भारत बनेगा टेक्निकल टेक्सटाइल का ग्लोबल हब: गिरिराज सिंह

-निटरा में सुरक्षात्मक वस्त्रों पर राष्ट्रीय सम्मेलन, मिल्कवीड फाइबर नवाचार बना आकर्षण का केंद्र
-केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह व मंत्री राकेश सचान ने किया उद्घाटन
-मिल्कवीड फाइबर तकनीक और स्वदेशी मशीन का अनावरण, वैज्ञानिक शोध को मिली नई पहचान
-सुरक्षात्मक वस्त्रों के 40 अरब डॉलर वैश्विक बाजार में भारत की मजबूत दावेदारी
-किसानों की आय बढ़ाने और आत्मनिर्भर भारत को मजबूती देने पर जोर
-वैज्ञानिकों, उद्योगपतियों और शिक्षाविदों ने नवाचार व भविष्य की तकनीकों पर की चर्चा
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। राष्ट्रीय वस्त्र अनुसंधान संस्थान (निटरा) में गुरुवार को सुरक्षात्मक वस्त्रों में नवाचार विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। सम्मेलन का उद्घाटन भारत सरकार के केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह तथा उत्तर प्रदेश सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग, खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम उद्योग, हथकरघा एवं वस्त्र मंत्री राकेश सचान ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम में खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग की मुख्य कार्यकारी अधिकारी रूप राशी, वस्त्र मंत्रालय की संयुक्त सचिव मनीषा चटर्जी, निटरा चेयरमैन विदित जैन, डिप्टी चेयरमैन संदीप होरा तथा निटरा महानिदेशक डॉ. एम.एस. परमार सहित देशभर से आए उद्योगपति, शिक्षाविद, वैज्ञानिक और अधिकारी उपस्थित रहे। सम्मेलन के दौरान केंद्रीय और प्रदेश के मंत्रियों ने निटरा परिसर में विकसित आकौआ (मिल्कवीड) की खेती का निरीक्षण किया और इसके वैज्ञानिक विकास की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह नवाचार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूत करने वाला प्रयास है।

 

मंत्रियों ने डॉ. एम.एस. परमार को मिल्कवीड फाइबर अनुसंधान का सूत्रधार बताते हुए उनकी वैज्ञानिक उपलब्धियों की खुलकर प्रशंसा की। अपने स्वागत संबोधन में डॉ. परमार ने कहा कि यह सम्मेलन भारत को सुरक्षात्मक वस्त्र निर्माण में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। वहीं निटरा चेयरमैन विदित जैन ने संस्थान की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि निटरा देश की औद्योगिक और तकनीकी प्रगति में निरंतर योगदान देता रहेगा। कार्यक्रम के दौरान मंत्रियों द्वारा डॉ. परमार की मिल्कवीड पर लिखित पुस्तक का विमोचन किया गया तथा मिल्कवीड आधारित प्रौद्योगिकी पर निर्मित वृत्तचित्र क्लोसेल जारी किया गया। इसे किसानों और युवा पीढ़ी के लिए महत्वपूर्ण ज्ञान दस्तावेज बताया गया। इसके साथ ही निटरा द्वारा विकसित स्वदेशी मशीन ‘मिल्कवीड रेशा एवं बीज पृथक्करण यंत्र’ का अनावरण किया गया, जो पौधे के बीज और रेशे को अलग करने में सहायक है। उत्तर प्रदेश के मंत्री राकेश सचान ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. परमार ने गाजियाबाद की धरती को कर्मभूमि बनाकर प्रदेश और देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रदेश सरकार निटरा और वैज्ञानिक अनुसंधान के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है।

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि सुरक्षात्मक वस्त्रों का वैश्विक बाजार लगभग 40 अरब डॉलर का है, जिसमें भारत की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 से 2025 के बीच वस्त्र क्षेत्र ने लगभग पांच करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान किया है और देश में दो लाख से अधिक स्टार्टअप स्थापित हुए हैं। उन्होंने निटरा द्वारा मिल्कवीड फाइबर और पराली से रेशा निकालने की तकनीक को ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उनके अनुसार मिल्कवीड फाइबर अत्यंत हल्का होने के साथ माइनस 30 डिग्री तापमान में भी गर्माहट बनाए रखने की क्षमता रखता है। ओडिशा में एक स्वयंसेवी संस्था के साथ समझौते के तहत 50 एकड़ क्षेत्र में इसकी खेती शुरू की जा रही है, जिससे लगभग 50 टन रेशा उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। किसानों को प्रति एकड़ डेढ़ से दो लाख रुपये तक आय मिलने की संभावना व्यक्त की गई है तथा एक बार रोपण करने पर यह फसल लगभग दस वर्ष तक उत्पादन देती है। मंत्री ने बताया कि मिल्कवीड फाइबर से शाकाहारी चमड़ा भी विकसित किया जा रहा है, जो प्राकृतिक और कृत्रिम सामग्री से बने पारंपरिक चमड़े का पर्यावरण अनुकूल विकल्प होगा।

अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उद्योगों को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है, जबकि वस्त्र क्षेत्र में देश तेज गति से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने असम और पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति पर भी टिप्पणी करते हुए भारतीय जनता पार्टी की जीत का विश्वास जताया। सम्मेलन के तकनीकी सत्रों में देशभर के वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और उद्योग विशेषज्ञों ने अपने शोध प्रस्तुत किए तथा सुरक्षात्मक वस्त्रों के भविष्य, नवाचार और उद्योग विकास पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम के अंत में डॉ. एम.एस. परमार ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों तथा सम्मेलन के प्रायोजक राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन और मिशन निदेशक अशोक मल्होत्रा का आभार व्यक्त किया और भविष्य में ऐसे आयोजनों को निरंतर आयोजित करने की प्रतिबद्धता जताई।