षण हमारी प्राथमिकता है। गाजियाबाद नगर निगम प्राकृतिक पद्धति से नालों के जल को शोधित करने की दिशा में ठोस कदम उठा रहा है। हम किसी भी प्रकार के केमिकल ट्रीटमेंट की बजाय, पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने वाली तकनीकों को प्राथमिकता दे रहे हैं। हमारी योजना है कि हिंडन में गिरने वाले 10 प्रमुख नालों के जल को फ्लोटिंग वेस्ट हटाकर, बैक्टीरिया का शमन कर, ऑक्सीजन स्तर बढ़ाते हुए प्राकृतिक रूप से शोधित किया जाए। इस कार्य के लिए आईआईटी दिल्ली व आईआईटी मुंबई के विशेषज्ञों से तकनीकी मार्गदर्शन लिया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने राज्य में जल स्रोतों के संरक्षण पर विशेष बल दिया है। हम उन्हीं के निर्देशों के तहत नदियों को स्वच्छ, जीवंत और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए यह पहल कर रहे हैं। हमारा प्रयास है कि गाजियाबाद इस दिशा में पूरे प्रदेश के लिए एक मॉडल शहर बने। जलकल विभाग और विशेषज्ञों की टीम के सहयोग से हम शीघ्र ही कार्य को धरातल पर लाकर हिंडन नदी में स्वच्छ जल प्रवाहित करने की दिशा में परिणाम देना प्रारंभ करेंगे।
मुख्य बिंदु:
• हिंडन में गिरने वाले 10 नालों को प्राकृतिक पद्धति से शोधित किया जाएगा
• आईआईटी दिल्ली व मुंबई के वैज्ञानिकों का तकनीकी मार्गदर्शन
• डेमो प्रक्रिया से निकला ठोस मॉडल
• ऑक्सीजन लेवल बढ़ाकर गंदगी की शुद्धि की जाएगी
• मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप नदी पुनर्जीवन की मिसाल

















